Grihaan ke samay bhojan kyon nahin karna chahiye?

हिन्दू धर्म के अनुसार ग्रहण के दौरान भोजन करना निषिद्ध माना गया है। यह परंपरा हमारे यहाँ आज से ही नहीं ऋषि मुनियों के समय से ही चली आ रही है। हमारे धर्म शास्त्रों में सूर्य ग्रहण लगने के समय भोजन के लिए मना किया है, क्योंकि मान्यता थी कि ग्रहण लगने के समय कीटाणु फैल जाते हैं।

Grihaan ke samay bhojan kyon nahin karna chahiyeखाद्य वस्तु, जल आदि में सूक्ष्म जीवाणु एकत्रित होकर उसे दूषित कर देते हैं। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण है कि ग्रहण के समय मनुष्य के पेट की पाचन-शक्ति कमजोर हो जाती है, जिसके कारण इस सयम किया गया भेाजन अपच, अजीर्ण आदि शिकायतें पैदा कर शारीरिक या मानसिक हानि पहुंचा सकता है। इसीलिए हिन्दू धर्म में ऐसी मान्यता है कि चंद्र ग्रहण लगने से दस घंटे पूर्व से ही इसका कुप्रभाव शुरू हो जाता है।

मान्‍यता के अनुसार राहू चन्‍द्रमा को तथा केतू सूर्य को ग्रसता है। ये दोनों छाया की संतान है । चन्‍द्रमा और सूर्य की छाया के साथ साथ चलते हैं । चन्‍द्रग्रहण के समय कफ की प्रधानता बढ़ती है, और मन की शक्ति क्षीण होती है । जबकि सूर्य ग्रहण के समय जठराग्नि नेत्र तथा पित्‍त की शक्ति कमजोर पड़ती है

सूतक काल –

भारतीय धर्म विज्ञानवेत्ताओं का मानना है कि सूर्य-चंद्र ग्रहण लगने से १२ घंटे पूर्व से ही इसका कुप्रभाव शुरू हो जाता है.अंतरिक्षीय प्रदूषण के समय को सूतक काल कहा गया है। इसलिए “सूतक काल” और ग्रहण के समय में भोजन तथा पेय पदार्थों के सेवन की मनाही की गई है. बूढ़े, बालक और रोगी एक प्रहर पूर्व खा सकते हैं.

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स्कंद पुराण’ के अनुसार ग्रहण के अवसर पर दूसरे का अन्न खाने से बारह वर्षो का एकत्र किया हुआ सब पुण्य नष्ट हो जाता है. देवी भागवत में आता हैः सूर्यग्रहण या चन्द्रग्रहण के समय भोजन करने वाला मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है, उतने वर्षों तक अरुतुन्द नामक नरक में वास करता है.

ग्रहण का भोजन पर प्रभाव:

पका हुआ भोजन ग्रहण से पहले जैसा होता है, उसमें एक स्पष्ट बदलाव आता है। जो पहले पौष्टिक भोजन होता है, वह जहर में बदल जाता है। जहर एक ऐसी चीज है जो आपकी जागरूकता को नष्ट कर देता है। अगर वह आपकी जागरूकता को छोटे स्तर पर नष्ट करता है, तो आप सुस्त हो जाते हैं। अगर वह एक खास गहराई तक आपकी जागरूकता नष्ट कर देता है, तो आप नींद में चले जाते हैं। अगर कोई चीज आपकी जागरूकता को पूरी तरह नष्ट कर देता है, तो आपकी मृत्यु हो जाती है। सुस्ती, नींद, मृत्यु – यह बस क्रमिक बढ़ोत्तरी है। इसलिए पका हुआ भोजन किसी सामान्य दिन के मुकाबले कहीं अधिक तेजी से एक सूक्ष्म रूप में सड़न के चरणों से गुजरता है।