दिल्ली में ऑड-इवन योजना १५ तारीख से समाप्त हो गई है . हालांकि मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने कहा कि हम चाहते हैं कि दिल्ली वासी इस योजना को जारी रखें. सरकार द्वारा ऑड-इवन के खिलाफ चलती गाड़ियों पर दो हजार रुपये का फाइन तो अब नहीं लगेगा किन्तु यदि जनता अपने फायदे और पर्यावरण की बेहतरी के लिए इस ऑड-इवन स्कीम को जारी रखे तो दिल्ली के लिए अच्छा होगा. इस बीच एक बड़ी चौंकाने वाली बात निकल कर आई है जो दिल्ली वासियों के स्वास्थ्य से जुडी है. ऑड-इवन स्कीम के दिल्ली में लागू होने के साथ ही डॉक्टर्स के एक टीम ने दिल्ली निवासियों के फेफड़ों की जांच का अभियान भी शुरू किया था ताकि प्रदूषण और वाहनों के धुंए आदि का प्रभाव जांचा जा सके. इस जांच में जो आंकड़े निकल कर सामने आएं हैं वे बेहद सीरियस और दिल दहलाने वाले हैं.

Pollution in delhiइस स्टडी के अनुसार दिल्ली में हर तीसरे व्यक्ति का फेफड़ा प्रदूषण के कारण बीमार और बेकार हो चुका है और उन्हें इलाज की सख्त जरूरत है . इस अभियान के दौरान 3019 व्यक्तियों के फेफड़ों की जाँच की गई जिसमें पाया गया कि 1037 लोगों के लंग्स इस कदर पभावित हैं की उन्हें फ़ैल करार दिया जा सकता है . साफ़ है दिल्ली की आबो-हवा इस कदर Polluted हो चुकी है कि दिल्ली वासी जहर घुली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं और इस तरह से धीमी मौत का शिकार बनते जा रहे हैं .

इस अभियान का नेतृत्व कर रही मौलाना आज़ाद मेडिकल कालेज की डाक्टर सुनीता गर्ग के अनुसार मोबाइल वाहन द्वारा इस जांच अभियान को संचालित किया गया. प्रारम्भ में तो लोगों ने इस के प्रति बेरुखी दिखाई.  धीरे धीरे लोग अपना चेकअप कराने लगे . इस जांच में स्पाइरोमेटर नामक यंत्र का उपयोग किया गया जिसमें 70% या कम लंग फंक्शन पाया जाने पर आगे जांच कराने की सलाह दी गई है .

यह भी पढ़िए  नेशनल हेराल्ड केस में अरविन्द केजरीवाल की चुप्पी से उठते सवाल

यह भी पढ़िए – ODD-Even का विरोध करने वालों को सुप्रीम कोर्ट की फटकार

स्पष्ट है कि दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति भयावह होती जा रही है और ऐसे में सिर्फ ऑड-इवन जैसी वाहन नियंत्रण स्कीम की ही नहीं बल्कि बड़े कदम उठाने की जरूरत है .