Ganga ka vahan magarmachcha

देवी गंगा का वाहन मगरमच्छ है। सिंधु, गंगा, नर्मदा, ब्रह्मपुत्र, कावेरी आदि नदियों में जल में विचरण करने वाला प्रमुख प्राणी मगरमच्छ ही है। वैज्ञानिक कहते हैं कि मगरमच्छ हर परिस्थिति में जी लेते हैं। धरती पर इनका अस्तित्व लगभग 25 करोड़ साल से विद्यमान है।
Ganga ka vahan magarmachchaजल में इनकी मगरमच्छ की अनुपस्थिति से पारिस्थितिक तंत्र बिगड़ सकता है। वर्तनाम में बिजली उत्पादन के नाम पर गंगा और नर्मदा नदी की हत्या कर दी गई है। उसकी हत्या करने के चलते जल के राजा मगरमच्छ सहित कई प्राणियों का अस्तित्व संकट में है और कई तो अपना अस्तित्व खो बैठे हैं। गंगा नदी की दुर्लभ डॉल्फिन भी अपने अस्तित्व के संकट से जुझ रही है।
धर्म ग्रंथों में माता गंगा का वाहन मगरमच्छ बताया गया है। इससे अभिप्राय है कि हमें जल में रहने वाले हर प्राणी की रक्षा करनी चाहिए। अपने निजी स्वार्थ के लिए इनका शिकार करना उचित नहीं है, क्योंकि जल में रहने वाला हर प्राणी पारिस्थितिक तंत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इनकी अनुपस्थिति में पारिस्थितिक तंत्र बिगड़ सकता है।
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कुछ लोगों ने मान्यता बना रखी है कि छोटे बच्चों, कुंआरी लड़कियों व किसी खास बीमारी से पीडि़त लोगों की मृत्यु के बाद उन्हें गंगा या अन्य नदी में बहा देना चाहिए। धार्मिक ग्रंथों में ऐसा नहीं लिखा है। कई मान्यताओं ने बाद में परम्परा का रूप ले लिया। नदी में शव बहाना भी एक ऐसी ही मान्यता है। पहले नदियों में जलीय जीव प्रचुर मात्रा में होते थे। खासकर गंगा में मगरमच्छ काफी तादात में थे। इसलिए ही गंगा का वाहन भी मगरमच्छ को माना गया है। लोग शवों(ज्यादातर जानवरों के) को गंगा में डालते थे तो ये मगरमच्छ उन्हें खा लेते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। नदियों में जलीय जीव प्रदूषण के चलते कम हुए। गंगा में अब मगरमच्छ भी नहीं मिलते हैं। जिसके चलते ही नदी में डाले जाने वाले शव प्रदूषण को और बढ़ा देते हैं।