योगी राज में कितना बदला उत्तर प्रदेश ? – तारकेश कुमार ओझा

यह विचित्र संयोग रहा कि सात साल बाद विगत मार्च में जब मेरा देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में जाना हुआ तब राज्य में विधानसभा के चुनाव अपने अंतिम चरण में थे, और इस बार जुलाई के प्रथम दिनों में ही फिर प्रदेश जाने का संयोग बना तब देश के दूसरे प्रदेशों की तरह ही यूपी  में भी राष्ट्रपति चुनाव की खासी गहमागहमी चल रही थी। निश्चय ही किसी भी सरकार के काम – काज का आकलन दिनों के आधार पर नहीं किया जा सकता। लेकिन मन में असीम जिज्ञासा यह जानने की रही कि देखें तेज तर्रार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राज में उत्तर प्रदेश कितना बदला है।

yogi uttar pradesh cmनितांत निजी प्रयोजन से पश्चिम बंगाल से उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के लिए यात्रा शुरू करते ही रेल रोको आंदोलन के चलते ट्रेन के पूरे छह घंटे विलंब से चलने की पीड़ा दूसरे सैकड़ों यात्रियों के साथ मुझे भी झेलनी पड़ी। प्रतापगढ़ स्टेशन से बाहर निकलते ही मेरी जिज्ञासा जोर मारने लगी। सड़कों की स्थिति परिवर्तन का अहसास करा रही थी। अपने गांव जाते समय कुछ वैकल्पिक मार्गों का पता चला जिससे ग्रामांचलों की दूरियां काफी सीमित हो जाने से लोग राहत की सांस ले रहे थे। बातचीत में कुछ पुलों का जिक्र भी आया जिनकी वजह से ग्रामांचलों में आवागमन सुविधाजनक हो गया था। सबसे बड़ा मसला विधि – व्यवस्था का था। लेकिन इस सवाल पर हर कोई मुस्कान के साथ चुप्पी साध लेता। इसके स्थान पर कुछ कद्दावर भाजपा नेताओं की आपसी कलह की चर्चा शुरू हो जाती। जो मेरे जिले से राज्य सरकार में मंत्री थे। नेताओं के आपसी टकराव की चर्चा लोग चटखारे लेकर कर रहे थे। बिजली के सवाल पर हर किसी से यही सुनने को मिला कि ग्रामांचलों में भी स्थिति कुछ सुधरी है। अनियमित ही सही लेकिन निर्धारित 12 घंटे के बजाय अब लोगों को अधिक बिजली मिल रही है।

दूसरे दिन बस्ती जाने के क्रम में मुझे इस बात से काफी खुशी हुई कि मेरे गंतव्य तक जाने वाला राजमार्ग अमेठी, सुल्तानपुर फैजाबाद व अयोध्या जैसे शहरों से होकर गुजरेगा । राजनैतिक – ऐतिहासिक घटनाओं के चलते मैं जिनकी चर्चा अरसे से सुनता आ रहा हूं। अपने गांव बेलखरनाथ से गंतव्य के लिए निकलते ही गाड़ी दीवानगंज बाजार पहुंची तो बाजार में बेहिसाब जल- जमाव व गंदगी के बीच सड़क के बिखरे अस्थि – पंजर ने अनायास ही मेरे मुंह से सवाल उछाल दिया कि परिवर्तन के बावजूद यह क्यों…। जवाब मिला … यही यहां का चलन है। मेरे यह पूछने पर कि यहां कोई नगरपालिका या पंचायत प्रतिनिधि तो होंगे । क्या उनके संज्ञान में यह सब नहीं है। फीकी मुस्कान के साथ जवाब मिला जब जिला मुख्यालयों में ऐसी ही हालत है तो गांव – जवार की कौन पूछे।

गाड़ी आगे बढ़ी औऱ अमेठी के रास्ते गोरखपुर जाने वाले राजमार्ग की ओर बढ़ने लगी। बेखटके चल रही गाड़ी ने अहसास करा दिया कि उत्तर प्रदेश में भी प्रमुख सड़कों की हालत में काफी सुधार आ गया है। हालांकि इस आधार पर कतई इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता था कि गांव – कस्बों की सड़कें सचमुच गड्ढा मुक्त हो पाई है या नहीं। अनेक गांव – कस्बों व जिला मुख्यालयों से होते हुए हम अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे थे। हालांकि मेरे अंदर सबसे ज्यादा कौतूहल परिवर्तन की सरकार में पुलिस तत्परता का अनुभव करने की थी। क्योंकि कानून – व्यवस्था में सुधार के  हर सवाल पर स्थानीय निवासी फीकी मुस्कान के साथ चुप्पी साध लेते थे।

अयोध्या से आगे बढ़ते ही बस्ती जिले के प्रवेश द्वार पर एक हादसे के चलते राजमार्ग पर बेहिसाब जाम लग गया था। ट्रक ने सेना के एंबुलेंस को ठोकर मार दी थी। हादसे में किसी की मौत तो नहीं हुई थी। लेकिन हादसे के चलते वाहनों का आगे बढ़ पाना मुश्किल हो रहा था। बढ़ते उमस के बीच इस परिस्थिति ने मेरी बेचैनी बढ़ानी शुरू कर दी। तभी लगा शायद इसी बहाने पुलिसिया तत्परता से दो – चार होने का मौका मिल जाए। अपेक्षा के अनुरूप ही थोड़ी देर में सायरन बजाते पुलिस के दो वाहन मौके की ओर जाते दिखाई दिए। कुछ देर में जाम खुल जाने से मैने राहत की सांस ली। वापसी यात्रा में निकट संबंधी के यहां भुपियामऊ गया, तो वहां निर्माणाधीन विशाल पुल ने मुझे फिर  कभी गांव से नजर आने वाले इस इलाके में  परिवर्तन का आभास कराया। भले ही इसकी नींव बहुत पहले रखी गई हो।

वापसी की ट्रेन हमें इलाहाबाद से पकड़नी थी। देर शाम तकरीबन साढ़े आठ बजे हमें प्रतापगढ़ से मनवर संगम एक्सप्रेस मिली। रवाना होते ही ट्रेन की बढ़िया स्पीड ने इस रुट पर कच्छप गति से चलने वाली ट्रेनों की मेरी पुरानी अवधारणा को गलत साबित कर दिया। लेकिन जल्दी ही ट्रेन पुरानी स्थिति में लौट आई और जगह – जगह रुकने लगी। फाफामऊ स्टेशन पर यह ट्रेन देर तक रुकी रही। जिसके चलते असंख्य यात्रियों को रेलवे लाइन पार करने का जोखिम उठाते हुए पहले जाने वाली दूसरी ट्रेनों में चढ़ना पड़ा। इलाहाबाद से हमें आनंदविहार – सांतरागाछी साप्ताहिक सुपर फास्ट ट्रेन पकड़ना था। लेकिन यह ट्रेन धीरे – धीरे पांच घंटे विलंबित हो गई। जिससे यात्रा की शुरूआत की तरह ही मेरी वापसी यात्रा का सगुन भी बिगड़ चुका था। ट्रेन के आने के बाबत रेल महकमे की भारी लापरवाही झेलता हुआ मैं परिवार सहित तड़के इस ट्रेन में सवार होकर अपने शहर को लौट सका।

  • तारकेश कुमार ओझा

उप-संपादक, दैनिक जागरण, खड़गपुर, पश्चिम बंगाल।

भ्रष्टाचार के मामले में भारत एशिया में नंबर 1, पाकिस्तान 5वें स्थान पर

भारतीय जनता पार्टी के नरेंद्र मोदी सरकार का एक सपना भ्रष्टाचार मुक्त भारत का निर्माण करना था परन्तु ऐसा लगता है कि उनका यह सपना आने वाले दिनों में मुश्किल ही होता जा रहा है.

हकीकत को देखने पर एक बेहद डरावनी तस्वीर सामने आती है. ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल (एक वैश्विक सिविल सोसाइटी आर्गेनाईजेशन) के सर्वे में यह सामने आया है कि भारत ने भ्रष्टाचार के मामले में एशिया में सभी देशों को पीछे छोड़ चूका है. एशिया के 16 देशों में हुए सर्वे में भारत नंबर 1 पर बना हुआ है जहाँ भ्रष्टाचार के गंभीर आंकड़े देखने को मिले.

हर 10 में से 7 भारतीय का कहना है कि बाबुओं को बिना पैसा खिलाए आज भी कोई सरकारी काम कराना मुश्किल है. वहीँ एशिया का जापान सबसे कम भ्रष्ट देश है जहाँ 1000 में से सिर्फ 2 लोगों ने देश में भ्रष्टाचार की बात कही.

corruption in india

16 एशियाई देशों में हुए सर्वे में यह बात सामने आयी है कि हर 4 में से 1 नागरिक को सरकारी सेवा का प्रयोग करने के लिए भी घूस देना पड़ा है. ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने इस सर्वे कि विस्तृत रिपोर्ट छापी है जिसका शीर्षक है “पीपल एंड करप्शन-एशिया पैसिफिक”
इस सर्वे में पूरे एशिया भर से 22000 से अधिक लोगों ने भाग लिया तथा भ्रष्टाचार पर अपने अनुभवों को साझा किया.

क्या नरेंद्र मोदी की भाजपा सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ पर्याप्त कदम उठा रही है?

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लोग फिर भी मानते हैं कि सरकार अच्छा काम कर रही है

सर्वे में रोचक बात सामने आयी है. जहां तीन चौथाई लोगों ने यह माना कि पिछले 3 सालों में भ्रष्टाचार में बढोत्तरी हुई है परन्तु जब लोगों से यह पुछा गया कि उनकी सरकार सार्वजानिक सेवाओं में भ्रष्टाचार को दूर करने के लिए कैसा काम कर रही है, तब लोगों के जवाब चौंकाने वाले थे.

corruption

भारत,श्रीलंका, थाईलैंड तथा इंडोनेशिया के आधे से अधिक लोगों का यह मानना है कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार मिटाने को ले कर अब भी तत्पर है तथा अच्छा काम कर रही है. भारत में 53% लोग अब भी मानते हैं कि नरेंद्र मोदी की सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ अच्छा काम कर रही है.

18 महीने तक चले इस सर्वे में एशिया के 40 प्रतिशत लोगों ने यह माना कि उनके देश की पुलिस भ्रष्ट है, वहीँ 33 प्रतिशत लोगों ने यह स्वीकार किया कि उन्होंने काम निकालने के लिए पुलिस को पैसे खिलाये.

बात पुलिसिया (न्याय-व्यवस्था) भ्रष्टाचार की करें तो इस मामले में पाकिस्तान सबसे आगे है जहाँ रिश्वतखोरी की दर 70 प्रतिशत है, वहीँ भारत में यह 54 प्रतिशत है हालाँकि चीन इस मामले में काफी बेहतर स्थिति में है जहाँ यह सिर्फ 12 प्रतिशत है.

भारत के सरकारी स्कूलों की व्यवस्था सर्वाधिक भ्रष्ट है जहां रिश्वतखोरी की दर 58 प्रतिशत है वहीँ पाकिस्तान में यह सिर्फ 9 प्रतिशत है और चीन में 29 प्रतिशत.

कमोबेश वही हाल भारत के सरकारी अस्पतालों का है जहां 100 में से 59 लोगों ने माना कि उन्हें सरकारी अस्पतालों में किसी ने किसी तरीके से घूस देना पड़ा. पाकिस्तान और चीन में स्थिति काफी बेहतर है वहां अस्पतालों में रिश्वतखोरी की दर क्रमशः 11% तथा 18% है.

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एशिया के 5 सर्वाधिक भ्रष्ट देश 

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने अपने सर्वे में बेसिक सरकारी सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए सार्वजानिक सेवाओं में भ्रष्टाचार का आकलन किया है. यह रिपोर्ट मार्च 2017 में प्रकाशित हुई थी. एशिया के पांच सर्वाधिक भ्रष्ट देशों की सूची में भारत नंबर 1 पर है.

  1. भारत (रिश्वतखोरी दर- 69%)
  2. वियतनाम (रिश्वतखोरी दर- 65%)
  3. थाईलैंड (रिश्वतखोरी दर- 41%)
  4. म्यांमार (रिश्वतखोरी दर- 40%)
  5. पाकिस्तान (रिश्वतखोरी दर- 40%)

सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद सरकारी तंत्र  के निचले स्तर पर भ्रष्टाचार की समस्या आज भी गंभीर बनी हुई है. जिसपर जल्द से जल्द ठोस कार्यवाही की आवशयकता है .

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