प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ८ नवम्बर से 500 और 1000 के नोटों का चलन अवैध घोषित करने बाद से अनेकों अफवाहें फ़ैल रही हैं. सरकार की 500 और 1000 के नोट वापस लेने की मंशा काला धन रोकना और नकली करेंसी को फाइनेंशियल सिस्टम से बाहर निकलना है ताकि अर्थव्यवस्था को हो रहे नुक्सान को रोका जा सके. किन्तु अफवाहों (demonetisation myths) के चलते आम नागरिक घबरा कर एटीएम और बैंकों के सामने लंबी कतारों में जा खड़े हुए हैं. ऐसे में हिन्दीवार्ता का कर्त्तव्य बनता है कि आपको इन अफवाहों की सच्चाई बताये ताकि देश के ईमानदार नागरिक बिना घबराये विमुद्रीकरण की इस प्रक्रिया के दौरान अपना काम आसानी से करते रहें.

demonetisation myths afvah sachchai 2000 note nano chipअब वित्त मंत्रालय ने इन अफवाहों पर अपना स्पष्टीकरण दे दिया है. आइये बताते हैं कि किन 6 अफवाहों (demonetisation myths) पर आपको नहीं देना है ध्यान :

  1. अफवाह: प्रधान मंत्री जल्दी ही 50 और 100 के नोटों को भी रद्द करने वाले हैं.

सच्चाई: यह एक कोरी अफवाह है. ऐसा कोई भी प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन नहीं है.

2. अफवाह: सरकार का अगला कदम बैंक लॉकरों को सील करना है जिससे लोगों की व्यक्तिगत ज्वैलरी जब्त की जा सके.

सच्चाई: ऐसा कोई कदम सरकार उठाने नहीं जा रही है.

3. अफवाह: कुछ राजनीतिक पार्टियों और कुछ बड़े कॉपोरेट बिज़नस घरानों को विमुद्रीकरण की पहले से ही जानकारी थी.

सच्चाई: विमुद्रीकरण की सारी कार्यवाही बहुत ही गोपनीय तरीके से की गई थी और सरकार ने इस की जानकारी किसी को भी लीक नहीं की.

4. अफवाह: विमुद्रीकरण करने की सरकारी लगत इससे होने वाले लाभ से बहुत ज्यादा होगी.

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सच्चाई: सच यह है कि काले धन की समानान्तर अर्थवव्यवस्था देश को खोखला करती है और विमुद्रीकरण से देश और गरीब देश वासियों को लाभ मिलेगा.

5. अफवाह: नए 2000 के नोटों में नैनो चिप लगी है जिसमें जीपीएस है जिससे ब्लैक मनी को ढूंढ जा सकेगा.

सच्चाई: ऐसी कोई चिप नहीं है ना ही विश्व में ऐसी कोई तकनीक मौजूद है जिससे करेंसी नोटों में ट्रैकिंग करने के लिए चिप लगाई जा सके.

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6. अफवाह: नए 2000 के नोट बहुत ही घटिया क्वालिटी के हैं और इनमें से रंग छूटता है.

सच्चाई: इन नोटों में एक सुरक्षा व्यवस्था है जिसे “इंटेग्लिओ प्रिंटिंग” कहते हैं.  इन्हें कपडे से रगड़ने पर टर्बो-इलेक्ट्रिक प्रभाव के चलते नोट का रंग कपडे पर आ जाता है.