मंदसौर में किसानों पर गोलियां चलवाना पड़ा महंगा- भाजपा की करारी हार

मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में किसान आंदोलन के बाद हुए नगर निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को करारा झटका लगा है. दो नगर परिषद के तीन वार्डों में भाजपा को करारी शिकस्त मिली है. तीनों जगहों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की है.

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मंदसौर जिले की शामगढ़ नगर पंचायत में दो वार्डों और गरोठ पंचायत में एक वार्ड के उपचुनाव के लिए 11 अगस्त को मतदान हुआ था. पांच दिन बाद हुई मतगणना में भाजपा को बुरी तरह शिकस्त का सामना करना पड़ा है.

शामगढ़ नगर पंचायत के दो वार्डों के चुनाव में कांग्रेस के गोपाल पटेल और निलेश संघवी ने जीत हासिल की. वहीं गरोठ के वार्ड नंबर 9 के उपचुनाव में भी कांग्रेस की संगीता चंदेल ने भाजपा उम्मीदवार को शिकस्त दी.

शामगढ़ और गरोठ दोनों जगहों पर भाजपा की परिषद होने के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवारों की जीत को किसान आंदोलन से जोड़कर देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि किसान आंदोलन के दौरान सरकार और भाजपा के खिलाफ नाराजगी के चलते भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है.

हालांकि, भाजपा प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि छोटे से चुनाव को किसान आंदोलन से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. वहीं, कांग्रेस के नेता इस जीत से बेहद उत्साहित दिखे.

5 अहम् बिंदु जो साबित करते हैं कि योगी सरकार ने डॉ. कफील को बलि का बकरा बना दिया

उत्तरप्रदेश के गोरखपुर में इंसेफेलाइटिस से अचानक हुई 66 से अधिक बच्चों की मौत ने देश भर को दहला दिया. पूरे देश से एक स्वर में दोषियों को पकड़ने की मांग हुई परन्तु योगी आदित्यनाथ की सरकार ने बच्चों को बचाने वाले डॉक्टर कफील अहमद खान पर ही एक्शन ले लिया. सोशल मीडिया पर तरह तरह के आरोपों का दौर शुरू हो गया.

परन्तु यह कोई नहीं जानता कि इन आरोपों में कितना दम है. आइये जानते हैं कि उत्तरप्रदेश की सरकार ने क्या सचमुच दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की है या फिर एक नए विवाद को जन्म दे कर मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाया है.

सोशल मीडिया पर उत्तरप्रदेश सरकार के समर्थकों ने कमोबेश एक जैसे ही आरोप डॉक्टर कफील पर लगाए हैं. जिनकी पड़ताल हिन्दीवार्ता ने विस्तृत रूप से की.

1. प्राइवेट क्लिनिक चलाते हैं

खान पर आरोप है कि वो अपना प्राइवेट क्लिनिक चलाते हैं, ये आरोप हास्यपद इसलिए हैं क्यों कि देश का कानून उन्हें इस बात कि इजाजत देता है.

अगस्त 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सरकारी डॉक्टर द्वारा अपना प्राइवेट क्लिनिक चलना कोई अपराध नहीं. भारत का लगभग हर सरकारी डॉक्टर अपना प्राइवेट क्लिनिक चलाता है.

हालाँकि एक बात गौर करने वाली है कि कुछ ही दिनों पहले डॉक्टर कफील ने शपथपत्र दायर किया था जिसमें साफ़ साफ़ लिखा था कि वह उत्तरप्रदेश सरकार के अधीन कार्य करते समय प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं करेंगे.

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अब यह देखना महत्वपूर्ण है कि क्या उन्होंने इसका उल्लंघन किया? यदि हाँ तो यह एक दोष है परन्तु बच्चों की मौत का इससे क्या वास्ता?

यहां सबसे बड़ी बात ये है कि डॉक्टर कफील के क्लिनिक चलाने की वजह से बच्चों की मौतें नहीं हुई. हादसे के समय डॉक्टर कफील वहाँ मौजूद थे और मरीजों की देखभाल कर रहे थे और इसके पर्याप्त सबूत भी हैं.

2. रेप के आरोपी हैं

एक आरोप यह भी लगाया जा रहा है कि डॉक्टर कफील पर रेप के आरोप हैं. हालाँकि इन सभी आरोपों को कोर्ट ने निराधार बता कर बंद कर दिया था परन्तु किसी व्यक्ति के जीवन की घटनाओं को इस दुर्घटना से जोड़कर देखना बेवकूफी नहीं तो और क्या है?

3. ऑक्सीजन सिलिंडर की चोरी किया करते थे

डॉक्टर खान पर यह भी आरोप है कि वह पूर्व में BRD अस्पताल से ऑक्सीजन की चोरी किया करते थे. यदि ऐसा है तो आखिर आजतक उनपर कोई केस दर्ज क्यों नहीं हुआ. और सबसे अहत्वपूर्ण बात ये है कि आखिर वो अस्पताल के बड़े ऑक्सीजन टैंक से ऑक्सीजन चुराते कैसे थे?

क्या वो लिक्विड ऑक्सीजन को बोतल में भर के घर ले जाते थे ?

क्यूंकि अस्पताल के जंबो सिलिंडर को उठाने के लिए तो ट्रक की आवशयकता पड़ती और ये काम चोरी छुपे तो किया नहीं जा सकता है.

4. खुद को मीडिया के सामने प्रमोट किया

योगी समर्थकों के अनुसार डॉक्टर कफील ने खुद को मीडिया के सामने पेश किया और बिना कोई काम किये मीडिया में खुद को मसीहा की तरह पेश किया.

परन्तु गोरखपुर के BRD अस्पताल के लोगों से बात करने पर साफ़ पता चलता है कि जब हॉस्पिटल में आधी रात को हाहाकार मचा तब डॉक्टर कफील सीधा वहां पहुंचे और मदद करने में आगे रहे. रात के 3 बजे जब मीडिया अस्पताल पहुंची तब भी कफील वहां पाए गए.

सीमा सुरक्षा बल ने भी इसपर पर्दाफाश किया है. SSB के डग के अनुसार त्रासदी के दिन डॉक्टर कफील उनके पास आये और उनसे ट्रकों की मांग की ताकि ऑक्सीजन सिलेंडरों को अस्पताल तक पहुँचाया जा सके. 10 अगस्त की रात को SSB के DIG ने ट्रक के साथ 11 जवान भी भेजे. यह सब डॉक्टर कफील के कहने पर हुआ.

कफील के प्रयासों से ही 3 जंबो सिलेंडरों की व्यवस्था हो सकी वरना मरने वालों की संख्या अधिक होती.

5. जानकारी रहने के बावजूद ऑक्सीजन वेंडर को पेमेंट नहीं किया

कुछ आरोप यह भी लग रहे हैं कि डॉक्टर कफील परचेज कमिटी के भी सदस्य थे और उन्होंने ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी के बकाया राशि की जानकारी सरकार को नहीं दी जिससे ऑक्सीजन की सप्लाई बंद हो गयी.

परन्तु योगी जी और उत्तरप्रदेश के स्वस्थ्य मंत्री बार बार यह कह रहे हैं कि अस्पताल में मौतें ऑक्सीजन की सप्लाई रुकने से नहीं हुई. तो फिर कफील के सप्लाई रोकने वाली बात का क्या औचित्य है?

परन्तु एक और बात सामने आयी है कि ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली पुष्पा सेल्स ने बकाया राशि के भुगतान के लिए बार बार पत्र लिखा है और ये पत्र उत्तरप्रदेश सरकार के बाल विकास मंत्री को भी लिखा गया है.

योगी सरकार के मंत्री को लिखा गया पत्र
योगी सरकार के मंत्री को लिखा गया पत्र

हर पत्र की एक कॉपी गोरखपुर के जिलाधिकारी को भी भेजी गयी थी. इतना सब होने के बावजूद योगी सरकार इस बात से अनजान कैसे थी?

सबसे बड़ा खुलासा तो 30 जुलाई को शहर के अखबार हिन्दुस्तान ने साफ साफ़ यह चेतावनी दी थी कि BRD अस्पताल की ऑक्सीजन की सप्लाई बंद की जा सकती है.

News About Oxygen stock
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इन सब के बावजूद योगी सरकार के मंत्री या प्रदेश के अधिकारीयों ने कोई एक्शन नहीं लिया और जिम्मेदार कफील खान को ठहरा दिया गया?

 

 

राष्‍ट्रपति कोविंद – ‘न्यू इंडिया’ में गरीबी के लिए कोई गुंजाइश नहीं है

दिल्ली: देश के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 71वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देश को संबोधित किया. राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद का राष्ट्र के नाम यह पहला संबोधन था. अपने संबोधन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आजादी के इतिहास के संघर्ष को याद करते हुए ‘न्यू इंडिया’ के विजन को देश के नागरिकों के सामने रखा. राष्ट्रपति ने कहा कि 2022 में हमारा देश अपनी आजादी के 75 साल पूरे करेगा, तब तक ‘न्यू इंडिया’ के लिए के लक्ष्यों को प्राप्त करने का हमारा ‘राष्ट्रीय संकल्प’ है.

president kovind no place for poverty in new india राष्ट्रपति के भाषण के मुख्य अंश :

– देश को ‘खुले में शौच से मुक्त’ कराना – हममें से हर एक की जिम्मेदारी है.
– रोजमर्रा की जिंदगी में भ्रष्टाचार समाप्त करना हम सभी की जिम्मेदारी है.
– जीएसटी को अपने हर काम-काज और लेन-देन में शामिल करना तथा टैक्स देने में गर्व महसूस करने की भावना को प्रसारित करना हम सभी की जिम्मेदारी है.
– न्यू इंडिया’ का मतलब हर परिवार के लिए घर, मांग के मुताबिक बिजली, बेहतर सड़कें और संचार के माध्यम, आधुनिक रेल नेटवर्क, तेज और सतत विकास.
– ‘न्यू इंडिया’ एक ऐसा समाज हो जो भविष्य की ओर तेजी से बढ़ने के साथ-साथ, संवेदनशील भी हो
– ‘न्यू इंडिया’ का मतलब है कि हम जहां पर खड़े हैं वहां से आगे जाएं. तभी हम ऐसे ‘न्यू इंडिया’ का निर्माण कर पाएंगे जिस पर हम सब गर्व कर सकें.
– इस ‘न्यू इंडिया’ में हर व्यक्ति की पूरी क्षमता उजागर हो सके और वह समाज और राष्ट्र के लिए अपना योगदान कर सके. ‘न्यू इंडिया’ में गरीबी के लिए कोई गुंजाइश नहीं है.
– नोटबंदी के बाद से देश में ईमानदारी की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिला है. ईमानदारी की भावना दिन-प्रतिदिन और मजबूत हो, इसके लिए हमें लगातार प्रयास करते रहना होगा.
– मैं सब्सिडी का त्याग करने वाले ऐसे परिवारों को नमन करता हूं. हमें ऐसे परिवारों से प्रेरणा लेनी चाहिए.

जेडीयू में फूट – खुल कर सामने आ गए हैं शरद यादव और नीतीश कुमार

पटना: आखिर जिस घटनाक्रम का बेताबी से इंतज़ार था वह घट ही गया. हम बात कर रहे हैं जेडीयू में फूट की. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एनडीए का दामन थमने और शरद यादव के नाराज हो जाने के बाद जेडीयू में फूट पड़ना लाजिमी था और राजनीतिक गलियारों में इस खबर की प्रतीक्षा की जा रही थी कि कब ऐसा होगा.

sharad yadav nitish kumar rift jduशरद यादव द्वारा गैर-राजनीतिक मंच के बैनर तले बिहार यात्रा के बाद तो कयास लगाए जा रहे थे कि जेडीयू के एक रहने की पचि-खुची संभावनाएं भी समाप्त हो चुकी हैं. ऐसा ही हुआ. बिहार जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने 21 नेताओं को कथित तौर पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए पार्टी से निकाल दिया। ऐसा होने की देर थी कि विरोधी खेमे (नीतीश कुमार खेमा) ने वशिष्ठ नारायण सिंह को ही पार्टी बाहर का रास्ता दिखा दिया। वशिष्ठ के अलावा पूर्व मंत्री रमई राम और पूर्व सांसद अर्जुन राय जैसे बड़े नाम भी पार्टी से निकाले गए नेताओं में शामिल हैं।

जेडीयू में शरद यादव का गुट लगातार बगावती तेवर अपनाये हुए है। शरद यादव का दावा है कि कई राज्य इकाइयां उनके साथ हैं जबकि पार्टी अध्यक्ष नीतीश कुमार को केवल बिहार इकाई का समर्थन हासिल है। यादव के करीबी सहयोगी अरुण श्रीवास्तव ने कहा कि पूर्व पार्टी अध्यक्ष शरद यादव के धड़े को 14 राज्य इकाइयों के अध्यक्षों का समर्थन प्राप्त है। शरद के धड़े में 2 राज्यसभा सांसद और पार्टी के कुछ राष्ट्रीय पदाधिकारी भी शामिल हैं। आप को बता दें कि नीतीश कुमार ने हाल ही में शरद यादव को जेडीयू महासचिव और राज्यसभा में संसदीय दल के नेता पद से हटा दिया था।

नीतीश कुमार के एनडीए के साथ जाने के फैसले का खुला विरोध करने वाले सासंद अली अनवर अंसारी को भी पार्टी से बाहर निकाल दिया गया है। इस फैसले से खुलेआम नाराजगी जाहिर करने वाले शरद यादव और नीतीश कुमार अब आमने-सामने की लड़ाई की तैयारी में नजर आ रहे हैं। नीतीश कुमार ने शरद यादव के संबंध में कहा था कि पार्टी अपना फैसला ले चुकी है, वह किसी भी कदम को उठाने के लिए स्वतंत्र हैं। वहीं, शरद यादव ने भी नीतीश पर टिप्पणी की थी कि जेडीयू सिर्फ नीतीश कुमार की पार्टी नहीं है, यह मेरी भी पार्टी है।

नीतीश से मुलाक़ात के बाद तेजस्वी दिखे असहज

शाम को तेजस्वी पहुंचेंगे दिल्ली

पटना : बिहार कैबिनेट की बैठक के बाद बंद कमरे में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तेजस्वी यादव से मुलाकात की. मुलाक़ात के बाद बाहर आने के बाद असहज दिखाई दिए. जदयू के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि मामला इतनी जल्दी शांत होने वाला नहीं है. तेजस्वी को सबूत के साथ सफाई देनी ही होगी. जानकारी के मुताबिक तेजस्वी यादव बुधवार शाम की फ्लाइट से दिल्ली जायेंगे. सूत्रों की मानें तो इस दिल्ली दौरे को विभागीय मीटिंग बताया जा रहा है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि तेजस्वी यादव सीबीआई की ओर से दर्ज प्राथमिकी के मामले में दिल्ली के वरिष्ठ वकीलों से सलाह-मशविरा करेंगे.
लालू का अड़ियल रूख नहीं चलेगा
तेजस्वी यादव ने कल शाम कैबिनेट की बैठक में भाग लिया. उसके बाद वह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी के साथ सीएम के कमरे में गये. उसके चालीस मिनट बाद जब वह कमरे से निकले तो उनके हाव-भाव में काफी बदलाव दिख रहा था. वहीं पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने फोन पर बातचीत में बताया कि लालू का अड़ियल रूख नहीं चलेगा. उन्होंने तेजस्वी को सिखाया कि जाकर नीतीश से मिलें.
ये कैसी सकारात्मक राजनीति है:सुशील मोदी
बीजेपी नेता सुशील मोदी ने ट्वीट कर जदयू पर हमला बोला और कहा कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात कर जदयू ने करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति के मामले में तेजस्वी यादव से बिंदुवार और तथ्यात्मक जवाब पाने के लिए ताबड़तोड़ बयान दिये. अब कहा जा रहा है कि ना मुख्यमंत्री ने तेजस्वी यादव से इस्तीफा मांगा और ना इसके लिए समय-सीमा तय की. जिस पार्टी ने लाठी में तेल पिलावन रैली की, नोटबंदी का विरोध किया, दलित समुदाय के रामनाथ कोविंद के राष्ट्रपति बनने की राह में रोड़े अटकाने की कोशिश की और जिसके मंत्रियों ने हमेशा केंद्र सरकार से टकराव का रुख अपनाया, उसके नेता सकारात्मक राजनीति की बात कर रहे हैं.

PoK के ओसामा को सुषमा स्वराज ने दिया ट्यूमर के इलाज के लिए वीजा, पाक अड़ा रहा था अड़ंगे

नई दिल्ली: भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ओसामा अली नमक पाकिस्तानी युवक को लिवर में ट्यूमर के इलाज के लिए बिना वीजा के ही भारत आने की अनुमति देने का एलान किया है. श्रीमती सुषमा स्वराज ने कहा की यह मानवता का मामला है और इसे राजनीतिक और कूटनीतिक मामलों से हैट कर देखा जाना चाहिए. यही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि इसके लिए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शरीफ के सलाहकार सरताज अजीज के अनुशंसा पत्र की कोई आवश्यकता नहीं है। पाक अधिकृत कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताते हुए सुषमा ने कहा कि पकिस्तान ने वहां गैरकानूनी तरीके से कब्जा किया हुआ है।

Sushma Swaraj visa to POK osama ali treatment in indiaआपको बता दें कि बीमार युवक ओसामा अली पाक-अधिकृत कश्मीर (पोक) का रहने वाला है और वह अपने इलाज के लिए भारत आना चाहता है. आरोप है कि पाक-अधिकृत कश्मीर के युवक को भारत में इलाज से पकिस्तान की निगेटिव पब्लिसिटी होती और इसका कश्मीर में भारत के पक्ष में सन्देश जायेगा इसलिए पकिस्तान इस युवक को भारत में इलाज की अनुमति नहीं दे रहा था.

भारत-पकिस्तान के बीच तय प्रक्रिया के तहत सरताज अजीज को इस्लामाबाद में भारतीय हाई कमीशन को लेटर लिखकर देना था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इस के चलते ओसामा को वीजा नहीं मिल पा रहा था। सुषमा स्वराज ने मानवीय आधार पर सरताज अजीज के पत्र के बिना ही ओसामा को वीजा देने का फैसला करके न केवल अपनी सदाशयता का प्रदर्शन किया है बल्कि पकिस्तान को एक कुटनीतिक मात भी दी है.

इससे पहले भी सुषमा स्वराज बीमार पाकिस्तानी और अन्य विदेशी नागरिकों के मामले में दयालु रुख दिखाती रहीं हैं. कुछ दिन पहले सुषमा ने पाकिस्तान की कैंसर पीड़ित युवती फैजा तनवीर के मेडिकल वीजा मामले को लेकर पाकिस्तान को खूब खरी-खोटी सुनाई थी।

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नरेंद्र मोदी को साध्वी ने दी नसीहत- गौ आतँकियों पर भाषण देने के बजाये खुद शुरुआत क्‍यों नहीं करते?

रविवार (16 जुलाई) को पीएम मोदी ने अपने ट्विटर पर गौरक्षा और बीफ के नाम पर की गई हिंसा पर की ट्वीट किए।पीएम ने कहा कि गौरक्षा के नाम पर हिंसा करने वालों से सख्ती से निपटना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकारों के गौरक्षा के नाम पर हिंसा कर रहे लोगों के विरूद्ध एक जुट होने का आह्वान भी किया.

pm modi

पीएम के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए साध्वी खोसला ने उनसे अपील की कि वो पहले “‘ट्विटर रक्षकों” को अनफॉलो करें। साध्वी का कहना था कि दूसरों को नसीहत देने के बजाये प्रधानमंत्री खुद से शुरुआत क्यों नहीं करते

लेकिन पीएम मोदी और बीजेपी को चाहने वालों को साध्वी की सलाह नहीं पसंद आई और कुछ लोगों ने उन्हें ट्रॉल कर दिया। हालांकि कई लोगों ने उनके साहस की तारीफ भी की।

पिछले कुछ सालों में गाय और बीफ के नाम पर बढ़ी हिंसा और हत्याओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर इस मसले पर चुप्पी साधने का आरोप विपक्ष लगाता रहा है।

रविवार को किए ट्वीट में भी पीएम मोदी ने परोक्ष तौर पर गाय और बीफ के नाम पर हो रही हत्याओं की जिम्मेदारी राज्य सरकारों पर डाल दी।

आठ साल में गाय के नाम पर ह‍िंसा में मरने वाले 86 प्रतिशत मुसलमान

पीएम मोदी ने ट्वीट किया, “कानून व्यवस्था को बनाए रखना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है और जहां भी ऐसी घटनाएं हो रही हैं, राज्य सरकारों को इनसे सख्ती से निपटना चाहिए।”

लेकिन इंडिया स्पेंड के डेटा के अनुसार केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद से देश में गाय से जुड़ी हिंसा में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।

ऐसे 97 प्रतिशत मामले नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद हुए हैं। साल 2010 से 2017 के बीच हुई गाय से जुड़ी 63 घटनाओं में 57 प्रतिशत पीड़ित मुस्लिम थे। इन घटनाओं में कुल मारे गए 28 भारतीय मे से से 24 मुसलमान थे।

मनमोहन सिंह ने की हैं मोदी से ज्यादा विदेश यात्राएं -अमित शाह

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने सबको चौंकाते हुए यह कहा कि पूर्व प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने नरेंद्र मोदी से भी अधिक विदेश यात्राएं की हैं. उनके अनुसार मनमोहन सिंह चुपके से विदेश यात्राओं पर निकल जाते थे जिनके बारे में कोई नहीं जान पाता था परन्तु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर बेवजह शोर मचाया जाता है जिससे लोगों को लगता है कि उन्होंने ज्यादा समय विदेश में गुजारा है.

manmohan singh and modi

अमित शाह के मुताबिक, नरेंद्र मोदी जहां भी जाते हैं उनका भव्य स्वागत होता है और अधिक से अधिक लोग उनके सम्मान में पहुँच जाते हैं इससे लोगों को लगता है कि मोदी जी हर समय विदेश दौरे पर रहते हैं जो कि गलत है.

पर क्या है सच्चाई?

यदि आधिकारिक आंकड़ों पर गौर करें तो अमित शाह की यह बात एक जुमला नजर आती है, विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक नरेंद्र मोदी ने पिछले 3 सालों में 56 विदेशी दौरे किये हैं और कुल 156 दिन विदेश में गुजारे हैं .

वहीँ बात यदि मनमोहन सिंह की करें तो उन्होंने ने अपने 10 साल के कुल कार्यकाल में 80 विदेश यात्राएं की थीं और कुल 305 दिन विदेश में गुजारे थे.

यदि इसका औसत निकालें तो मनमोहन सिंह ने हर साल औसतन 8 विदेश यात्राएं की हैं जबकि नरेंद्र मोदी ने सालाना 18 विदेश यात्राएं की हैं.

उसी प्रकार विदेश में दिन गुजारने की बात की जाये तो मनमोहन सिंह ने औसतन हर साल में से 30 दिन विदेश में गुजारे थे जबकि मोदी जी औसतन 44 दिन गुजारे हैं जो की मनमोहन सिंह से अधिक हैं.

 

विपक्ष की ओर से मीरा कुमार होंगी राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार

कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने अभी अभी यह घोषणा की है कि विपक्ष की ओर से मीरा कुमार राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार होंगी. मीरा कुमार लोकसभा की पूर्व स्पीकर हैं.

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विभिन्न राजनितिक दलों के 17 नेताओं की बैठक के बाद यह फैसला लिया गया. मीरा कुमार इससे पहले 2009 से 2014 तक लोकसभा की स्पीकर रह चुकी हैं. तब उनका चुनाव निर्विवाद रूप से हुआ था.

मीरा कुमार भारत की राजनयिक रह चुकी हैं तथा पेशे से वह वकील हैं. मीरा 5 बार MP रह चुकी हैं. सबसे पहले उन्होंने 1985 में उत्तरप्रदेश के बिजनौर से रामविलास पासवान और मायावती जैसे कद्द्वार नेताओं को हरा कर यह सीट जीती थी.

आपको बता दें कि भारतीय जनता पार्टी ने रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद के रूप में अपना उम्मीदवार घोषित किया है.

रिपब्लिक टीवी के रिपोर्टर पर भड़के लालू. कहा, अपने बाप से पूछो जिसने मोदी से सुपारी ली है

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव रिपब्लिक टीवी के एक पत्रकार पर बुरी तरह भड़क गए. यह वाकया दिल्ली में हुआ जब लालू यादव पत्रकारों के सामने आये तब रिपब्लिक टीवी के एक पत्रकार ने लालू यादव से बेनामी संपत्ति से जुड़े सवाल किये जिसपर लालू ने जवाब दिया कि आपके सवालों का मेरे पास कोई जवाब नहीं है.

रिपोर्टर ने पुछा हिरदय लाल चौधरी से आपका क्या संपर्क है, तो लालू ने अपने ही अंदाज में कहा कि आप आराम करिए, इसके जवाब में रिपोर्टर ने कहा कि आराम करने की हमारी नौकरी नहीं है, हमारी नौकरी सवाल पूछने की है और हम सवाल करेंगे। इस पर लालू यादव ने कहा कि आपके सवाल का कोई जवाब हमारे पास नहीं है।

तब पत्रकार ने कहा कि आप घोटाला पर घोटाला करेंगे और हम सवाल नहीं करेंगे। तब लालू यादव ने कहा कि घोटालाबाज तुमलोग हो, मोदी का सुपारी लिये हुए हो तुमलोग।