Naye makan ki neev dalte samay puja kyon karni chahiye?
बढ़ती हुई आबादी और कम पड़ती हुई जमीन के कारण आजकल लोग प्लाट लेकर मकान कम ही बना पाते हैं, लेकिन पुराने जमाने में बड़े बूढ़े कहा करते थे कि यदि प्लाट लेकर नया मकान बनाए तो नींव डालते समय पूजा जरूर करें। वास्तु के अनुसार प्लाट में दोष नहीं होना चाहिए। इसीलिए किसी भी प्लाट पर नया मकान बनाने से पहले हमारे यहां नींव के पूजन की परंपरा बनाई गई है। ऐसी मान्यता हे कि यदि नींव पूजन नहीं करते हैं तो उस घर में रहने वाले लोगों को हमेशा पर॓शानियों का सामना करना पड़ता है।
यदि किसी प्रकार की अशुद्धता जैसे वास्तुदोष, साथ ही जमीन में किसी तरह का कोई बुरा प्रभाव हो तो जमीन का वह भाग पूरी तरह शुद्ध होकर निवास योग्य हो जाता है। पुराने समय में इसे वास्तुदोष तो नहीं कहते थे। लेकिन इसका कारण अप्रत्यक्ष रूप से वास्तुदोष दूर करना ही था। ऐसा माना जाता है कि भूमि पूजन के समय देवताओं के आवाहन के कारण उस स्थान से नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है। साथ ही नींव के पूजन के बाद गृह प्रवेश भी विधिवत ढंग से करवाया जाए तो घर में हमेशा सुख शांति बनी रहती है।
भूमि पूजन में चाँदी के नाग और कलश की पूजा होती है। ऐसी मान्यता है कि भूमि के नीचे पाताल लोक है जिसके स्वामी भगवान विष्णु के सेवक शेषनाग भगवान हैं। इन्होंने ही अपने फन पर पृथ्वी को उठाकर रखा हुआ है। भूमि पूजन के समय नींव में चाँदी के साँप की पूजा का उद्देश्य शेषनाग की कृपा पाना होता है।
नींव में साँप को रखकर यह माना जाता है कि जिस प्रकार शेष नाग ने पृथ्वी को संभालकर रखा है उसी प्रकार शेष नाग उनके भवन को भी संभलकर रखें। भवन सुरक्षित और दीर्घायु होगा।
भूमि पूजन में कलश रखने के पीछे भी यही आस्था और विश्वास काम करता है कि इससे शेषनाग भगवान की कृपा प्राप्त होगी। शास्त्रों के अनुसार शेषनाग क्षीर सागर में रहते हैं इसलिए कलश में दूध, दही, घी डालकर शेषनाग का आह्वान मन्त्रों द्वारा कलश में किया जाता है ताकि शेषनाग भगवान का प्रत्यक्ष आशीर्वाद मिले।