मथुरा: जैसे जैसे यूपी चुनाव नजदीक आ रहे हैं, उत्तर प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ती जा रही हैं. जहां मायावती भाजपा पर तंज कसने का कोई मौका नहीं छोड़ रही हैं वहीँ अब भाजपा भी इसी राजनीतिक बयानबाज़ी के हमलों से लैस अपने पद्दाधिकारियों को मैदान में उतार रही है. ताजा उदाहरण आज मथुरा में उत्तर प्रदेश भाजपा महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष स्वाति सिंह का है जिन्होंने आज कहा कि मायावती में हिम्मत है तो वे  उनके खिलाफ चुनाव लड़ कर दिखाएँ.
मथुरा दौरे के दौरान स्वाति सिंह ने एक टीवी चैनल से वार्ता करते हुए मायावती को चैलेंज किया कि अगर मायावती में हिम्मत है तो वे अपने बिल से बाहर निकलें और चुनाव में उनका (स्वाति सिंह का) सामना करें. उन्होंने मायावती पर आरोप लगाया कि वे एक ऐसी महिला है जो नोटों बिछे बिस्तर पर सोती हैं. अब विमुद्रीकरण (demonetization) के बाद उन्हें अपनी काली कमाई के बर्बाद हो जाने का डर सता रहा है. यही कारण हैं कि 500 और 1000 के नोट बंद होने बाद से मायावती प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी और भाजपा के खिलाफ जहर उगल रही हैं.

dayashankar singh wife swati singh challenges mayavati for electionमायावती के खिलाफ अभद्र टिप्पणी के कारण भाजपा से निष्काषित नेता दया शंकर सिंह की पत्नी स्वाति सिंह ने कहा कि मायावती अपनी पार्टी के टिकेट पैसे लेकर बेचती हैं. उन्होंने कहा कि इसी कारण मायावती ने सबसे एपहले बीएसपी के चुनाव प्रत्याशियों की लिस्ट सबसे पहले जारी कर दी थी क्योंकि वे हर प्रत्याशी से करोड़ों रुपये ले चुकी हैं. अब वे परेशान हैं. अगर उन्हें पता होता कि विमुद्रीकरण होने वाला है तो प्रत्याशियों की घोषणा नोट बंदी के बाद करती. उन्होंने कहा कि जिस बाबा साहब के मिशन और कांशीराम के विचारों पर बीएसपी बनी, उसे मायावती बेच रही हैं. मायावती तक वही पहुंच सकता है, जिसके पास पैसा हो.

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नोटबंदी पर बोलते हुए स्वाति सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का सपना है कि समाज का हर तबका बराबर का हो, सभी का विकास हो. आज नोटबंदी के कारण परेशानी जरूर है, लेकिन कल इसका फायदा होगा. नोटबंदी से भ्रष्टाचारी परेशान हैं. कांग्रेस ने जनता को बरगलाकर सरकार पर दबाव बनाने के लिए भारत बंद का ऐलान किया है, लेकिन जनता प्रधानमंत्री के साथ है. उन्होंने प्रदेश में परिवर्तन के लिए महिलाओं का सहयोग मांगा.

बीजेपी महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष स्वाति सिंह ने एसपी, बीएसपी पर कई तीखे हमले किए. उन्होंने कहा, “जब प्रदेश में साढ़े चार मुख्यमंत्री की बात होती थी तो मुझे दुख होता था. लेकिन परिवार के झगड़े ने इस बात की पुष्टि कर दी कि सरकार में कई कई मुख्यमंत्री हैं. अखिलेश यादव ने साफ कर दिया कि किसके कहने पर किस मंत्री को हटाया और किसके इशारे पर वापस लिया.”

उन्होंने कहा कि प्रदेश की राजनीति में अखिलेश बेबस हैं. इस परिवार में जनता के मान सम्मान की लड़ाई नहीं बल्कि धन की लूट है. सूबे की सरकार गुंडागर्दी की है. बुलंदशहर में मां-बेटी के साथ हुई बर्बरता का न्याय उन्हें आज तक नहीं मिला. कानपुर के पुखरायां में हुए रेल हादसे के पीड़ितों का हाल जानने भी मुख्यमंत्री नहीं गए.