नई दिल्ली: जैसे जैसे आम आदमी तक नए नोटों की उपलब्धता बढ़ी है, वैसे वैसे लोगों का ध्यान 500 और 1000 रुपये के नोटों की किल्लत और बैंकों के आगे लगी लाइनों से हट कर विमुद्रीकरण से अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव की और जा रहा है. जहां इस बात पर लगभग सभी लोग सहमत हैं कि इससे काले धन पर रोकथाम लगेगी और देश की अर्थव्यवस्था को फायदा होगा वहीँ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि सबसे अधिक प्रभाव रीयल एस्टेट के क्षेत्र में देखने को मिलेगा. प्रोइक्विटी नामक रीयल एस्टेट रिसर्च फर्म की रिपोर्ट में कहा गया है कि विमुद्रीकरण के बाद देश के बड़े 42 शहरों में मकानों की कीमत 30 पर्सेंट तक कम हो सकती है। फर्म का कहना है कि इससे 2008 के बाद डेवेलपर्स द्वारा बेची गई और अनबिकी आवासीय संपत्तियों का बाजार मूल्य 8 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक घट जाएगा।
Real estate down after demonetization?
प्रोइक्विटी ने एक बयान में कहा है कि 500 और 1000 रुपये के नोट बंद किए जाने का असर रीयल एस्टेट मार्केट पर पड़ेगा। बयान में कहा गया है,‘भारतीय प्रॉपर्टी बाजार पर नोटबंदी के असर के कारण अवासीय संपत्तियों का बाजार मूल्य अगले 6-12 महीने में 8,02,874 करोड़ रुपये घट जाएगा।’
कुल मार्केट वैल्यू में 2,00,330 करोड़ की सर्वाधिक गिरावट मुंबई में आएगी। इसके बाद बेंगलुरु में 99,983 करोड़ और गुड़गांव में 79,059 करोड़ की गिरावट आ सकती है। भारत में रीयल एस्टेट सेक्टर का कुल मूल्य 39,55,044 करोड़ बताया जाता है। इसमें 8,02,874 करोड़ की कमी आने से यह 31,52170 करोड़ का रह जाएगा।
रीयल एस्टेट में इस गिरावट का असर एक बार फिर काले धन पर होगा. ऐसा माना जाता है कि रीयल एस्टेट में पिछले दशक में आयी उछाल का बड़ा कारन ब्लैक मनी का रीयल एस्टेट में पार्क होना था. हालांकि इस का बहुत बड़ा असर ऐसे छोटे निवेशकों पर होगा जिन्होंने अपने सफ़ेद धन यानी नंबर एक की कमाई से प्रीमियम में भुगतान कर फ्लैट आदि खरीदे थे जिन्हें उन्होंने इन्वेस्टमेंट के तौर पर खरीद था ताकि भविष्य में इनकी कीमत बढ़ने पर बेच कर मुनाफा कमाया जा सके.