कबीरा ते नर अँध है, गुरु को कहते और कबीर के दोहे Kabir ke dohe in Hindi 2020-05-102020-05-10RituV Comment कबीर के दोहे Kabir ke dohe in Hindi कबीरा ते नर अँध है, गुरु को कहते और । हरि रूठे गुरु ठौर है, [...]
कबीरा सोई पीर है, जो जाने पर पीर कबीर के दोहे Kabir ke dohe in Hindi 2020-05-102020-05-21RituV Comment कबीर के दोहे Kabir ke dohe in Hindi कबीरा सोई पीर है, जो जाने पर पीर । जो पर पीर न जानही, सो [...]
प्रेम पियाला जो पिए, सिस दक्षिणा देय कबीर के दोहे Kabir ke dohe in Hindi 2020-05-102020-05-21RituV Comment कबीर के दोहे Kabir ke dohe in Hindi प्रेम पियाला जो पिए, सिस दक्षिणा देय । लोभी शीश न दे सके, नाम प्रेम [...]
नहाये धोये क्या हुआ, जो मन मैल न जाए कबीर के दोहे Kabir ke dohe in Hindi 2020-05-102020-05-21RituV 1 कबीर के दोहे Kabir ke dohe in Hindi नहाये धोये क्या हुआ, जो मन मैल न जाए । मीन सदा जल में रहे, [...]
जब मैं था तब हरी नहीं, अब हरी है मैं नाही कबीर के दोहे Kabir ke dohe in Hindi 2020-05-102020-05-21RituV Comment कबीर के दोहे Kabir ke dohe in Hindi जब मैं था तब हरी नहीं, अब हरी है मैं नाही । सब अँधियारा मिट [...]
पाछे दिन पाछे गए हरी से किया न हेत कबीर के दोहे Kabir ke dohe in Hindi 2020-05-102020-05-21RituV Comment कबीर के दोहे Kabir ke dohe in Hindi पाछे दिन पाछे गए हरी से किया न हेत । अब पछताए होत क्या, चिडिया [...]
जिन घर साधू न पुजिये, घर की सेवा नाही कबीर के दोहे Kabir ke dohe in hindi 2020-05-102020-05-21RituV Comment कबीर के दोहे Kabir ke dohe in hindi जिन घर साधू न पुजिये, घर की सेवा नाही । ते घर मरघट जानिए, भुत [...]
प्रेम न बारी उपजे, प्रेम न हाट बिकाए कबीर के दोहे Kabir ke dohe in hindi 2020-05-102020-05-21RituV Comment कबीर के दोहे Kabir ke dohe in hindi प्रेम न बारी उपजे, प्रेम न हाट बिकाए । राजा प्रजा जो ही रुचे, सिस [...]
तन को जोगी सब करे, मन को विरला कोय कबीर के दोहे Kabir ke dohe in hindi 2020-05-102020-05-21RituV Comment कबीर के दोहे Kabir ke dohe in hindi तन को जोगी सब करे, मन को विरला कोय । सहजे सब विधि पाइए, जो [...]
तीरथ गए से एक फल, संत मिले फल चार कबीर के दोहे Kabir ke dohe in hindi 2020-05-102020-05-21RituV Comment कबीर के दोहे Kabir ke dohe in hindi तीरथ गए से एक फल, संत मिले फल चार । सतगुरु मिले अनेक फल, कहे [...]