5 अहम् बिंदु जो साबित करते हैं कि योगी सरकार ने डॉ. कफील को बलि का बकरा बना दिया

उत्तरप्रदेश के गोरखपुर में इंसेफेलाइटिस से अचानक हुई 66 से अधिक बच्चों की मौत ने देश भर को दहला दिया. पूरे देश से एक स्वर में दोषियों को पकड़ने की मांग हुई परन्तु योगी आदित्यनाथ की सरकार ने बच्चों को बचाने वाले डॉक्टर कफील अहमद खान पर ही एक्शन ले लिया. सोशल मीडिया पर तरह तरह के आरोपों का दौर शुरू हो गया.

परन्तु यह कोई नहीं जानता कि इन आरोपों में कितना दम है. आइये जानते हैं कि उत्तरप्रदेश की सरकार ने क्या सचमुच दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की है या फिर एक नए विवाद को जन्म दे कर मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाया है.

सोशल मीडिया पर उत्तरप्रदेश सरकार के समर्थकों ने कमोबेश एक जैसे ही आरोप डॉक्टर कफील पर लगाए हैं. जिनकी पड़ताल हिन्दीवार्ता ने विस्तृत रूप से की.

1. प्राइवेट क्लिनिक चलाते हैं

खान पर आरोप है कि वो अपना प्राइवेट क्लिनिक चलाते हैं, ये आरोप हास्यपद इसलिए हैं क्यों कि देश का कानून उन्हें इस बात कि इजाजत देता है.

अगस्त 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सरकारी डॉक्टर द्वारा अपना प्राइवेट क्लिनिक चलना कोई अपराध नहीं. भारत का लगभग हर सरकारी डॉक्टर अपना प्राइवेट क्लिनिक चलाता है.

हालाँकि एक बात गौर करने वाली है कि कुछ ही दिनों पहले डॉक्टर कफील ने शपथपत्र दायर किया था जिसमें साफ़ साफ़ लिखा था कि वह उत्तरप्रदेश सरकार के अधीन कार्य करते समय प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं करेंगे.

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अब यह देखना महत्वपूर्ण है कि क्या उन्होंने इसका उल्लंघन किया? यदि हाँ तो यह एक दोष है परन्तु बच्चों की मौत का इससे क्या वास्ता?

यहां सबसे बड़ी बात ये है कि डॉक्टर कफील के क्लिनिक चलाने की वजह से बच्चों की मौतें नहीं हुई. हादसे के समय डॉक्टर कफील वहाँ मौजूद थे और मरीजों की देखभाल कर रहे थे और इसके पर्याप्त सबूत भी हैं.

2. रेप के आरोपी हैं

एक आरोप यह भी लगाया जा रहा है कि डॉक्टर कफील पर रेप के आरोप हैं. हालाँकि इन सभी आरोपों को कोर्ट ने निराधार बता कर बंद कर दिया था परन्तु किसी व्यक्ति के जीवन की घटनाओं को इस दुर्घटना से जोड़कर देखना बेवकूफी नहीं तो और क्या है?

3. ऑक्सीजन सिलिंडर की चोरी किया करते थे

डॉक्टर खान पर यह भी आरोप है कि वह पूर्व में BRD अस्पताल से ऑक्सीजन की चोरी किया करते थे. यदि ऐसा है तो आखिर आजतक उनपर कोई केस दर्ज क्यों नहीं हुआ. और सबसे अहत्वपूर्ण बात ये है कि आखिर वो अस्पताल के बड़े ऑक्सीजन टैंक से ऑक्सीजन चुराते कैसे थे?

क्या वो लिक्विड ऑक्सीजन को बोतल में भर के घर ले जाते थे ?

क्यूंकि अस्पताल के जंबो सिलिंडर को उठाने के लिए तो ट्रक की आवशयकता पड़ती और ये काम चोरी छुपे तो किया नहीं जा सकता है.

4. खुद को मीडिया के सामने प्रमोट किया

योगी समर्थकों के अनुसार डॉक्टर कफील ने खुद को मीडिया के सामने पेश किया और बिना कोई काम किये मीडिया में खुद को मसीहा की तरह पेश किया.

परन्तु गोरखपुर के BRD अस्पताल के लोगों से बात करने पर साफ़ पता चलता है कि जब हॉस्पिटल में आधी रात को हाहाकार मचा तब डॉक्टर कफील सीधा वहां पहुंचे और मदद करने में आगे रहे. रात के 3 बजे जब मीडिया अस्पताल पहुंची तब भी कफील वहां पाए गए.

सीमा सुरक्षा बल ने भी इसपर पर्दाफाश किया है. SSB के डग के अनुसार त्रासदी के दिन डॉक्टर कफील उनके पास आये और उनसे ट्रकों की मांग की ताकि ऑक्सीजन सिलेंडरों को अस्पताल तक पहुँचाया जा सके. 10 अगस्त की रात को SSB के DIG ने ट्रक के साथ 11 जवान भी भेजे. यह सब डॉक्टर कफील के कहने पर हुआ.

कफील के प्रयासों से ही 3 जंबो सिलेंडरों की व्यवस्था हो सकी वरना मरने वालों की संख्या अधिक होती.

5. जानकारी रहने के बावजूद ऑक्सीजन वेंडर को पेमेंट नहीं किया

कुछ आरोप यह भी लग रहे हैं कि डॉक्टर कफील परचेज कमिटी के भी सदस्य थे और उन्होंने ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी के बकाया राशि की जानकारी सरकार को नहीं दी जिससे ऑक्सीजन की सप्लाई बंद हो गयी.

परन्तु योगी जी और उत्तरप्रदेश के स्वस्थ्य मंत्री बार बार यह कह रहे हैं कि अस्पताल में मौतें ऑक्सीजन की सप्लाई रुकने से नहीं हुई. तो फिर कफील के सप्लाई रोकने वाली बात का क्या औचित्य है?

परन्तु एक और बात सामने आयी है कि ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली पुष्पा सेल्स ने बकाया राशि के भुगतान के लिए बार बार पत्र लिखा है और ये पत्र उत्तरप्रदेश सरकार के बाल विकास मंत्री को भी लिखा गया है.

योगी सरकार के मंत्री को लिखा गया पत्र
योगी सरकार के मंत्री को लिखा गया पत्र

हर पत्र की एक कॉपी गोरखपुर के जिलाधिकारी को भी भेजी गयी थी. इतना सब होने के बावजूद योगी सरकार इस बात से अनजान कैसे थी?

सबसे बड़ा खुलासा तो 30 जुलाई को शहर के अखबार हिन्दुस्तान ने साफ साफ़ यह चेतावनी दी थी कि BRD अस्पताल की ऑक्सीजन की सप्लाई बंद की जा सकती है.

News About Oxygen stock
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इन सब के बावजूद योगी सरकार के मंत्री या प्रदेश के अधिकारीयों ने कोई एक्शन नहीं लिया और जिम्मेदार कफील खान को ठहरा दिया गया?

 

 

गोरखपुर त्रासदी: इस्तीफा मांगने पर बोले अमित शाह, पहली बार ऐसा हादसा नहीं हुआ है

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने गोरखपुर हादसे के बाद एक विवादित बयान दे दिया है. कांग्रेस द्वारा योगी के इस्तीफा पर जब उनसे सवाल किया गया तब श्री अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस का काम ही है इस्तीफा मांगना, इतने बड़े देश में बहुत से हादसे हुए हैं, पहली बार ऐसा कोई हादसा नहीं हुआ.

योगी आदित्यनाथ का बचाव करते हुए अमित शाह ने कहा “हम कांग्रेस कि तरह बिना जांच के गलती किसी पर नहीं थोपते. योगी जी ने जांच के आदेश दे दिए हैं और नतीजे आने पर हम कार्यवाही करेंगे. योगी जी ने टाइम बाउंड जांच रखा है. ये हादसा है, ये गलती है. हम गरीबों के लिए काम करते रहेंगे.”

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अमित शाह के इस बयान से बाद घमासान मचना तय है. सोशल मीडिया पर उनके बयान पर लोग बिफर पड़े हैं. एक ट्विटर यूजर के अनुसार- हादसे पहली बार नहीं हो रहे परन्तु जिमेदारी तो तय होनी चाहिए. ऐसे बेशर्मी से बयान देना भाजपा अध्यक्ष का घमंड दिखाता है.

आपको बता दें कि पिछले दिनों गोरखपुर में ऑक्सीजन सप्लाई बंद हो जाने के बाद एक साथ ३० से अधिक बच्चों कि मृत्यु हो गयी. जापानीज इंसेफेलाइटिस से लगातार हो रही इन मौतों पर अमित शाह से सवाल पूछे जा रहे थे जिसके जवाब पर उन्होंने यह बयान दिया.

खुलासा: मार्च में ही ख़त्म हो गया था ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी के साथ कॉन्ट्रैक्ट

पुष्पा सेल्स के मालिक प्रवीण मोदी ने मीडिया को बताया कि भाजपा की सरकार आने के बाद इस साल मार्च में ही ऑक्सीजन सप्लाई का कॉन्ट्रैक्ट पुष्पा सेल्स के साथ ख़त्म हो गया था. और योगी की भाजपा सरकार ने BRD कॉलेज की ऑक्सीजन सप्लाई का ठेका अल्लाहाबाद की इम्पीरियल गैस नमक कंपनी को दे दिया था.

child dead in gkp

यह भी सामने आया है कि सेंट्रल ऑक्सीजन पाइपलाइन प्लांट के स्टाफ ने बाल चिकित्सा विभाग के प्रमुख को चिट्ठी लिख कर ऑक्सीजन के घटते स्टॉक के बारे में चेताया था. बाल चिकित्सा विभाग के प्रमुख को लिखी गयी चिट्ठी में उन्होंने साफ़ चेतावनी दी थी कि यदि ऑक्सीजन के घटते स्टॉक के बारे में यदि कोई कदम नहीं उठाया गया तो इससे भारी मात्रा में जनहानि भी हो सकती है.

हालाँकि इस चिट्टी का विभाग पर कोई असर नहीं हुआ और अंततः वही हुआ जिसकी आशंका सबको थी.

सोशल मीडिया पर लोगों ने इस मुद्दे पर सरकार से सवाल पूछने शुरू कर दिए हैं. कफील अहमद पर कार्यवाही करने के बाद क्या योगी क्षेत्र के DM पर एक्शन लेंगे? या फिर बार बार चिट्ठी लिखे जाने के बावजूद मंत्रालय की उदासीनता के लिए स्वस्थ्य मंत्री का स्तीफा लेंगे?

हालाँकि योगी सरकार ने मामले के जांच के आदेश दे दिए हैं परन्तु जापानीज इंसेफेलाइटिस से मरने वाले बच्चों की संख्या बारिश के इस मौसम में बढ़ती ही जा रही है.

बच्चों की जान बचाने वाले डॉ कफील खान को योगी सरकार ने हटाया

गोरखपुर त्रासदी में जी जान से बच्चों की जान बचाने वाले डॉक्टर कफील खान पर योगी सरकार की गाज गिरी है. खबरों के मुताबिक़ कफील खान बाबा राघव दास (BRD) मेडिकल कॉलेज के पीडियाट्रिक्‍स विभाग के नोडल अफसर पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह डॉ महेश शर्मा को पीडियाट्रिक्‍स विभाग का नया नोडल अफसर नियुक्‍त किया गया है।

doctor kafeel khan

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार डॉक्टर कफील खान ने ऑक्सीजन की सप्लाई बंद हो जाने के बाद अपनी तरफ से ऑक्सीजन के सिलेंडरों की व्यवस्था कराई थी और खुद ही रात भर बच्चों की देख भाल में लगे रहे थे. इसके लिए मीडिया और साथी डॉक्टर्स ने भी उनकी काफी प्रशंसा की थी.

आखिर क्यों लिया गया ऐसा फैसला

माना जा रहा है कि डॉक्टर कफील पर कार्यवाही उनके प्राइवेट प्रैक्टिस की वजह से हुई है. सूत्रों के अनुसार योगी सरकार ने डॉक्टर कफील के प्राइवेट प्रैक्टिस को इस त्रासदी में एक प्रमुख कारण माना है. साथ ही यह भी कहा जा रहा है की इंसेफेलाइटिस से सबसे अधिक मौतें डॉक्टर कफील के वार्ड से ही हुई हैं.

योगी ने कहा किसी भी दोषी को बख़्शा नहीं जाएगा

मासूमों की मौत पर 28 घंटे बाद योगी ने तोड़ी चुप्पी

लखनऊ. गोरखपुर में बाबा राघोदास मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 33 मासूमों की मौत से परेशान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार शाम अपनी चुप्पी तोड़ी तो उसमें अपनी गलती मानने के बजाए आंकड़ों की बाज़ीगरी दिखाई.योगी ने बताया कि – 7 अगस्त को कुल 9 मौतें,- 8 अगस्त को कुल 12 मौतें,- 9 अगस्त को कुल 9 मौतें,- 10 अगस्त को 23 मौतें,- 11 अगस्त को कुल 11 मौतें हुईं. योगी ने कहा कि घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषी लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।घटना के बाद विपक्षी दलों ने आक्रामक रुख अपनाते हुए इसके लिए योगी सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) ने घटना की समीक्षा के लिए अपने नेताओं को गोरखपुर भेजा है.
मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल निलंबित
गोरखपुर के बाबा राघोदास मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया है और मुख्य सचिव की अध्यक्षता में जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति के गठन का ऐलान किया है। डीलर के मुताबिक उसने एक अगस्त को प्रिंसिपल भुगतान के लिए पत्र लिखा था। उसकी नकल चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक को लखनउ भी भेजी गई थी।

फरिश्ता,मसीहा बन की डॉ.कफील अहमद ने मदद
इंसेफ्लाइटिस वार्ड प्रभारी और बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर कफील की सोशल मीडिया पर खूब प्रशंसा हो रही है। दरअसल गुरुवार रात करीब दो बजे उन्हें सूचना मिली कि अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी हो गई है। आनन-फानन में वह अपने दोस्त डॉक्टर के पास पहुंचे और ऑक्सीजन तीन सिलेंडर अपनी कार में लेकर शुक्रवार की रात तीन बजे सीधे बीआरडी अस्पताल पहुंचे। तीन सिलेंडर बाल रोग विभाग में लगभग 15 मिनट ऑक्सीजन की आपूर्ति हो सकी। रात भर काम चल पाया है, लेकिन सुबह सात बजे ऑक्सीजन खत्म होते ही एक बार फिर स्थिति अधिक खराब हो गई।

पूरे विश्व में भारत की थू थू हो रही है पर मोदी जी चुप क्यों हैं?

गोरखपुर में पिछले 24 घंटों में 30 बच्चों के मारे जाने पर सोशल मीडिया पर संग्राम छिड़ गया है. लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी पर जम कर लताड़ लगाई है.

आपको बता दें कि गोरखपुर में BRD हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की सप्लाई ख़त्म हो जाने पर 30 बच्चों की अचानक मौत हो गयी जिसके बाद देश भर में हाहाकार मच गया.

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विदेशी मीडिया ने भी इस मुद्दे पर पूरी कवरेज दी है जिससे विदेशों में भी भारत की छवि खराब हो रही है.

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सोशल मीडिया पर लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि हर छोटी बात पर ट्वीट करने वाले प्रधानमंत्री मोदी ने 30 बच्चों की मौत पर संवेदना तक प्रकट करने की जहमत नहीं उठायी.

एक फेसबुक यूजर के अनुसार “पुर्तगाल में जंगल में लगी आग पर मरे लोगों पर प्रधानमंत्री बोल सकते हैं. रूस में विमान हादसा होने पर प्रधानमंत्री संवेदना प्रकट करते हैं पर गोरखपुर में 60 से अधिक बच्चे मारे गए पर प्रधानमंत्री ने एक्शन तो दूर, दो शब्द भी कहना ठीक नहीं समझा.”

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ट्विटर पर विशाल नाम के एक यूजर ने लिखा है “आपने उत्तरप्रदेश में शमशान और कब्रिस्तान के नाम पर विजय पायी और अब उत्तरप्रदेश को शमशान बना दिया है.”

एक अन्य यूजर ने लिखा है “जब गाय ऑक्सीजन छोड़ती है तो फिर ऑक्सीजन खरीदने की क्या जरूरत थी? योगी ने गायों की तैनाती क्यों नहीं की?”

 

बच्चों की मौत के बाद जागा योगी प्रशासन, ऑक्सीजन सप्लायर के यहां छापा

उत्तरप्रदेश के गोरखपुर में ऑक्सीजन की कमी से 30 बच्चों की मौत हो जाने के बाद अब गाज गिरनी तय है परन्तु प्रशासन ने अस्पताल पर कार्यवाही करने के बजाये ऑक्सीजन सप्लाई करने वाले को दबोचने का मन बनाया है.

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रिपोर्ट्स के अनुसार गोरखपुर पुलिस ने ऑक्सीजन सप्लाई करने वाले पुष्पा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड के मालिक मनीष भंडारी के सभी रिश्तेदारों के यहां छापा मारा है. कहा जा रहा है कि मनीष भंडारी पुलिस के रवैये से डरा हुआ है तथा अभी फरार है. पुलिस के बड़े अधिकारी उसकी तलाश कर रहे हैं

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हालाँकि इससे पहले पुष्पा सेल्स के एक कर्मचारी ने बयान दे कर कहा था कि ऑक्सीजन की सप्लाई इसलिए बंद की गयी थी क्युकी अस्पताल प्रशासन ने बकाया राशि का भुगतान नहीं किया था. शर्तों के अनुसार ऑक्सीजन वेंडर 10 लाख से अधिक राशि की सप्लाई नहीं करेगा परन्तु अस्पताल प्रशासन पर कुल 70 लाख रूपए का बकाया था जिसका भुगतान बार बार बोलने के बाद भी नहीं किया गया था और अंततः सप्लाई रोक दी गयी.

मेडिकल कॉलेज में इस दौरान लिक्विड ऑक्सिजन की आपूर्ति बाधित थी और ऑक्सिजन सिलिंडरों के जरिए किसी तरह काम चलाया जा रहा था। आशंका है कि कई मौतें ऑक्सिजन की कमी के चलते हुई

अस्पताल प्रशासन को पहले ही दे दी थी चेतावनी

pushpa sales

ऑक्सिजन आपूर्ति करने वाली फर्म पुष्पा सेल्स की ओर से दीपांकर शर्मा ने एक अगस्त को ही मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को पत्र लिखकर बकाया 63.65 लाख रु. का भुगतान न होने के कारण सप्लाई बाधित होने की चेतावनी दी थी। पत्र में लिखा था कि बकाया भुगतान न होने की स्थिति में वह गैस की सप्लाई नहीं कर पाएंगे और इसकी जिम्मेदारी संस्था की होगी।

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हालाँकि विपक्षी दलों के नेताओं ने आरोप लगाया है कि योगी प्रशासन दोषियों को बचाने में लगा हुआ है. दोषी अस्पताल अधिकारीयों को पकड़ने के बजाय निर्दोष ऑक्सीजन सप्लायर पर कार्यवाही की जा रही है. जो कि समझ से परे है.

आप बच्चों की मौत का बेवजह मुद्दा क्यों बना रहे, यहाँ वन्दे मातरम पर डिबेट चल रही है.

रिपब्लिक टीवी पर बहस के दौरान रिपब्लिक टीवी के एंकर ने बेहद करुणा शून्य बयान दे दिया. एक टीवी डिबेट पर हो रही बहस के दौरान जब एक प्रतिभागी ने योगी के गोरखपुर में 30 बच्चों की मौतों पर जब सवाल दागा तब रिपब्लिक की एंकर नाविका कुमार ने डांटते हुए कहा “हम यहां वन्दे मातरम पर डिबेट कर रहे हैं और आप गोरखपुर में बच्चों की मौत का मुद्दा ला कर जरूरी मुद्दों से हमारा ध्यान भटका रहे हैं?”

हालाँकि उनके इस वीडियो के जारी होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने रिपब्लिक टीवी की इस एंकर को जमकर लताड़ा.

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एक यूजर ने लिखा “कौन कहता है उत्तरप्रदेश में अस्पतालों की व्यवस्था ख़राब है. यहां तो गायों के लिए भी एम्बुलेंस सेवा है.”

एक अन्य यूजर ने लिखा “लालू यादव के बेटों पर सिर्फ आरोप लगने पर मीडिया भूखे भेड़ियों की तरह टूट पड़ता है पर योगी के रामराज्य में बच्चे दम तोड़ रहे हैं और यहाँ वन्दे मातरम एक ज्यादा जरूरी मुद्दा है.”

देखें वीडियो

वजह चाहे जो भी हो पर एक टीवी रिपोर्टर का ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर ऐसा लापरवाही भरा बयान देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है.

योगी के गोरखपुर में पिछले 5 दिनों में 60 मौतें, पर इस लापरवाही का जिम्मेदार कौन?

योगी के सांसदीय क्षेत्र गोरखपुर में पिछले 5 दिनों में 60 लोगों की मौतें हो चुकी हैं और अस्पताल प्रशासन अपनी नाकामी छुपाने में लगा हुआ है. आपको बता दें की पिछली रात को ही आक्सीजन की सप्लाई बंद हो जाने से 30 बच्चों की मृत्यु हो गयी. जबकि अस्पताल प्रशासन इस पूरे घटना को दिमागी बुखार बता कर कन्नी काट रहा है.

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आपको बता दें कि गोरखपुर के बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में पिछली रात को अचानक से 30 बच्चों की मौत हो गयी. जिसकी वजह अस्पताल में ऑक्सीजन की सप्लाई का अचानक ख़त्म हो जाना बताया जा रहा है.

लोगों की मानें तो अस्पताल में ऑक्सीजन की सप्लाई ख़त्म हो गयी थी जिसकी वजह वेंडर की पेमेंट का न होना था. बताया जा रहा है कि ऑक्सीजन की सप्लाई करने वाले वेंडर को 70 लाख रूपए की पेमेंट नहीं की गयी थी जिसकी वजह से सप्लाई काट दी गयी और ऐसा हादसा हुआ.

ऑक्सीजन की सप्लाई करने वाले पुष्पा सेल्स के दीपांकर शर्मा ने बताया की अस्पताल प्रशासन को कई बार बकाया पूरा करने की नोटिस दी गयी. कंपनी की शर्तों के अनुसार बकाया 10 लाख से अधिक नहीं होना चाहिए जबकि अस्पताल प्रशासन ने 68,58,596 रूपए का बकाया रोक कर रखा हुआ था . बार बार कहने पर जब कार्यवाही नहीं हुई तब कंपनी ने ऑक्सीजन की सप्लाई रोक दी.

परन्तु जब ऑक्सीजन की कमी से एक एक कर के बच्चों की मृत्यु की खबर आने लगी तब अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और आनन् फानन में कंपनी को 22 लाख का चेक जारी किया गया जिसके बाद कंपनी ने ऑक्सीजन टैंकर भेजने की बात कही है.

हालाँकि आपको बता दें की BD हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की सप्लाई काटने की यह पहली खबर नहीं है. इससे पहले भी अप्रैल में भी ऐसी ही घटना हो चुकी है जब बकाया 50 लाख से अधिक पहुँचने पर ऑक्सीजन की सप्लाई काट दी गयी थी.

 

योगी राज में कितना बदला उत्तर प्रदेश ? – तारकेश कुमार ओझा

यह विचित्र संयोग रहा कि सात साल बाद विगत मार्च में जब मेरा देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में जाना हुआ तब राज्य में विधानसभा के चुनाव अपने अंतिम चरण में थे, और इस बार जुलाई के प्रथम दिनों में ही फिर प्रदेश जाने का संयोग बना तब देश के दूसरे प्रदेशों की तरह ही यूपी  में भी राष्ट्रपति चुनाव की खासी गहमागहमी चल रही थी। निश्चय ही किसी भी सरकार के काम – काज का आकलन दिनों के आधार पर नहीं किया जा सकता। लेकिन मन में असीम जिज्ञासा यह जानने की रही कि देखें तेज तर्रार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राज में उत्तर प्रदेश कितना बदला है।

yogi uttar pradesh cmनितांत निजी प्रयोजन से पश्चिम बंगाल से उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के लिए यात्रा शुरू करते ही रेल रोको आंदोलन के चलते ट्रेन के पूरे छह घंटे विलंब से चलने की पीड़ा दूसरे सैकड़ों यात्रियों के साथ मुझे भी झेलनी पड़ी। प्रतापगढ़ स्टेशन से बाहर निकलते ही मेरी जिज्ञासा जोर मारने लगी। सड़कों की स्थिति परिवर्तन का अहसास करा रही थी। अपने गांव जाते समय कुछ वैकल्पिक मार्गों का पता चला जिससे ग्रामांचलों की दूरियां काफी सीमित हो जाने से लोग राहत की सांस ले रहे थे। बातचीत में कुछ पुलों का जिक्र भी आया जिनकी वजह से ग्रामांचलों में आवागमन सुविधाजनक हो गया था। सबसे बड़ा मसला विधि – व्यवस्था का था। लेकिन इस सवाल पर हर कोई मुस्कान के साथ चुप्पी साध लेता। इसके स्थान पर कुछ कद्दावर भाजपा नेताओं की आपसी कलह की चर्चा शुरू हो जाती। जो मेरे जिले से राज्य सरकार में मंत्री थे। नेताओं के आपसी टकराव की चर्चा लोग चटखारे लेकर कर रहे थे। बिजली के सवाल पर हर किसी से यही सुनने को मिला कि ग्रामांचलों में भी स्थिति कुछ सुधरी है। अनियमित ही सही लेकिन निर्धारित 12 घंटे के बजाय अब लोगों को अधिक बिजली मिल रही है।

दूसरे दिन बस्ती जाने के क्रम में मुझे इस बात से काफी खुशी हुई कि मेरे गंतव्य तक जाने वाला राजमार्ग अमेठी, सुल्तानपुर फैजाबाद व अयोध्या जैसे शहरों से होकर गुजरेगा । राजनैतिक – ऐतिहासिक घटनाओं के चलते मैं जिनकी चर्चा अरसे से सुनता आ रहा हूं। अपने गांव बेलखरनाथ से गंतव्य के लिए निकलते ही गाड़ी दीवानगंज बाजार पहुंची तो बाजार में बेहिसाब जल- जमाव व गंदगी के बीच सड़क के बिखरे अस्थि – पंजर ने अनायास ही मेरे मुंह से सवाल उछाल दिया कि परिवर्तन के बावजूद यह क्यों…। जवाब मिला … यही यहां का चलन है। मेरे यह पूछने पर कि यहां कोई नगरपालिका या पंचायत प्रतिनिधि तो होंगे । क्या उनके संज्ञान में यह सब नहीं है। फीकी मुस्कान के साथ जवाब मिला जब जिला मुख्यालयों में ऐसी ही हालत है तो गांव – जवार की कौन पूछे।

गाड़ी आगे बढ़ी औऱ अमेठी के रास्ते गोरखपुर जाने वाले राजमार्ग की ओर बढ़ने लगी। बेखटके चल रही गाड़ी ने अहसास करा दिया कि उत्तर प्रदेश में भी प्रमुख सड़कों की हालत में काफी सुधार आ गया है। हालांकि इस आधार पर कतई इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता था कि गांव – कस्बों की सड़कें सचमुच गड्ढा मुक्त हो पाई है या नहीं। अनेक गांव – कस्बों व जिला मुख्यालयों से होते हुए हम अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे थे। हालांकि मेरे अंदर सबसे ज्यादा कौतूहल परिवर्तन की सरकार में पुलिस तत्परता का अनुभव करने की थी। क्योंकि कानून – व्यवस्था में सुधार के  हर सवाल पर स्थानीय निवासी फीकी मुस्कान के साथ चुप्पी साध लेते थे।

अयोध्या से आगे बढ़ते ही बस्ती जिले के प्रवेश द्वार पर एक हादसे के चलते राजमार्ग पर बेहिसाब जाम लग गया था। ट्रक ने सेना के एंबुलेंस को ठोकर मार दी थी। हादसे में किसी की मौत तो नहीं हुई थी। लेकिन हादसे के चलते वाहनों का आगे बढ़ पाना मुश्किल हो रहा था। बढ़ते उमस के बीच इस परिस्थिति ने मेरी बेचैनी बढ़ानी शुरू कर दी। तभी लगा शायद इसी बहाने पुलिसिया तत्परता से दो – चार होने का मौका मिल जाए। अपेक्षा के अनुरूप ही थोड़ी देर में सायरन बजाते पुलिस के दो वाहन मौके की ओर जाते दिखाई दिए। कुछ देर में जाम खुल जाने से मैने राहत की सांस ली। वापसी यात्रा में निकट संबंधी के यहां भुपियामऊ गया, तो वहां निर्माणाधीन विशाल पुल ने मुझे फिर  कभी गांव से नजर आने वाले इस इलाके में  परिवर्तन का आभास कराया। भले ही इसकी नींव बहुत पहले रखी गई हो।

वापसी की ट्रेन हमें इलाहाबाद से पकड़नी थी। देर शाम तकरीबन साढ़े आठ बजे हमें प्रतापगढ़ से मनवर संगम एक्सप्रेस मिली। रवाना होते ही ट्रेन की बढ़िया स्पीड ने इस रुट पर कच्छप गति से चलने वाली ट्रेनों की मेरी पुरानी अवधारणा को गलत साबित कर दिया। लेकिन जल्दी ही ट्रेन पुरानी स्थिति में लौट आई और जगह – जगह रुकने लगी। फाफामऊ स्टेशन पर यह ट्रेन देर तक रुकी रही। जिसके चलते असंख्य यात्रियों को रेलवे लाइन पार करने का जोखिम उठाते हुए पहले जाने वाली दूसरी ट्रेनों में चढ़ना पड़ा। इलाहाबाद से हमें आनंदविहार – सांतरागाछी साप्ताहिक सुपर फास्ट ट्रेन पकड़ना था। लेकिन यह ट्रेन धीरे – धीरे पांच घंटे विलंबित हो गई। जिससे यात्रा की शुरूआत की तरह ही मेरी वापसी यात्रा का सगुन भी बिगड़ चुका था। ट्रेन के आने के बाबत रेल महकमे की भारी लापरवाही झेलता हुआ मैं परिवार सहित तड़के इस ट्रेन में सवार होकर अपने शहर को लौट सका।

  • तारकेश कुमार ओझा

उप-संपादक, दैनिक जागरण, खड़गपुर, पश्चिम बंगाल।