नेपाल के और करीब आया चीन – बाढ़ पीड़ितों को दी 10 लाख डालर की मदद

भारत-नेपाल के बदलते रिश्तों के बीच चीन ने नेपाल से नजदीकी बढ़ानी शुरू कर दी है. नेपाल आज 3 दशक में आयी सबसे भयानक बाढ़ से जूझ रहा है इस बाढ़ से अबतक 115 लोग मारे जा चुके हैं. और ऐसे में चीन ने नेपाल से रिश्ते मजबूत करने के लिए अपनी चाल चल दी है. चीन ने नेपाल के बाढ़ पीड़ितों के लिए 10 लाख डालर यानि 6.4 करोड़ रूपए दिए हैं जिससे बाढ़ पीड़ितों को तत्काल राहत पहुचायी जा सके.

आपसी रिश्ते मजबूत करने के लिए चीन ने नेपाल के साथ पेट्रोलियम गैस और खदान से सम्बंधित समझौते भी हुए. आरनिको राजमार्ग के पुनर्निमाण और केरूंग-रासुवागार्ही रोड के निर्माण के लिए 15 अरब डॉलर की परियोजना पर समझौता किया है।

चीन और नेपाल ने भविष्य में आपसी व्यापार को बढ़ाने पर भी सहमति दी. चीन के उप-राष्ट्रपति वांग ने नेपाल के पूर्व शाही महल के निर्माण का उद्घाटन किया। शाही महल भी भूकंप में क्षतिग्रस्त हो गया था। भूकंप के दो साल बाद चीन ने इस शाही महल की मरम्मत के लिए आर्थिक मदद दी थी। वांग ने नेपाले के पूर्व प्रधानमंत्रियों केपी ओली और पुष्प कमल दहल “प्रचंड” से भी मुलाकात की।

जब मोदी लाल किले से भाषण दे रहे थे तब चीनी सैनिक भारत में घुसपैठ कर रहे थे

भारत के प्रधानमन्त्री जब 15 अगस्त को लाल किले से भाषण दे रहे थे तब लद्दाख के पानगोंग झील के किनारे चीनी सैनिक भारत में घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे थे जिसपर भारतीय सैनिकों से उनकी हाथापाई हुई. खबर है कि चीनी सेना ने भारतीय सैनिकों के ऊपर पत्थर भी फेंके.

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पानगोंग झील के किनारे की घटना 135 किलोमीटर झील के फिंगर-6 के करीब सुबह 7.30 बजे हुई। इस झील का एक-तिहाई हिस्सा भारत के नियंत्रण में है, बाकी चीन के। भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच मारपीट और झड़प हुई लेकिन गोली नहीं चली। सूत्रों के अनुसार झील के चीनी हिस्से के किनारे बनी सड़क पर 52 ट्रक खड़े देखे गए। हालांकि शाम तक वो ट्रक वहां से चले गए। हालाँकि भारतीय सेना ने इस घटना पर किसी तरह का कमेंट करने से इनकार किया।

भारत और चीन के बीच टेंशन इस कदर बढ़ गयी है कि चीनी सेना ने कल भारतीय स्वतंत्रता दिवस में शामिल होने से इंकार कर दिया. हर साल चीनी सेना पीएलए के स्थापना दिवस एक अगस्त को होने वाली वार्षिक बैठक भी इस साल नहीं हुई। साल 2005 के बाद यह पहली बार हुआ है कि दोनों देशों की सालाना बैठक नहीं हुई हो.

भारतीय सेना के सूत्र ने बताया कि परंपरा के अनुरूप भारतीय सेना ने इस बार भी चीनी सेना को आमंत्रित किया था लेकिन चीनियों की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। चीनी डोकलाम के करीब नाथू ला समेत अन्य चार बैठक स्थलों पर होने वाली वार्षिक बैठक में नहीं शामिल हुए।

स्‍व‍िटजरलैंड की पार्टी ने कहा- भ्रष्ट देश है भारत, कालधन का डाटा नहीं दे सकते

एक सवाल के जवाब में स्‍व‍िटजरलैंड की एसवीपी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एल्बर्ट रोस्टी ने कहा कि हम नहीं चाहते कि भ्रष्ट और अधिनायकवादी देशों को बैंकों का डाटा दिया जाए।
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स्विट्जरलैंड और भारत के बीच साल 2016 में एक करार हुआ था जिसके तहत दोनों देश टैक्स चोरी रोकने के लिए एक दूसरे के बैंक खातों की जानकारी साझा करेंगे। माना जाता है कि भारत के अधिकांश भ्रष्ट लोगों का पैसा स्विस बैंकों में जमा है. जिसपर बार बार यह मांग उठती रही है कि इन खाताधारकों की जानकारी शेयर की जाये ताकि सरकार इसपर एक्शन ले. वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी काला धन वालों पर सख्त कदम उठाने का वादा किया था. परन्तु स्विट्ज़रलैंड सरकार अगर यह कदम उठाती तो काले धन पर सरकार को बड़ी नाकामी हाथ लगेगी.

अत्याधिक भ्रष्ट और तानाशाही वाला देश है भारत

रिपोर्ट के अनुसार स्विस अखबार टैजेस-एंजीयर ने भारत समेत इन सभी देशों को “बहुत ज्यादा भ्रष्ट या फिर अर्ध-तानाशाही वाले देश” बताया है। रिपोर्ट के अनुसार एसवीपी ने दावा किया है कि स्विस संसद में भी उसे कई अन्य दलों का इस मुद्दे पर समर्थन प्राप्त है।

जानकारों का मानना है कि पनामा लीक के बाद भारत द्वारा दोषियों पर कोई कदम न उठा पाना भी एक बड़ी वजह मानी जा रही है. लोगों को अंदेशा है कि काले धन पर दी गयी सूचना का प्रयोग दोषियों को सजा देने के बजाये ग्राहकों को धमकाने तथा अवैध वसूली करने में करेंगे.

एसवीपी ने पिछले हफ्ते एक लिस्ट जारी की है जिसमें भारत, अर्जेंटिना, ब्राजील, चीन, रूस, सऊदी अरब, इंडोनेशिया, कोलंबिया, मेक्सिको, दक्षिण अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात को “भ्रष्ट देश” बताया गया है।

टैंक हुए खराब, अंतर्राष्ट्रीय सैन्य प्रतियोगिता से भारत बाहर

रूस निर्मित T90 टैंकों में आयी खराबी ने भारत को अंतर्राष्ट्रीय सैन्य प्रतियोगिता से बाहर कर दिया. रूस की राजधानी मास्को में अंतर्राष्ट्रीय टैंक बैथलॉन 2017 का आयोजन किया जा रहा है इस प्रतियोगिता में हर देश अपने दो टैंक ले कर शामिल होता है जबकि भारत के दोनों ही टैंक खराब हो गए. भारतीय सेना ने देसी अर्जुन टैंक की जगह रूस में निर्मित T90 टैंकों को प्राथमिकता दी थी.

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एक अधिकारी ने कहा, ‘पहले टैंक की फैन बेल्ट टूट गई। इसके बाद रिजर्व टैंक को रेस में भेजा गया लेकिन सिर्फ दो किलोमीटर की दौड़ के बाद ही इसका पूरा इंजन ऑइल लीक हो गया। यह टैंक रेस पूरी ही नहीं कर पाया। बदकिस्मती से भारतीय टीम डिस्क्वॉलिफाइ हो गई।’

ये देश पहुंचे सेमीफइनल में

चीन इस प्रतियोगिता में टाइप-96बी टैंकों से साथ उतरा है। इस टैंक में दौड़ते समय भी दुश्मन के टैंक पर मशीन गनों से फायर करने और अन्य कई खूबियां हैं। वहीं रूस और कजाखस्तान टी-72बी3 टैंकों के साथ इस प्रतियोगिता में उतरे। वहीं बेलारूस के पास टी-72 टैंकों का आधुनिक रूप है। ये चारों देश अब फाइनल में भिड़ेंगे।

डीआरडीओ इस बात को लेकर नाराज है कि सेना ने अभी तक अर्जुन मार्कII का ऑर्डर नहीं दिया है। डीआरडीओ का कहना है कि मार्कII ने 2010 में हुए प्रतिस्पर्धी ट्रायल में टी-90एस टैंकों से बेहतर प्रदर्शन किया था।

हिन्दू राष्ट्रवाद को चीन ने बताया तनाव का कारण


बिजिंग. हाल ही में चीनी मीडिया ने भारत को सीमा विवाद पर हर तरह के टकराव के लिए सतर्क रहने की चेतावनी दी है .अब चीनी मीडिया ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स में कहा है की चीन के साथ बढ रहे विवाद का कारण भारत में बढ रहा हिंदू राष्ट्रवाद बताया गया है. ग्लोबल टाइम्स के एक लेख में कहा गया है कि भारत में बढ रहा हिंदू राष्ट्रवाद चीन के साथ युद्ध का कारण बन रहा है. साथ ही लेख में लिखा गया है कि वर्ष 2014 में नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत में हिंदू राष्ट्रवाद की भावनाओं में बढोतरी हुई है.
साथ ही लेख में लिखा है कि भारत में वर्ष 2014 के बाद मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा बढी है. भारत को सलाह देते हुए कहा गया है कि देश में बढ रहे हिंदू राष्ट्रवाद के प्रति भारत को सजग रहना चाहिए और इसे देशों के बीच में विवाद का कारण नहीं बनने देना चाहिए. अख़बार में यह भी लिखा गया है कि नरेन्द्र मोदी ने सत्ता में आने के लिए इस हिंदू राष्ट्रवाद का फायदा उठाया है और अख़बार में कहा गया है कि बॉर्डर पर चीन और भारत के बीच बढ रहे तनाव का कारण हिंदू राष्ट्रवाद ही है क्यों की राष्ट्रवादी ताकतें चीन के खिलाफ बदला चाहती हैं.

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट- मोदीराज में धीमी हो गयी है भारत की अर्थव्यवस्था,नौकरियां गायब

अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपने सम्पादकीय में नरेंद्र मोदी और उनकी भाजपा सरकार पर कड़ा कटाक्ष किया है. इस लेख में मोदी सरकार के कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किये गए हैं तथा भारत की बिगड़ती हालत की ओर भी ध्यान दिलाया गया है.

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अखबार ने लिखा है कि नरेंद्र मोदी 2014 में बड़े बड़े वादे कर के सत्ता में आये परन्तु भारत कि अर्थव्यवस्था को वो गति देने में नाकाम रहे. भहारतीय अर्थव्यवस्था 2014 के मुकाबले सुस्त पड़ती दिखाई दे रही है.भारतीयों को सुनहरे भविष्य के सपने दिखने वाले मोदी अबतक रोजगार पैदा करने में भी ज्यादा सफल नहीं हो पाए हैं.

अखबार के मुताबिक नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ग्रोथ काफी धीमी रही और नौकरियों को लेकर ध्यान नहीं दिया गया। उनके राज में असहिष्णुता फैलाई गई, जो धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के लिए खतरा है। जब से मोदी ने कार्यभार संभाल, तब से गौमांस के सेवन करने का आरोप लगाकर लोगों का मारा गया, जिनमें से अधिकतर मुस्लिम हैं।

आपको बता दें कि पिछले महीने इसी अखबार ने योगी आदित्यनाथ पर सवाल उठाते हुए उनके संगठन युवा वाहिनी को आतंकी संगठन कह डाला था.पिछले सप्ताह छापे सम्पादकीय में योगी आदित्यनाथ पर सवाल उठाते हुए अखबार ने लिखा था कि योगी ने मुस्लिमों पर हमला करने के लिए इस संगठन का निर्माण किया है.

 

चीन ने भारत पर दागे राकेट, 158 भारतीय जवान शहीद. पर क्या है सच्चाई?

खबरों पर ध्यान दें तो पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार चीन ने सिक्किम में भारतीय सैनिकों के एक पोस्ट पर राकेट से हमला किया है जिसमे 158 भारतीय सैनिकों की मौत हो गयी है. यह खबर ट्विटर और फेसबुक पर वायरल हो रही है परन्तु सच्चाई क्या है यह जाने बिना इस खबर को शेयर करना गलत हो सकता है. भारतीय अधिकारियों ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा है कि ऐसी कोई खबर नहीं है और चीन के आक्रमण की खबर बिलकुल झूठ है.

पाकिस्तानी चैनल की करतूत

दरअसल इस पूरी बकवास की शुरुआत पाकिस्तान के एक चैनल ने की जब दुनिया न्यूज़ नाम के इस चैनल ने वीडियो के माध्यम से यह खबर दी कि चीन ने भारत पर आक्रमण कर दिया है. इतना ही नहीं बल्कि राकेट से हुए हमलों में 158 भारतीय जवान शहीद भी हो गए हैं.

पाकिस्तान के डिफेंस एनालिस्ट फहद मल्लिक ने अपने ट्विटर हैंडल से इस खबर को और हवा दे दी. उन्होंने बिना किसी वेरिफिकेशन के इस खबर को अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर दिया.
china attacks india
बस फिर क्या था, खबर आग की तरह फ़ैल गयी. लोगों को जबतक गलती का एहसास हुआ तबतक खबर इंटरनेट पर वायरल हो गयी थी.

हालाँकि चीन या भारत के किसी आधिकारिक मीडिया एजेंसी ने न तो इस खबर की पुष्टि की है और न ही इस पर अबतक कोई बयान आया है.

बॉर्डर पर हालात हुए गंभीर, अरुणाचल में चीनी सैनिकों ने की 11 घंटे की ड्रिल

भारतीय सीमा के समीप चीनी सेना ने करीब 11 घंटे तक ड्रिल किया जिसमें उन्होंने दुश्मन के एयर क्राफ्ट मार गिराने तथा अन्य घातक ड्रिल किये. चीन की सरकारी मीडिया के हवाले से दी गई जानकारी के मुताबिक इस अभ्यास में चीनी सैनिकों ने अत्याधुनिक लाइट टैंक का इस्तेमाल किया.

china drill

मालूम हो की चीन भूटान से हो कर सड़क बना रहा है. यह सड़क डोकलांग नामक क्षेत्र से गुजरती है जिसपर चीन अपना अधिकार जमाता है. भारतीय सैनिकों ने चीन की सड़क निर्माण का कार्य रुकवाया जिसपर चीनी सैनिकों ने 2 भारतीय पोस्ट तबाह कर दिए. इसके बाद से ही दोनों देशों की राजनीती गर्म है.

चीन का कहना है कि भारत भूटान के मामले में बेवजह दखल दे रहा है जबकि भारत अपने सामरिक हितों की सुरक्षा के लिए इस मुद्दे पर अपना पक्ष रख रहा है. दोनों देशों की मीडिया ने एक दुसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाना शुरू कर दिया है.

अब ऐसे में चीनी सैनिकों का यह ड्रिल एक अच्छा संकेत नहीं है. हालाँकि भारत भी इस पूरे मुद्दे पर अपने पक्ष पर अडिग है.

माल्या के खिलाफ सबूत नहीं पेश कर पायी भारत सरकार, ब्रिटिश कोर्ट ने मारा ताना

लंदन की कोर्ट में जब भगोड़े विजय माल्या के केस की सुनवाई शुरू हुई तब कोर्ट ने भी इस मुद्दे पर ठन्डे भारतीय रुख पर मजे लिए. कोर्ट ने पूछा कि आखिर भारत सरकार विजय माल्या के खिलाफ सबूत क्यों नहीं पेश कर रही? कोर्ट ने सबूत पेश करने पर हो रही देरी का लाभ विजय माल्या को दिया.

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माल्या के भारत प्रत्यार्पण पर हो रही सुनवाई में कोर्ट ने भारत को झटका दिया है और अब सुनवाई की तारीख बढ़ा कर 4 दिसंबर कर दी है. मुख्य न्यायाधीश एमा Arbuthnot ने इस मामले में भारत की तरफ से सबूत पेशी में हो रही देरी को ले कर यह फैसला सुनाया और अब अगली तारीख 4 दिसंबर को दी है जब माल्या केस की सुनवाई 2 सप्ताह तक चलेगी बशर्ते भारत माल्या के खिलाफ सबूत पेश कर पाए.

भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील आरोन वाटकिंस ने कहा कि उन्हें बाकी के सबूतों के लिए 3 से 4 सप्ताह का समय चाहिए जिस पर जज ने ताना मारते हुए कहा “क्या भारतीय आमतौर पर इतनी ही तेजी दिखाते हैं? उन्होंने इस मामले पर 6 सप्ताह का समय लिया परन्तु फिर भी इस मुद्दे पर कोई ठोस सबूत नहीं पेश पर पाए”

जज ने 4 दिसंबर की अगली तारीख देते हुए कहा कि यदि भारत फिर भी कोई सबूत पेश नहीं कर पाता तो अगली तारीख अप्रैल 2018 में दी जा सकती है. उन्होंने कहा कि इंग्लैंड के भारत के साथ नजदीकी सम्बन्ध हैं परन्तु जो सबूत पेश किये गए हैं वो ठोस नहीं हैं और सबूतों के पेश करने में लगातार देरी हो रही है

इसके साथ ही विजय माल्या को 6 जुलाई की अगली सुनवाई तक बेल मिल गयी है. 6 जुलाई को अगली मैनेजमेंट हियरिंग है जिसमें माल्या को पेश न होने की आजादी दी गयी है. परन्तु दिसंबर में अब अगली पूर्ण सुनवाई होगी.

बेल मिलने के बाद माल्या ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि आप भारतीय चाहें तो मुझसे करोड़ों वापस पाने के सपने देख सकते हो परन्तु सच ये है कि मैं निर्दोष हूँ और भारत सरकार के पास मेरे खिलाफ कोई सबूत नहीं हैं. यह केस जनवरी से शुरू हुआ था और आज जून के महीने तक भी भारत सरकार मेरे खिलाफ कोई सबूत पेश नहीं कर पायी है.

नहीं बता सकते माल्या को वापस भारत लाने में कितना वक़्त लगेगा- VK सिंह

भाजपा के केंद्रीय मंत्री VK सिंह ने मंगलवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि प्रत्यार्पण बेहद मुश्किल प्रक्रिया है परन्तु विजय माल्या को वापस लाया जाएगा.
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हालाँकि उन्होंने यह बताने से इंकार कर दिया कि आखिर माल्या को कबतक भारत लाया जाएगा. उनके अनुसार इस प्रक्रिया में कितना समय लगेगा इसपर कुछ कह नहीं सकते.

विजय माल्या के भारत प्रत्यार्पण के लिए इंग्लैंड में मंगलवार से सुनवाई शुरू होगी. ED और CBI की एक टीम इस प्रक्रिया में लगी हुई है.

आपको बता दें कि विजय माल्या के ऊपर भारतीय बैंकों का कुल 9000 करोड़ से अधिक का बकाया है जिसे चुकाने के बजाय वो भारत छोड़ कर ब्रिट्रेन में बस गए हैं. सरकार पर माल्या के खिलाफ नरमी बरतने के आरोप लगातार लगते रहे हैं.