ताजमहलः 350वीं वर्षगाँठ पर लघु निबंध (Hindi essay on 350th Anniversary of Tajmahal)

ताजमहल हमारी सुन्दरतम धरोहर-विश्व के महान आश्चर्यों में एक अपने सम्पूर्ण सौन्दर्य के साथ हमारी धरती का श्रृंगार करता है। ताजमहल- नाम से ही अपना गुण बखान करता है। इसे ताजों का महल कहें या महलों का ताज-दोनों ही सटीक बैठता है इसके लिए। यूँ तो इसका निर्माण सिर्फ अपनी पत्नी के प्रति प्रेम प्रदर्शन के प्रतीक के रूप में करवाया गया था परन्तु यह सौन्दर्य और आश्चर्य का पर्याय बन गया। यह किसी परिचय का मोहताज नहीं।

ताजमहल का निर्माध आगरा में यमुना नदी के तट पर अपनी पत्नी की कब्र पर 1634 ई. में तत्कालीन मुगल सम्राट शाहजहाँ द्वारा करवाया गया था। कहा जाता है कि इसके निर्माण में लगभग बाईस वर्ष लगे। लगभग 20 हजार कारीगरों ने इसके निर्माण में अपना योगदान दिया तथा लगभग तीन करोड़ रूपये का खर्च लगा था।

 

इसका निर्माण सफेद संगमरमर पत्थरों से कराया गया। ये पत्थर नागौर के मकराने से मंगवाया गया। इसमें जो लाल पत्थर लगे हैं, वे धौलपुर और फतेहपुर सीकरी से मंगाए गए थे। पीले तथा काले पत्थर नरबाद तथा चारकोह से लाए गए थे। इसके अलावा जो कीमती पत्थर और सोने चाँदी इसमें लगे, वे दूर देशों के सम्राटों से प्राप्त किए गए थे।

ताजमहल का सौन्दर्य चाँदनी रात में सबसे अधिक निखरता है। पूर्णिमा की रात को चाँद की किरणों के साथ इसकी चमक की कोई मिसाल नहीं। ताजमहल के मुख्य भवन के बाहर बहुत ऊँचा और सुन्दर दरवाजा है, जिसे बुलन्द दरवाजा कहते हैं। यह सुन्दर लाल पत्थरों से बना है। सम्पूर्ण ताजमहल की शिल्पकला और पच्चीकारी आज भी समझ से परे हैं। इसमें प्रवेश करने के लिए दरवाजों से गुजरना पड़ता है जिन पर कुरान शरीफ की आयतें लिखी हैं। इसके आगे भव्य उद्यान के बीचों बीच ताज के मुख्य द्वार हें। मध्य में एक सुन्दर झील है। इसकी बनावट अत्यन्त मनोहारी है।

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शरद् पूर्णिमा की रात ताजमहल के लिए सबसे सुहानी रात होती है। इस दिन चाँदनी में नहाया ताज आश्चर्यजनक ढंग से अपना सौन्दर्य बिखेरता है। पच्चीकारी में प्रयोग किए गए पत्थरों के रंग अचानक बदल जाते हैं। लाल और हरे रंग के पत्थरों की आभा हीरों सी चमक लिए दिखाई पड़ती है।

ताजमहल का निर्माण चाहे जिस कारण से भी हुआ हो, जैसे भी हुआ हो, एक बात तो स्पष्ट है कि शाहजहाँ ने अपनी कल्पनाओं से भी ज्यादा अपनी भावनओं को मूर्त रूप दिया। इसके शिल्पकारों ने भी अपने सम्पूर्ण कौशल का परिचय दिया। कहा जाता है कि उन शिल्पकारों के हाथ काट लिए गए थे तांकि वे इस जैसा दूसरा ताज न खड़ा कर सकें।

वर्ष 2004 में ताज ने 350 वर्ष पूरे किए। उत्तर प्रदेश सरकार ने ताज की शान में एक वर्ष समर्पित किया। पूरे साल सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहा। इस वर्षगाँठ को ताज महोत्सव के नाम से मनाया गया और इसका उद्घाटन 27 सितम्बर 2004 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा किया गया। एक वर्ष तक इसके चलते रहने की घोषणा की गई।

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ताज के रात्रिकालीन दर्शन पर से प्रतिबन्ध हटा लिया गया है। ताज को विश्व के सात आश्चर्यों की श्रेणी में स्थान दिलाने के लिए एक मुहिम सी चल पड़ी है। सभी लोग अपने अपने मत दे रहे हैं।

ताज की सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि यह हमारा सर्वाधिक गौरवशाली अध्याय है। संपूर्ण विश्वभर से लोग इसे देखने आते हैं। निस्सन्देह ताज सौन्दर्य प्रेम और आश्चर्य का अनूठा प्रतीक है।

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