Short Hindi Essay on Mera Priya Khel मेरा प्रिय खेल पर लघु निबंध

Short Essay on Mera Priye Khel

Mera Priya Khel par laghu nibandh

प्रस्तावना- जीवन में खेलों का बहुत महत्व है। खेलों से शरीर स्वस्थ और निरोग बनता है। स्वास्थ्य को अच्छा बनाए रखने के लिए खेल बहुत आवश्यक है। इनके बिना जीवन में नीरसता उत्पन्न हो जाती है। मनुष्य में आलस्य बढ़ने लगता है और शारीरिक क्षमता का विकास भी रूक जाता है।

खेलों के प्रकार- खेल कई प्रकार के होते हैं। कई खेल खुले वातावरण में ही खेले जा सकते हैं। तो कShort Essay on Mera Priye Khelई खेल कमरे के अन्दर बैठे बैठे खेले जा सकते हैं। कमरे के अन्दर खेले जाने वाले खेलों में मनोरंजन होता है, परन्तु शरीर में फुर्ती नहीं आती। उनसे स्वास्थ्य को कोई लाभ नहीं होता। कमरे के बाहर खेले जाने वाले खेल में खो-खो, कबड्डी, हाकी, फुटबाल, बालीबाल, बास्केट बाल आदि अनेक खेल हैं। मैं इन खेलों में से हाकी को ही सबसे अधिक पसन्द करता हूँ।

मेरा प्रिय खेल हाकी- हाकी मेरा प्रिय खेल है। यह अन्र्तराष्ट्रीय खेल है। हमारे देश का यह अत्यधिक प्रिय और सम्मानित खेल हे। यह बहुत पुराना खेल है। कुछ लोगों का मानना है कि यह ईसा से दो हजार वर्ष इसका प्रारम्भ हुआ था। सन् 1908 में सर्वप्रथम यह खेल ओलम्पिक में भी खेला गया था।

भारत में इसका प्रचलन पिछली शताब्दी में हुआ है। प्राचीन काल में खेला जाने वाला गुली डंडा इस खेल का प्रारम्भिक रूप है। इस दृष्टि से हम इस खेल को यदि बहुत पुराना कहें तो भी यह झूठ न होगा। आधुनिक हाकी खेल का आरम्भ अंग्रेजी शासन के साथ हुआ है। ध्यानचंद ने हाकी के खेल में खूब नाम कमाया है।

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‘हाकी’ के खेल में भी अन्य खेलों की भाँति दो दल होते हैं। प्रत्येक दल में ग्यारह-ग्यारह खिलाड़ी होते हैं। मुख्य रूप से यह खेल अस्सी मिनट का होता है। पैंतीस मिनट के बाद मध्यान्तर होता है। मध्यान्तर के बाद भी पैंतीस मिनट का खेल होता है। दोनो दलों के कप्तानों की स्वीकृति और सहमति से सिक्का उछाल कर खेल शुरू करने और मैदान को चुनने का कार्य होता है। खेल शुरू होने पर दोनों दलों के खिलाड़ी गोल करने के लिए जी जान एक कर देते हैं। जो दल अधिक गोल करने में सफल होता है, वही दल जीता हुआ माना जाता है। यदि खेल में किसी प्रकार के नियम तोड़े जाते हैं तो निर्णायक सीटी बजा कर खेल को रूकवा देता है। निर्णय का निष्पक्ष होना जरूरी है। वह जो भी निर्णय देता है दोनों दलों को उसे मानना पड़ता है।

लाभ- हाकी के खेल से बहुत लाभ हैं। इससे शरीर में चुस्ती आती है। शरीर बलवान बनता है और मनोरंजन भी होता है। इससे अनुशासन और मिलकर काम करने की भावना पैदा होती है। परस्पर सहयोग और भाईचारे की भावना के विकास के लिए भी यह खेल बहुत उत्तम है।

उपसंहार- खेल तो कई हैं और प्रत्येक व्यक्ति अपनी अपनी रूचि के अनुसार उनमें भाग लेता है, पर हाकी जैसे खेल की बातें ही निराली हैं। यही कारण है कि यह खेल मुझे बहुत अधिक प्रिय है।

Ritu

Author: Ritu

ऋतू वीर साहित्य और धर्म आदि विषयों पर लिखना पसंद करती हैं. विशेषकर बच्चों के लिए कविता, कहानी और निबंध आदि का लेखन और संग्रह इनकी हॉबी है. आप ऋतू वीर से उनकी फेसबुक प्रोफाइल पर संपर्क कर सकते हैं.