आपसी सहमति से उतार दिया गया मंदिर और मस्जिद का लाउडस्पीकर

जहां आए दिन देश में मंदिर और मस्जिद को ले कर सांप्रदायिक दंगे और झगडे देखने को मिलते हैं वही उत्तर प्रदेश के मोरादाबाद के इस गांव में हिन्दू और मुस्लिम समुदायों के बीच आपसी सौहार्द्य की एक अद्भुत मिसाल इस गांव में देखने को मिली
जहां लोगों ने आपसी सहमति से मंदिर तथा मस्जिद दोनों से लाउडस्पीकर उतार दिया ताकि दूसरों को परेशानी न हो.

लोगों ने न सिर्फ लाउड स्पीकर उतरा बल्कि यह फैसला भी लिया कि आने वाले समय में किसी भी धार्मिक कार्य में लाउड स्पीकर का प्रयोग नहीं किया जाएगा. ये फैसला दोनों समुदायों की सहमति से ख़ुशी ख़ुशी लिया गया.

गाँव वालों ने इस फैसले को बाकायदा लिखित तौर पर थाने में पेश किया है ताकि भविष्य में आपसी विवाद न हो और भाईचारा बना रहे.

गांव के हेमंत शर्मा ने मीडिया को बताया- मंदिर पर 2 लाउडस्पीकर लगे हुए थे जबकि मस्जिद पर 7 लगे थे. जिसको ले कर विवाद की शुरुआत हुई. हिन्दू समुदाय ने कहा कि मस्जिद पर भी 2 लाउडस्पीकर लगा लो और बाकि उतार दो, परन्तु बात नहीं बनी.

फिर मामले को गांव की पंचायत में ले जाया जहां पर यह फैसला लिया गया कि गांव में किसी भी धार्मिक आयोजन पर लाउडस्पीकर का प्रयोग नहीं होगा तथा मंदिर और मस्जिद दोनों से लाउड स्पीकर उतार दिए जाएंगे.

इस फैसले की सराहना प्रशासन ने भी की है तथा इससे आपसी भाईचारा बढ़ाने वाले फैसले के रूप में देखा जा रहा है.

सुषमा स्वराज ने सुनी इस पाकिस्तानी पिता की आवाज़, बच्चे के लिए जारी किया वीजा

हैदराबाद : केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज ने एक बार फिर से दिलों को जीतते हुए एक पाकिस्तानी पिता की गुहार सुनी है.

मामला कुछ ऐसा है कि एक पाकिस्तानी नवजात दिल में संकुचन की समस्या से जूझ रहा है और इस बच्चे का इलाज़ पाकिस्तान में संभव नहीं. भारत में सस्ते इलाज़ के लिए काफी लोग आते हैं. जिसपर इस पाकिस्तानी पिता ने भारतीय विदेश मंत्रालय को वीसा देने के लिए गुहार लगायी.

सुषमा को अपने ट्वीट में बच्चे के पिता केन सीड ने कहा “यह मेरा बेटा है और इसे नहीं पता कि भारत और पाकिस्तान के बीच क्या हो रहा है ”

सुषमा स्वराज ने इसपर त्वरित सुनवाई करते हुए बच्चे के लिए वीसा जारी कराया तथा कहा चाहे हालत जो भी हो बच्चे को नहीं भुगतना होगा. ढाई साल के इस नवजात का ऑपरेशन एवं इलाज़ अब भारत में किया जा सकेगा.

सुषमा स्वराज की इस दरियादिली के बाद ट्विटर पर इस पाकिस्तानी पिता ने उनकी तारीफ में कसीदे पढ़ने शुरू कर दिए.

जब हिन्दू- सिख भाइयों ने मिल कर मुसलमानों को दी तोहफे में मस्जिद

लुधियाना : रमजान के मौके पर आपसी सद्भाव और मेल जोल की मिसाल इस गांव में देखने को मिली जहाँ हिन्दू और सिखों ने मिल कर साथ रहने वाले मुसलमानों के लिए मस्जिद का निर्माण किया और तोहफे में दी.

hindu-muslim unity

लुधियाना के गालिब राण सिंह वाल गाँव के मुसलमानो को नमाज़ पढ़ने के लिए दुसरे गाँव जाना पड़ता था जिसको देख कर गांव के हिन्दुओं और सिखों ने मिल कर यह फैसला लिया कि गांव में ही मस्जिद का निर्माण होगा. गांव वालों के मुताबिक यह मस्जिद हमारी तरफ से मुस्लिम भाइयों के लिए ईद का तोहफा है.

मस्जिद का नाम हजरत अबू-बकर मस्जिद रखा गया है। वहीं खबर के मुताबिक इस मस्जिद को बनाने का फैसला 1998 में लिया गया था। इसके बाद मस्जिद बनाने के लिए जमीन एलॉट की गई थी। वहीं मस्जिद बनाने का काम बीते 2 मई से ही शुरू हो पाया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस गांव की आबादी काफी कम है। गांव की आबादी लगभग 1300 लोगों की है। इनमें से 700 सिख, 200 हिंदू और 150 लोग रहते हैं।

बता दें कि इससे पहले भी लोगों ने आपसी सद्भावना की जबरदस्त मिसाल पेश की थी जब बीते साल राजस्थान के सीकर जिले के लोगों ने जिले के कोलिडा गांव में मुस्लिम समुदाय द्वारा इस्तेमाल में बंद हो चुके एक कब्रिस्तान की जमीन, हिंदू समुदाय के लोगों को मंदिर का निर्माण के लिए दान कर दी गई थी।