पटना: आखिर जिस घटनाक्रम का बेताबी से इंतज़ार था वह घट ही गया. हम बात कर रहे हैं जेडीयू में फूट की. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एनडीए का दामन थमने और शरद यादव के नाराज हो जाने के बाद जेडीयू में फूट पड़ना लाजिमी था और राजनीतिक गलियारों में इस खबर की प्रतीक्षा की जा रही थी कि कब ऐसा होगा.

sharad yadav nitish kumar rift jduशरद यादव द्वारा गैर-राजनीतिक मंच के बैनर तले बिहार यात्रा के बाद तो कयास लगाए जा रहे थे कि जेडीयू के एक रहने की पचि-खुची संभावनाएं भी समाप्त हो चुकी हैं. ऐसा ही हुआ. बिहार जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने 21 नेताओं को कथित तौर पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए पार्टी से निकाल दिया। ऐसा होने की देर थी कि विरोधी खेमे (नीतीश कुमार खेमा) ने वशिष्ठ नारायण सिंह को ही पार्टी बाहर का रास्ता दिखा दिया। वशिष्ठ के अलावा पूर्व मंत्री रमई राम और पूर्व सांसद अर्जुन राय जैसे बड़े नाम भी पार्टी से निकाले गए नेताओं में शामिल हैं।

जेडीयू में शरद यादव का गुट लगातार बगावती तेवर अपनाये हुए है। शरद यादव का दावा है कि कई राज्य इकाइयां उनके साथ हैं जबकि पार्टी अध्यक्ष नीतीश कुमार को केवल बिहार इकाई का समर्थन हासिल है। यादव के करीबी सहयोगी अरुण श्रीवास्तव ने कहा कि पूर्व पार्टी अध्यक्ष शरद यादव के धड़े को 14 राज्य इकाइयों के अध्यक्षों का समर्थन प्राप्त है। शरद के धड़े में 2 राज्यसभा सांसद और पार्टी के कुछ राष्ट्रीय पदाधिकारी भी शामिल हैं। आप को बता दें कि नीतीश कुमार ने हाल ही में शरद यादव को जेडीयू महासचिव और राज्यसभा में संसदीय दल के नेता पद से हटा दिया था।

नीतीश कुमार के एनडीए के साथ जाने के फैसले का खुला विरोध करने वाले सासंद अली अनवर अंसारी को भी पार्टी से बाहर निकाल दिया गया है। इस फैसले से खुलेआम नाराजगी जाहिर करने वाले शरद यादव और नीतीश कुमार अब आमने-सामने की लड़ाई की तैयारी में नजर आ रहे हैं। नीतीश कुमार ने शरद यादव के संबंध में कहा था कि पार्टी अपना फैसला ले चुकी है, वह किसी भी कदम को उठाने के लिए स्वतंत्र हैं। वहीं, शरद यादव ने भी नीतीश पर टिप्पणी की थी कि जेडीयू सिर्फ नीतीश कुमार की पार्टी नहीं है, यह मेरी भी पार्टी है।