चाँद ख़ुदकुशी करने निकला है

चाँद खुदकुशी

आज मैं कोई कविता नहीं लिखूंगा
कोई कहानी नहीं सुनाऊंगा
बस बैठ कर
इन्तेजार करुंगा

चाँद खुदकुशी

तुम्हें पता ना हो
शायद
कि सायों की भी रूह होती है
जो धूप में पिघल जाती है
और अंधेरों से डरती है
जब साये लंबे होते हैं
तो वो अक्सर बातें करती हैं
मैं आज डूबते सूरज की रोशनी से
एक रूह को बाँध लूँगा
मुझे देखना है
कि अंधेरे में
क्या साये भी किरदार बदलते हैं?

आज मैं कोई कविता नहीं लिखूंगा
कोई कहानी नहीं सुनाऊंगा
बस बैठ कर
इन्तेजार करूंगा

मुझे सितारों से कोई गिला नहीं
राहू से मेरी दोस्ती है
अकसर वो किस्मत की तंग गली में
मुझे मिल ही जाता है
कई बार साथ बैठ कर हमने
सिगरेट सुलगाई है
और रातें शाद की हैं
जब वो नाचता है तो गजब की ताल होती है
आज मुझे उसके घुँघरूओं का हिसाब करना है
वो कहता है
जब ये आवाज करते हैं
तो मैं सो नहीं सकता

आज मैं कोई कविता नहीं लिखूंगा
कोई कहानी नहीं सुनाऊँगा
बस बैठ कर
इन्तेजार करूंगा

कहते हैं आज रात भारी है
चाँद ख़ुदकुशी करने निकला है
वो मायूस है कि उसके चेहरे के दागों ने
आईने को भी बदशकल बना डाला
मैं उस से बात करूंगा
शायद वो ये समझ पाए
कि आईने बाजारों में बिकते हैं
कीमत अदा जो करे
उनका वही हबीब है

आज मैं कोई कविता नहीं लिखूंगा
कोई कहानी नहीं सुनाऊँगा
बस
इन्तेजार
करूंगा

~ स्कंद नयाल खान

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