एक ओर जहाँ देश में जुर्म के आंकड़े बढ़ते जा रहे हैं. देश के कोर्ट में ऐसे कई सारे मुक़दमे पड़े हैं जिसकी सुनवाई दशकों से नहीं हुई है. कही देश के पुलिस स्टेशनों में सीनीयर ऑफिसर्स की कमी है तो कई ऐसे न्यायालय हैं जहां जजों की कमी है.

लेकिन देश में एक ऐसा भी शहर भी है जहाँ जुर्म के नाम पर होने वाली घटना ना के बराबर है. यहां पुलिस के पास साल के कई महीनों में कोई काम नहीं होता. ये कल्पना करने वाली बात है कि अगर देश के सारे राज्य और शहर ऐसे ही हो जाये तो भारत दुनिया के श्रेष्ट देशों से भी आगे होगा. क्योंकि अमेरिका हो या रूस जुर्म के मामले में कोई पीछे नहीं है.

हम यहां जिक्र कर रहे हैं राजस्थान के जैसलमेर की. जैसलमेर एक ऐसा जिला है जहाँ साल भर में होने वाले जुर्म की संख्या ना के बराबर है. यहाँ 23 साल में केवल 55 मुक़दमे दर्ज हुए हैं. अगर थाने के रिकार्ड्स की माने तो यहाँ होने वाली जुर्म की संख्या इतनी कम है कि कई बार तो साल में एक भी मुकदमा दर्ज नहीं होता है .

यह थाना जैसलमेर में पकिस्तान के सीमा से सटे शाहगढ़ में पड़ता है. इस थाने को 23 साल तक तो केवल हेड कांस्टेबल ही संभालता था. लेकिन अब यहाँ एक थानेदार नियुक्त किया गया है. बीते 23 वर्षों में यहाँ दर्ज हुए मुकदमों के आंकड़े हैरान करने वाले हैं. सबसे अच्छी बात यह है कि दर्ज मुकदमों में एक भी मुकदमा रेप का नहीं है. देश में शायद ही ऐसा कोई थाना होगा जहाँ रपे का मामला दर्ज ना हुआ हो.

जानकारों की माने तो इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि ये थाना सुदूर मरुअस्थल में पड़ता है. यहाँ दूर-दूर तक कोई आदमी भी बहुत मुश्किल से नजर आता है. पुलिस कर्मियों ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि जब वे गश्त पर निकलते हैं तो उस दौरान  भी उन्हें इक्का-दुक्का लोग ही नजर आते हैं. इसमें कोई दो मत नहीं है कि इस थाने में जिस भी पुलिस कर्मी का ट्रान्सफर होता होगा. उसके लिए ये किसी सजा से कम नहीं होगी.

पुलिस सूत्रों के अनुसार यह थाना सीमा पार से तस्करी रोकने के लिए शाहगढ़ इलाके में साल 1993 में खोला गया था. थाना बनाने के बाद पूरे इलाके में तार बंदी कराई गई. जिसके बात तस्करी पर लगाम लगी थी. सीमावर्ती क्षेत्र के इस थाने पर 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का जिम्मा है. इस थाने के अन्तर्गत दो पंचायतों की 10 हजार की आबादी आती है.

पुलिसकर्मी बताते हैं कि साल 2016 से अब तक वहां कोई भी मुकदमा दर्ज नहीं हुवा है 2015 में वहां केवल एक मुकदमा दर्ज किया गया था. जो कि एक सड़क दुर्घटना का था. साल 2014 में तीन मामले दर्ज हुए. जिनमे एक मारपीट का, दूसरा चोरी का और तीसरा सड़क दुर्घटना का था. राज्य के क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक कपिल गर्ग ने बताया कि थाने में बिजली सौर ऊर्जा से मिलती है और पानी बाहर से लाया जाता है.

उन्होंने बताया कि एक बात वहां के थानेदार को परेशानी पे डालती है और वो ये है कि कभी साल भर मुकदमा दर्ज न हो लेकिन अंत में अगर एक मुकदमा दर्ज हो जाए और उसका निस्तारण न हो तो भी वर्ष के अंत में पेंडेंसी का प्रतिशत 100 आता है.

डीएसपी नरेन्द्र कुमार दवे ने थाने में 23 साल बाद नियुक्ति होने पर कहा कि, ‘एएसआई स्तर का अधिकारी थाने का प्रभारी रहा है. थाने में दर्ज होने वाले मामले, इन्स्पेक्टर स्तर के अधिकारी की उपलब्धता और कार्य सम्पादन के आधार पर इन्स्पेक्टर की नियुक्ति की जाती है.’