जीवन का हर दिन होली है ! (Holi par Kavita) 2016-03-23RituV जीवन का हर दिन होली है ! कहीं एक नन्हा सा बिरवा उपज रहा है, धीरे-धीरे सोख रहा है थोड़ा पानी, थोड़ी मिट्टी, धीरे-धीरे [...]
वसंत आगमन पर संध्या नवोदिता की कविता 2016-02-122016-02-12RituV आदमी में बहुत कुछ होता है थोडा पेड़, थोड़ी घास, थोड़ी मिट्टी, थोड़ा वसंत थोड़ा सूखा, थोड़ी बाढ़ Advertisement इस दुनिया में ऐसा [...]
दाढ़ी खींचने की सजा – अकबर बीरबल की कहानियां 2015-10-302016-11-21simran kaur एक दिन, बादशाह अकबर (Akbar) बहुत विचारशील मुद्रा में दरबार में आए। उन्होंने दरबार में उपस्थित अपने सभी मंत्रियों की तरफ देखा और [...]
खूं से लिखी, वो किताब ढूंढ़ता हूँ – आनंद मधुकर 2015-10-302017-08-03RituV ठौर ढूंढ़ता हूँ, ठाँव ढूंढ़ता हूँ , शहर में कहीं अपना गाँव ढूंढ़ता हूँ. जाने सफर में कहाँ खो गया हूँ , ज़मीं [...]
बेटियां… 2015-10-302019-07-10RituV दुआ करते हैं बेटे की और , हो जाती हैं बेटियां, बड़ी जीवट होती हैं ये, यूं ही पल जाती हैं बेटियां| चौका [...]
हिंदुस्तान के हिस्से में तो महज़ गुलामी है आई 2015-10-162016-12-03RituV हिंदुस्तान के हिस्से में तो महज़ गुलामी है आई हिंदुस्तान के हिस्से में तो महज़ गुलामी है आई, अपने हों गद्दार तो कैसे [...]
मेरे अल्लाह खतरे में तेरे भगवान खतरे में 2015-10-112016-03-12simran kaur ग़ज़ल हमारी हर समय रहने लगी है जान खतरे में कभी दीवाली खतरे में कभी रमज़ान खतरे में किसी के ऐतराज़ों में उलझकर [...]
चाँद ख़ुदकुशी करने निकला है 2015-09-202016-11-21simran kaur आज मैं कोई कविता नहीं लिखूंगा कोई कहानी नहीं सुनाऊंगा बस बैठ कर इन्तेजार करुंगा Advertisement तुम्हें पता ना हो शायद कि सायों [...]
फिर उड़ने की तैयारी है 2015-09-072016-11-21RituV घर चौबारे की क्यारी में, हँसती है चारदीवारी में महके फूलों को साथ लिए शाखें हैं पहरेदारी में. Advertisement दूर पहाड़ों से उठती [...]
हसरतों का कोई क्या करे 2015-09-062016-11-21simran kaur हसरतें हसरतों का कोई क्या करे ना पूछती हैं ना बताती हैं बस दरवाजे पर खडी हो कर चुपचाप मुस्कुराती हैं Advertisement अब [...]