भाजपा मंत्रिमंडल में होगा फेरबदल – 2019 में 360 सीटों का लक्ष्य

नयी दिल्ली: भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बृहस्पतिवार को भाजपा मुख्यालय में पार्टी के 30 से ज्यादा वरिष्ठ नेताओं के साथ तीन घंटे तक चली मैराथन बैठक में 2019 के चुनावों में पार्टी की 360 से अधिक सीटों का लक्ष्य दिया. सूत्रों के अनुसार भाजपा अध्यक्ष ने नेताओं को अपना ध्यान और प्रयास ऐसी लोकसभा सीटों पर लगाने को कहा है जहाँ 2014 के चुनावों में भाजपा प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा था.

modi amit shah 360 seats 2019 electionsयह संभावना भी जताई जा रही है कि केंद्र की मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में इसी महीने फेरबदल किया जा सकता है. मंत्रिमंडल में फेरबदल के पीछे तीन बातों पर जोर रहने की सम्भावना है:

पहला – कुछ ऐसे मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है जिनकी परफॉरमेंस से प्रधान मंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह खुश नहीं हैं.
दूसरा – आने वाले समय में गुजरात, राजस्थान, बंगाल आदि राज्यों में होने वाले चुनावों के मद्दे-नजर कुछ ऐसे तेज-तर्रार नेताओं को संगठन में लाया जा सकता है जिन्हें चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी दी जाएगी.
तीसरा – राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ भी कुछ मंत्रियों से नाराज चल रहा है. वैसे तो प्रधानमंत्री संघ को ज्यादा वजन देने के मूड में नहीं बताये जा रहे फिर भी संघ को पूरी तरह से नजरअंदाज कर पाना उनके लिए भी संभव नहीं होगा.

माना जा रहा है कि भाजपा तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और बंगाल पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित कर रही है. बंगाल में भाजपा की रणनीति चुनाव में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की है भले ही वह चुनाव में सीटों की ख़ास संख्या न भी ले पाए. कहा जा सकता है की भाजपा की रणनीति 2019 के चुनावों में बंगाल में लेफ्ट फ्रंट और कोंग्रेसको पीछे छोड़ कर दूसरे स्थान पर रहने अर्थात मुख्य विपक्ष की भूमिका में आने की है. वहां से भाजपा 2024 के चुनाव में राज्य की सत्ता पर पहुंचने की उम्मीद रख रही है.

बुधवार को नौ मंत्रियों ने अमित शाह के सामने पेश होकर अपने कामकाज का लेखा-जोखा पेश किया. इन मंत्रियों में रविशंकर प्रसाद, प्रकाश जावडेकर, धर्मेंद्र प्रधान, पीयूष गोयल, जेपी नड्डा, नरेंद्र सिंह तोमर, निर्मला सीतारमण, मनोज सिन्हा और अर्जुन राम मेघवाल मौजूद थे।

पार्टी का मुख्य जोर उन 150 सीटों पर है जहाँ पार्टी 2014 के लोकसभा चुनाव में दुसरे स्थान पर रही थी. साथ ही बड़े राज्यों में सेसिर्फ एक कर्नाटक ऐसा राज्य है जहाँ कांग्रेस अभी भी सत्ता में बची हुई है. अपने कांग्रेस मुक्त भारत के लक्ष्य में भाजपा कर्णाटक से भी कांग्रेस को उखाड़ फेंकना चाहेगी.

भाजपा अपने कुछ ऐसे सहयोगियों से भी पीछा छुड़ाना चाहती है जो उसके लिए सिरदर्द बने हुए हैं. इनमें अकालीदल, शिव सेना और इनेलो शामिल हैं. यही कारन है की भाजपा 2019 के चुनाव में 360 से अधिक सीटों के लक्ष्य के सह उतरना छह रही है.

Nari Shiksha ka mahatva Essay in Hindi – नारी शिक्षा का महत्व पर निबंध

नारी के विषयों में हमारे विद्वानों और विचारकों ने अलग अलग विचार प्रस्तुत किए हैं। गोस्वामी तुलसीदान ने नारी के अन्तर्गत बहुत प्रकार के दोषों की गणना की थी। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा कहा गया नारी का सद्चरित्र और उज्जवल चरित्र का उदघाटन नहीं करता है, अपितु इससे नारी के दुष्चरित्र पर ही प्रकाश पड़ता है। गोस्वामी तुलसीदास ने साफ साफ कहा था कि नारी में आठ अवगुण सदैव रहते हैं। उसमें साहस, चपलता, झूठापन, माया, भय, अविवेक, अपवित्रता और कठोरता खूब भरी होती है। चाहे कोई भी नारी क्यों न होये-

Nari Shiksha ka mahatva Essay in Hindi - नारी शिक्षा का महत्व पर निबंध साहस, अनृत, चपलता, माया।
भय, अविवेक, असौच, अदाया।।

इसीलिए तुलसीदास ने नारी को पीटने के लिए कहा-

ढोल, गंवार, शुद्र, पशु, नारी।
सकल ताड़ना के अधिकारी।।

अगर तुलसीदास ने मनुस्मृति की उस शिक्षा पर ध्यान दिया होता, तो वे ऐसी कठारे वाणी का प्रयोग न करते। मनु महाराज संसार के सच्चे चिन्तक थे। इसलिए उन्होंने मानवता को सबसे पहले महत्व और स्थान दिया था। नारी को ऋद्धापूर्वक देखते हुए उसे देवी के रूप में मान्यता प्रदान की थी-

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवताः।

अर्थात् जहाँ नारी की पूजा होती है, वहाँ देवगण निवास करते हैं। इसी से प्रभावित होकर कविवर जयशंकर प्रसाद ने कहा था-

नारी! तुम केवल श्रद्धा हो, विश्वास रजत नग पगतल में।
पीयूष स्रोत सी बहा करो, जीवन के सुन्दर समतल में।।

इतना होने पर भी नारी के प्रति अन्याय और शोषण कार्य चलता रहा, जिसे देख करके महान राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने कहा-

अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी।
आँचल में है दूध और आँखों में पानी।।

नारी के प्रति उपेक्षा का क्या कारण रहा? इसके उत्तर में हम यह कह सकते हैं कि हमने अपने शास्त्र, अपनी संस्कृति सभ्यता आदि को एकदम भुल दिया और अन्धानुकरण से हमने काम लिया। हमने नारी के गुणों को पहचानने की कोशिश नहीं की। हमने यह समझा कि नारी एक परम मित्र और मंत्रणा की प्रतिमूर्ति है। वह पति के लिए दासी के समान सच्ची सेवा करने वाली है। माता के समान जीवन देने वाली अर्थात् रक्षा करने वाली है। रमण करने के लिए पत्नी है। धर्म के अनुकूल कार्य करने वाली है। पृथ्वी के समान क्षमाशील है।

आज के युग में नारी कितनी सुशील और शिष्ट क्यों न हो, अगर वह शिक्षित नहीं है, तो उसका व्यक्तित्व बड़ा नहीं हो सकता है, क्योंकि आज का युग प्राचीन काल को बहुत पीछे छोड़ चुका है। आज नारी पर्दा और लज्जा की दीवारों से बाहर आ चुकी है, वह पर्दा प्रथा से बहुत दूर निकल चुकी है। इसलिए आज इस शिक्षा युग में अगर नारी शिक्षित नहीं है, तो उसका इस युग से कोई तालमेल नहीं हो सकता है। ऐसा न होने से वह महत्वहीन समझी जायेंगी और इस तरह समाज से उपेक्षा का पात्र बन जाएगी। इसलिए आज नारी को शिक्षित करने की तीव्र आश्वयकता को समझकर इस पर ध्यान दिया जा रहा है।

नारी शिक्षा का महत्व निर्विवाद रूप से मान्य है। यह बिना किसी तर्क या विचार विमर्श के ही स्वीकार करने योग्य है, क्योंकि नारी शिक्षा के परिणामस्वरूप ही पुरूष के समान आदर और सम्मान का पात्र समझी जाती है। यह तर्क किया जा सकता है कि प्राचीनकाल में नारी शिक्षित नहीं होती थी। वह गृहस्थी के कार्यों में दक्ष होती हुई पतिपरायण और महान पतिव्रता होती थी। इसी योग्यता के फलस्वरूप वह समाज से प्रतिष्ठित होती हुई देवी के समान श्रद्धा और विश्वास के रूप में देखी जाती थी, लेकिन हमें यह सोचना विचारना चाहिए कि तब के समय में नारी शिक्षा की कोई आश्वयकता न थी। तब नारी नर की अनुगामिनी होती थी। यही उसकी योग्यता थी, जबकि आज की नारी की योग्यता शिक्षित होना है।

आज का युग शिक्षा के प्रचार प्रसार से पूर्ण विज्ञान का युग है। आज अशिक्षित होना एक महान अपराध है। शिक्षा के द्वारा ही पुरूष किसी भी क्षेत्र में जैसे प्रवेश करते हैं, वैसे नारी भी शिक्षा से सम्पन्न होकर जीवन के किसी भी क्षेत्र में प्रवेश करके अपनी योग्यता और प्रतिभा का परिचय दे रही है।

शिक्षित नारी में आज पुरूष की शक्ति और पुरूष का वही अद्भुत तेज दिखाई पड़ता है। शिक्षित नारी जब घर की चारदीवारी से निकल समाज मे समानाधिकार को प्राप्त कर रही है। वह अपनी प्रतिभा और शक्ति से कहीं कहीं महत्वपूर्ण और प्रभावशाली दिखाई देती है। नारी शिक्षित होने के फलस्वरूप आज समाज के एक से एक ऐसे बड़े उत्तरदायित्व का निर्वाह कर रही है, जो पुरूष भी नहीं कर सकता। शिक्षित नारी आजकल के सभी क्षेत्रों में पदार्पण कर चुकी है। वह एक महान् नेता, समाज सेविका, चिकित्सक, निदेशक, वकील, अध्यापिका, मन्त्री, प्रधानमंत्री आदि महान पदों पर कुशलतापूर्वक कार्य करके अपनी अद्भुत क्षमता को दिखा रही है। महत्वपूर्ण बात यह है कि वह इन पदों की कठिनाइयों का सामना करती हुई भी अपनी प्रतिभा का परिचय देती है और अपनी दिलेरी को दिखा रही है।

शिक्षित नारी में आत्म निर्भरता का गुण उत्पन्न होता है। वह स्वावलम्ब के गुणों से युक्त होकर पुरूष को चुनौती देती है। अपने स्वावलम्बन के गुणों के कारण ही नारी पुरूष की दासी या अधीन नहीं रहती है, अपितु वह पुरूष के समान ही स्वतंत्र और स्वछन्द होती है। शिक्षित होने के कारण ही आज नारी समाज में पूर्णरूप से सुरक्षित है। शिक्षित नारी आज के समाज का अत्याचार नहीं सहती है या आज समाज नारी पर कोई अत्याचार नहीं करता है। शिक्षित नारी के प्रति ब्याज दहेज का कोई शोषण चक्र नहीं चलता है। शिक्षित नारी को आज सती प्रथा का कोई कोप नहीं सहना पड़ता है। शिक्षा के कारण ही आज वह न केवल पुरूष से ही नहीं, अपितु समाज से भी मंडित और समादूत है।

(Nari shiksha ka mahatva nibandh 1000 words)

Make in India Essay in Hindi – मेक इन इंडिया पर निबंध

देश में बेरोजगारी की समस्या के समाधान एवं विदेशी निवेषकों को भारत में व्यवसाय हेतु पैसा लगाने का अवसर प्रदान करने के लिए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा एक अभियान शुरू किया गया है, जिसका नाम है ”मेक इन इण्डिया”। इस समाधान से भारत देश में ही कई उत्पादों का उत्पादन संभव हो पायेगा। इसमें विदेशी निवेषकों को, जो भारत में पैसा लगाकर उत्पादन करना चाहते हैं, उन्हें तो लाभ होगा ही साथ ही इस अभियान द्वारा कई बेरोजगार युवाओं को रोजगार का अवसर भी प्राप्त होगा तथा देश की बेरोजगारी की समस्या का समाधान भी होगा।

मेक इन इण्डिया पर निबंध – 200 शब्दों में 

दिनांक 25 सितम्बर 2014 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ”मेक इन इण्डिया” अभियान का शुभारम्भ किया गया। इस अभियान से कई देश जो भारत में निवेश करने के इच्छुक हैं, उन्हें बहुत लाभान्वित हो सकेंगे। हमारे देश में बढ़ रहे बेरोजगारी के स्तर को घटाने में भी इससे सहायता मिलेगी तथा देश के बेरोजगार के लिए एक नई दिशा खुलेगी। साथ ही देश की गरीबी हटाने में भी यह मददगार साबित होगा। भारत में मानव संसाधन से लेकर अन्य संसाधनों की कमी नहीं है। अतः विश्व पटल पर उत्पादन के क्षेत्र में भारत को एक अलग ही दर्जा हासिल होगा। कई देशी कम्पनियों का विदेशी निवेशकों के साथ समझौता भी हो चुका है और कार्य प्रगति पर है।

make-in-India-hindi nibandhमेक इन इण्डिया मिशन के तहत ऑटोमोबाईल्स, टैक्सटाईल्स, दवाईयाँ, रसायन, सूचना तकनीकी, पर्यटन, स्वास्थ्य, रेलवे बन्दरगाह आदि क्षेत्रों को रखा गया है जहाँ इस मिशन को क्रियान्वित किया जा सकता है। इस कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए www.makeinindia.com नाम से वेब पोर्टल भी तैयार किया गया है। इसमें आप 72 घंटों के अन्दर विशेषज्ञों द्वारा अपनी शंकाओं का समाधान पा सकते हैं।

मेक इन इण्डिया पर निबंध – 500 शब्दों में

भारत को आर्थिकी के क्षेत्र में विशेष पहचान दिलाने एवं देश के विकास हेतु माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ”मेक इन इण्डिया” अभियान की शुरुआत की गई है। इस अभियान की शुरुआत विज्ञान भवन, नई दिल्ली में 25 सितम्बर 2014 को की गई। इन अभियान का प्रतीक एक शेर है जिसके पास बहुत सारे मशीनी पहिये हैं। इन पहियों के सहारे चलता यह शेर दृढ़ता और बुद्धिमत्ता को प्रदर्शित करता है। व्यापार के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने का यह सर्वोत्तम अभियान है।

यह उन निवेशकों के लिए सुनहरा मौका है जो भारत में निवेश करना चाहते हैं और देश में अपना व्यापार स्थापित करना चाहते हैं। ऐसे निवेशकों के ऊपर किसी भी प्रकार का बोझ कम करने के लिए भी सरकार प्रयासरत है। इससे देश में ही कई वस्तुओं का उत्पादन सम्भव हो सकेगा साथ ही रोजगार की अपूर्व सम्भावनाओं के साथ देश की गरीबी का स्तर भी काफी कम हो जायेगा। निवेश हेतु 25 क्षेत्र चयनित किये गये हैं जिसके तहत राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय निवेशक निवेश कर पायेंगे।

विभिन्न कारगर संसाधनों के साथ यह अभियान कई निवेशकों और उद्योगपतियों को अपनी और अवश्य खींचेगा। इन अभियान के सफल संचालन के लिए देश में कई अन्य अभियान भी प्रारम्भ किये गये हैं जिससे निवेशकों को कार्य करने में सुविधा हो तथा उन्हें आधुनिकीकरण की कमी न खले।

देश में रोजगार के घटते अवसरों के कारण अथवा उचित स्थान प्राप्त न होने के कारण देश के युवा देश छोड़ कर विदेशों में नौकरी करने के लिए मजबूर हैं। साथ ही संसाधनों की कमी के कारण देश के बड़े निवेशक एवं व्यापारी भी देश छोड़ने के लिए मजबूर हुए हैं। यदि यही स्थिति रहती तो देश की अर्थव्यवस्था असंतुलित हो जाती। किन्तु इस अभियान के द्वारा अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए एक कारगर कदम उठाया गया है।

इस अभियान के सफल संचालन के लिए व देश के युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने एवं नौकरियों के अवसर खोलने के लिए कौशल विकास के कार्यक्रम भी आयोजित किये जा रहे हैं। जिससे देश के युवा अपना सहयोग देकर देश का तथा अपना भी विकास सुनिश्चित कर सकें। इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य, मनोरंजन, पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, रेलवे, सड़क और हाईवे, विमानन उद्योग, बिजली से सम्बन्धित मशीन, ऑटोमोबाईल, सूचना तकनीकी, खाद्य प्रसंस्करण, दवा निर्माण, बायोटेक्नोलॉजी, रसायन, रक्षा, विनिर्माण, कपड़ा उद्योग, चमड़ा, अंतरिक्ष आदि सम्मिलित हैं।

इस अभियान के सफलता पूर्वक संचालन से देश के (10 मिलीयन) 10 करोड़  युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। बढ़े हुए रोजगार के अवसर देश की क्रय शक्ति को भी बढ़ायेंगे। मेक इन इण्डिया अभियान भारत के सुनहरे भविष्य की ओर इशारा कर रहा है जिसे अभी की पीढ़ी के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियाँ भी देख एंव संजो पायेंगीं। देश को आर्थिक रूप से सुदृढ़ देखने का जो स्वप्न माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देखा है वह इस अभियान के द्वारा अवश्य सफल होगा।

लोग मिलते हैं बदलते हुए मौसम की तरह

ग़ज़ल

कभी गुंचा कभी शोला कभी शबनम की तरह
लोग मिलते हैं बदलते हुए मौसम की तरह

मेरे महबूब मेरे प्यार को इलज़ाम न दे
हिज्र में ईद मनाई है मुहर्रम की तरह

मैंने खुशबू की तरह तुझको किया है महसूस
दिल ने छेड़ा है तेरी याद को शबनम की तरह

कैसे हमदर्द हो तुम कैसी मसीहाई है
दिल पे नश्तर भी लगाते हो तो मरहम की तरह

– राना सहरी

 

राम नाथ कोविन्द (भारत के वर्तमान राष्ट्रपति)- हिंदी निबंध

ramnath kovind

राम नाथ कोविन्द का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के एक छोटे से गाँव परौंख में हुआ था। कोविन्द का सम्बन्ध कोरी या कोली जाति से है जो उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति के अंतर्गत आती है। रामनाथ कोविंद 20 जुलाई 2017 को भारत के 14वे राष्ट्रपति चुने गए.

वकालत की उपाधि लेने के बड़ा उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय में वकालत प्रारम्भ की। 1977 से 1979 तक कोविंद दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र सरकार के वकील रहे। 8 अगस्त 2015 को उनकी नियुक्ति बिहार के राज्यपाल के पद पर नियुक्ति हुई। उन्होनें संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा भी तीसरे प्रयास में ही पास कर ली थी.

श्री रामनाथ कोविंद वर्ष 1991 में भाजपा में शामिल हुए तथा वर्ष 1994 तथा वर्ष 2000 में उत्तर प्रदेश राज्य से राज्य सभा के निर्वाचित हुए। इस प्रकार कोविन्द लगातार 12 वर्ष तक राज्य सभा के सदस्य रहे। वह भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी रहे। श्री कोविन्द का नाम भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने 19 जून 2017 को एनडीए के सर्वसम्मत राष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में घोषित किया। 20 जुलाई 2017 को विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार को हरा कर भारत के राष्ट्रपति बने

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बकरीद/ईद-उल-जुहा (बकरीद) का त्यौहार- हिंदी निबंध

बकरीद मुस्लमानो का प्रसिद्ध त्यौहार है. इसे ईद-उल-जोहा के नाम से भी जानते है. यह बलिदान का भी पर्व है. यह हर साल जुल हिज्जा के दसवे दिन मनाया जाता है.

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बकरीद की तैयारी त्यौहार के कई दिनों पहले से आरम्भ हो जाता है. परिवार के सभी सदस्य के लिए नये कपड़ें ख़रीदे जाते हैं. इस त्यौहार में बकरे की बलि देने का परिधान है. इसलिए बकरे ख़रीदे जाते है. बकरे की क़ुरबानी देने के बाद उसके गोस्त को तीन भागो में बाँट दिया जाता है. इसका एक भाग गरीबों के लिए, दूसरा भाग सम्बन्धियों ,तीसरा भाग परिवार के लिए रखा जाता है.

ऐसा माना जाता है,कि पैगम्बर हजरत इब्राहीम को ईश्वर की ओर से हुक्म आया कि वह अपनी सबसे प्यारी वस्तु की क़ुरबानी दे और हजरत के लिए सबसे प्यारा उनका बेटा था.

ईश्वर का हुक्म उनके लिए पत्थर का लकीर था. कुर्बानी से पहले उन्होंने इस विषय पर बेटे से बाँट की. बेटे ने पिता के फैसले को सही बताया और हस्ते-हस्ते क़ुरबानी के लिए तैयार हो गया. पिता और बेटे की भक्ति देखकर ईश्वर प्रसन्न हो गए और उन्होंने हजरत के बेटे की वजह एक जानवर को क़ुरबानी के लिए भेज दिया, और उसी दिन से इसे क़ुरबानी या बकरीद के पर्व के रूप में मनाया जाने लगा.

बारिश – देवेंद्र आर्य की भीगी हुई कविता

बारिश

ढंक दो
पानी भींग रहा है बारिश में
ठंड न लग जाए ।

देवेंद्र आर्य की एक भीगी हुई कविता बरस रहे हैं पेड़ हज़ारों पत्तों से
भींग रही है हवा झमाझम खोले केश
छींक न आए ।

निर्वसन नदी तट से दुबकी दुबकी लगती
बादल अपनी ओट में लेके चूम रहा है बांह कसे ।

चोट सह रही हैं पंखुरियां
पड़ पड़ पड़ पड़ बूंदों की
अमजद खां के स्वर महीन संतूरों पर
जाकिर के तबलों की थापें
बारिश है ले रही अलापें बीच बीच में भीमसेन सी

गंध बेचारी भींग न जाए इस बारिश में ।

बहुत दिनों के बाद खेलतीं बैट-बाल
गलियां सड़कों पर उतर आई हैं
तड़ तड़ तड़ तड़ बज उठती बूंदों की ताली

बिजली चमकी
या चमका है सचिन का बल्ला
या गिर गया सरक के पल्ला स्वर्ण कलश से
बोल रही है देह निबोली भीगी भीगी
सिहर उठे मौसम के सपने

ढंक दो ,
यह काला चमकीलापन शब्दों का
खुरच न जाए इस बारिश में ।

* देवेंद्र आर्य

 

जीवन को वरदान बना दो – आशीष श्रीवास्तव की कविता

।।जीवन को वरदान बना दो।।

CEREBRAL PALSI AFFECTED CHILDमस्तिष्क पक्षाघात से जूझ रहा हूँ
छोटा-सा सवाल पूछ रहा हूं ?

क्यों नहीं हो सकता मुझपे खर्च
वैज्ञानिक क्यों नहीं करते रिसर्च।

रोबोट में तो डाल रहे संवेदना
समझ नहीं रहा कोई मेरी वेदना।

क्यों रहूं मैं किसी पर निर्भर
मैं भी होना चाहता हूं आत्मनिर्भर।

अंतरिक्ष के रहस्य जानना चाहता हूं
मैं भी इंसान होना चाहता हूं ।

कई रोगों का तो मिटा दिया धब्बा
मैं थामे हूं अब भी दवाईयों का डब्बा।

क्या कमाल नहीं, तुमने दिखला दिए
आविष्कारों से उजियारे ला दिए।

देखना बुझे न विश्वास के दीये
मैं भी खुशियां के जलाऊं दीये।

अरे क्यों आपस में लड़ते हो
किससे होड़कर जलते हो।

लड़ना ही है तो निःशक्तता से लड़ो
सच्चे इंसान बन आगे बढ़ो।

बस एक ही सवाल मुझे है सालता
कब दूर होगी दुनिया से विकलांगता।

जीवन को वरदान बना दो
मुझको भी हंसना सिखा दो।

हे महान वैज्ञानिक! तुम सुन लो मेरी बात
इस धरा से समाप्त कर दो मस्तिष्क पक्षाघात

उचित इलाज के अभाव में हो न किसी पे आघात
इस दुनिया से दूर भगा दो मस्तिष्क पक्षाघात

मस्तिष्क पक्षाघात यानी सेरेब्रल पाल्सी : ऐसे बच्चे जो जन्म के समय नहीं रोते या जिन्हें पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, वे बहुविकलांगता का शिकार होकर बाकी की जिंदगी रेंगते हुए अथवा दूसरे के सहारे जीने को विवश होते हैं। इन बच्चों की आयु कम होती है, लेकिन इनकी संख्या कहीं अधिक है।

– आशीष श्रीवास्तव
पटकथा लेखक, मध्यप्रदेश

आतंकवाद पर निबंध

भारत की एकता और अखंडता के लिए आतंकवाद एक बड़ा खतरा बन गया है। आतंक के मास्टरमाइंडों ने भारत को अस्थिर करने के उद्देश्य से भय के माहौल को बनाकर अपने उद्देश्यों को प्राप्त करना चाहते है। भारत में आतंकवादी गतिविधियों से प्रभावित प्रमुख क्षेत्रों में जम्मू कश्मीर, पूर्व-मध्य और दक्षिण-मध्य भारत (नक्सलवाद) और सात बहनों (उत्तर-पूर्व) शामिल हैं।

आतंकवाद के पीछे कारण

बेरोजगारी प्रमुख कारणों में से एक रही है| जिसके कारण आतंकवादी समूह युवा पीढ़ी को आसानी से पैसा बनाने के लिए आकर्षित करते हैं। बदले में, युवाओं को घृणा फैलाना और सड़क पर खूनी और हत्याओं में संगलन होना पड़ता है। गरीब सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से जुड़े गरीबी से पीड़ित युवा लोग आईएसआई का अंतिम लक्ष्य हैं. क्योंकि वे आसानी से पैसे कमाने के लिए बोली लगाते हैं।

आतंकवाद की कहानी पर निबंध

ए वाइड नेटवर्क: भारत को पहले से ही दुनिया के शीर्ष दस आतंकवाद प्रभावित देशों में स्थान दिया गया है। जम्मू और कश्मीर, पंजाब, त्रिपुरा, असम, नागालैंड और मणिपुर जैसे कट्टरपंथी आतंक प्रभावित राज्यों के अलावा, ऐसे अन्य राज्य हैं जो नक्सली आतंकवाद का शिकार हैं| जो पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी गांव से भूमिहीन व्यक्तियों द्वारा आंदोलन के माध्यम से उभरा है। यह आंदोलन जल्द ही पूरे देश में फैल गया। वर्तमान में, देश में विभिन्न आतंकवादी संगठनों को गुप्त रूप से संचालित किया जाता है, जिनके सदस्यों को पहचानना मुश्किल है। अधिकारियों ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद संगठनों के साथ अपने संबंध स्थापित किए हैं| जिनमें से ज्यादातर देश को अस्थिर करने के लिए विभिन्न देशों में हथियारों और गोला-बारूद की आपूर्ति के लिए वैश्विक स्तर पर संचालित किए जा रहे हैं।

निष्कर्ष:

गरीबी और बेरोजगारी भारत में आतंकवाद की वृद्धि को बढ़ावा देने के प्रमुख कारणों में से एक है। यदि हम आतंकवाद को रोकना चाहते हैं| तो हमें उस कारणों को संबोधित करने की जरूरत है, जो देश के विभिन्न हिस्सों में युवाओं के कट्टरता को जन्म देते हैं।

महाराणा प्रताप एक महान योद्धा

महाराणा प्रताप मेवाड़ की राजपूत सम्मलेन के एक हिंदू महाराजा थे। जो अब राजस्थान के वर्तमान राज्य में है| मुगल सम्राट अकबर के प्रयासों का सफलतापूर्वक विरोध करने के लिए प्रसिद्ध, अपने क्षेत्र पर विजय प्राप्त करने के लिए, उन्हें राजस्थान में नायक के रूप में सम्मानित किया गया है।

उनके पिता, राणा उदई सिंह को एक कमजोर शासक माना जाता है| लेकिन इसके विपरीत महाराणा प्रताप को एक साहसी और बहादुर योद्धा के रूप में सम्मानित किया गया है| जिन्होंने मुगल आक्रमण को समर्पण करने से इंकार कर दिया और अंततः जब तक अपनी भूमि और लोगों का बचाव नहीं किया आराम से नहीं बैठे। राणा ने बचपन से ही अपनी कौशलता दिखाना आरम्भ कर दिया था। प्रताप के कई भाई- शक्तिसिंह, जगमल और सागर सिंह ने मुगल सम्राट अकबर की सेवा की| प्रताप ने खुद को मुगलों के दबावों का विरोध करने के लिए तैयार किया और उन्हें स्वीकार करने के लिए मना कर दिया।

अकबर ने प्रताप को अपने साथ गठबंधन के लिए बातचीत करने की उम्मीद में छह राजनयिक मिशन भेजे| लेकिन प्रताप ने मुगल की मांगों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। राजपूतों और मुगलों के बीच युद्ध अनिवार्य बन गया। भले ही मुगल सेना राजपूत सेना से बहुत अधिक थी| महाराणा प्रताप अंत तक बहादुरी से लड़े। उनके जन्मदिवस (महाराणा प्रताप जयंती) को ज्येष्ठ शुक्ल चरण के तीसरे दिन हर साल एक पूर्ण त्यौहार के रूप में मनाया जाता है।

महाराणा प्रताप से जुडी कुछ बातें

निजी जीवन और विरासत
महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को कुंभलगढ़ किला, राजस्थान में, उदय सिंह द्वितीय और महारानी जयवंता बाई के सबसे बड़े पुत्र के रूप में हुआ था। उनके पिता मेवाड़ के राज्य का शासक थे| उनकी राजधानी चित्तौड़ में थी। शासक के सबसे बड़े बेटे के रूप में, प्रताप को क्राउन प्रिंस का खिताब दिया गया था। 1567 में, चित्तौर सम्राट अकबर की मुगल सेनाओं से घिरा हुआ था। मुगलों को मुँहतोड़ जवाब देने के बजाय, महाराणा उदय सिंह ने राजधानी छोड़ने और अपने परिवार को गोगुंडा को स्थानांतरित करने का फैसला किया।

प्रिंस प्रताप वही रहकर लड़ाई करना चाहता था| लेकिन परिवार के बुजुर्गों ने उन्हें आश्वस्त किया कि चित्तोर को छोड़ना सबसे अच्छा विचार था। उदय सिंह और उनके सहयोगियों ने गोगुंडा में मेवार के राज्य की एक अस्थायी सरकार की स्थापना की।

परिग्रहण और शासन
उदय सिंह का 1572 में निधन हो गया और राजकुमार प्रताप सिसौदिया राजपूतों की तर्ज पर मेवाड़ के 54 वें शासक महाराणा प्रताप के रूप में सिंहासन पर विराजमान हुए। उनके भाई जगमल सिंह को अपने आखिरी दिनों में अपने पिता द्वारा क्राउन प्रिन्स के रूप में नामित किया गया था। लेकिन जब से जगमल कमजोर, अक्षम और पीने की आदत में पद गए| शाही अदालत के वरिष्ठ लोगों ने प्रताप को अपना राजा माना।

जगमल ने बदला लेने की कसम खाई और अजमेर छोड़कर अकबर की सेना में शामिल हो गए| उनकी मदद के बदले जागीर ने जाहजपुर का शहर प्राप्त किया। राजपूतों ने चित्तोर छोड़ने के बाद मुगलों ने शहर को नियंत्रण ले लिया था। हालांकि, वे मेवाड़ के राज्य को संलग्न करने में असमर्थ थे। अकबर पूरे हिंदुस्तान पर अपना शासन करना चाहता था और कई दूतों को गठबंधन के लिए बातचीत करने के लिए प्रताप के पास भेजे।

महाराणा प्रताप एक महान योद्धा

अकबर ने नाराज होकर भेजी बड़ी सेना

अकेले 1573 में, अकबर ने मेवाड़ को छह राजनयिक मिशन भेजे| लेकिन महाराणा प्रताप ने उनमें से हर एक को ठुकरा दिया। इन अंतिम अभियानों में आखिरकार अकबर के भाई असफ खान और राजा मान सिंह की अगुआई थी। शांति संधि के लिए बातचीत करने के प्रयासों में असफलता ने अकबर को नाराज किया जिससे मेवाड़ पर अपना दावा करने के लिए युद्ध का सहारा लिया था।

अकबर ने 1576 में महाराणा प्रताप के खिलाफ एक शक्ति का नेतृत्व करने के लिए मान सिंह और असफ खान को नियुक्त किया। मुगल सेना में 80,000 लोगों की संख्या थी जबकि राजपूत सेना के 20,000 सैनिक थे| ग्वालियर के राम शाह तंवर और उनके तीन बेटे रावत कृष्णदास चुन्दवत, मान सिंहजी झला और मारवाड़ के चंद्रसेनजी राठौड़ उनके साथ थे| हल्दीघाट की लड़ाई बहुत ही भयंकर हुई| जिसके बाद कुछ मेवाड़ को छोड़कर कुछ अरावली मुगल हाथों में चला गया। मुगल, प्रताप को मारने या कब्जा करने में असमर्थ थे| जिन्होंने राज्य को पुनः प्राप्त करने के प्रयासों में कभी भी कमी नहीं की थी।

1576 जुलाई में, प्रताप ने मुगलों से गोगुंडा को पुनः प्राप्त कर लिया और कुंभलगढ़ को अपनी अस्थायी राजधानी बनाया। लेकिन फिर अकबर ने प्रताप के खिलाफ अभियान चलाया और गुगुंडा, उदयपुर और कुम्भलगढ़ पर कब्जा कर लिया| जिससे महाराणा दक्षिणी मेवाड़ के पहाड़ी इलाकों में पीछे हट गए। कभी हार न मानने वाले महाराणा प्रताप अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपने मकसद में स्थिर बने रहे और कुछ वर्षों के भीतर उन्होंने कुंभलगढ़ और चित्तौड़ के आसपास के क्षेत्रों सहित कई अपने खोए हुए क्षेत्रों को पुनः प्राप्त किया। आखिरकार उन्होंने गोगुंडा, कुम्भलगढ़, रणथंभौर और उदयपुर को भी हासिल किया।

महाराणा प्रताप की मेजर लड़ाई

1576 में, महाराणा प्रताप ने मुगल सेनाओं के खिलाफ हल्दीघाटी की भयंकर लड़ाई लड़ी। भले ही उनकी सेना मुगलों के मुकाबले बहुत कम थी| राजपूतों ने बहादुरी से लड़ाई लड़ी। महाराज के पसंदीदा घोड़े चेतक की हानि सहित राजपूत सेनाओं को भारी क्षतियों का सामना करना पड़ा| लेकिन मुगल खुद महाराणा को मारने या कब्जा करने में सक्षम नहीं थे।

महाराणा का निजी जीवन और विरासत

महाराणा प्रताप की 11 पत्नियां थीं| उनमें से उनकी पहली और पसंदीदा पत्नी महारानी अजबदे पंवार थी| उनके पास 17 पुत्र और पांच बेटियां थीं।
उन्हें एक शिकार दुर्घटना में चोट लगी और 57 वर्ष की उम्र में 29 जनवरी 1597 को उनका निधन हो गया। उसकी मृत्यु के बाद उनके पुत्र अमर सिंह राजा बने। अपने मौत के बिस्तर पर, प्रताप ने अपने बेटे से कहा कि कभी भी मुगलों के पास नहीं जाना और चित्तोड़ को वापस जीतने का प्रयास करना। लेकिन अमर सिंह ने अंततः 1614 में अकबर के पुत्र सम्राट जहांगीर को समर्पण किया।