सुरेश प्रभु के नेतृत्व वाली भारतीय रेलवे ने अब 11000 नौकरियों की कटौती करने के आदेश दिए हैं. रेलवे के सभी जोन से कुल 11000 नौकरियां ख़त्म की जाएंगी. इसके लिए रेल मंत्रालय ने बाकायदा सभी रेल प्रबंधकों को चिट्ठी लिखी है जिसमें कहा गया है कि रेलवे सत्र 2017-18 के लिए सालाना पदों की संख्या में कटौती करेगा.

railway letter for job loss

रेल बोर्ड का यह कदम रेलवे के खर्चों को कम करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है.

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भारतीय रेलवे में कुल 15 लाख लोग काम करते हैं और रोजगार के मामले में रेलवे सबसे बड़ा सरकारी प्लेटफार्म है परन्तु इस साल होने वाली कटौतियों ने अधिकारीयों सहित कर्मचारियों के कान खड़े कर दिए हैं. रेल बोर्ड द्वारा जारी किये गए पत्र में यह साफ़ किया गया है कि कुल 17 मंडलों से 10900 पदों को समाप्त किया जाएगा.

हालाँकि इस फैसले से सभी कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है परन्तु सीनियर अधिकारी इसे रूटीन कटौती बता रहे हैं. अधिकारीयों के अनुसान रेलवे हर साल 1 फ़ीसदी नौकरियों की कटौती करता है और यह नौकरियां समीक्षा के बाद ख़त्म की जाएंगी. इससे रेलवे के कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

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पत्र के मुताबिक, दक्षिण-पूर्व-मध्य रेलवे जोन को 400 पद समाप्त करने के लिए कहा गया है जबकि सेंट्रल और ईस्टर्न रेलवे को 1-1 हजार पद, ईस्ट कोस्ट रेलवे को 700, नॉर्दन रेलवे को 1500, नॉर्थ सेंट्रल रेलवे को 150, नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे को 700, नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे को 300, ईस्ट सेंट्रल रेलवे को 300, नॉर्थ ईस्टफ्रंटियर रेलवे को 550 पद खत्म करने को कहा गया है। इसी तरह सदर्न रेलवे को 1500, साउथ सेंट्रल रेलवे को 800, साउथ ईस्ट सेंट्रल और साउथ ईस्टर्न रेलवे को 400-400 पद, साउथ वेस्टर्न रेलवे को 200, वेस्टर्न रेलवे को 700 और वेस्ट सेंट्रल रेलवे को 300 पद खत्म करने को कहा गया है।

आपको यह भी बता दें कि रेलवे पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत स्टेशनों की नीलामी कर रहा है जिसमें देश भर के 23 रेलवे स्टेशन हैं. इन्हें पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत प्राइवेट कंपनियों को सौंपा जा रहा है. ऐसे ही एक फैसले में कानपूर रेलवे स्टेशन की नीलामी कीमत को 200 करोड़ रखा गया है.

हालाँकि रोजगार की समस्या विकराल रूप धारण कर रही है. पहले प्राइवेट कंपनियों से छंटनी की खबर आयी और अब रेलवे से पदों की कटौती की खबर आम आदमी को परेशान कर रही है.

हालाँकि सत्ता में आने से पहले श्री नरेंद्र मोदी ने हर साल 1 करोड़ रोजगार पैदा करने का वादा किया था जो कहीं से भी पूरा होता नहीं दिख रहा.