भारतीय सेना से जुड़े 7 रोचक तथ्य, जिन्हें जानकार आप भी गर्व से भर जाएंगे

दोस्तों भारत के पास दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी सेना है पर क्या आपको पता है की भारत की वायु सेना के पास देश से बाहर भी एक एयर बेस है?  आइये जानते हैं भारतीय सेना के बारे में कुछ मजेदार तथ्य:

1. लोंगेवाला की ऐतिहासिक लड़ाई

1971 longewala
 
1971 में पाकिस्तान के साथ हुई लोंगेवाला की लड़ाई में 2000 पाकिस्तानी सैनिकों के खिलाफ भारत के सिर्फ 120 जवानों ने लोहा लिया था. पूरी रात चले इस युद्ध में भारतीय सेना ने पाकिस्तान को बुरी तरह हराया था. सबसे अचिंभित करने वाली बात ये रही कि इस युद्ध में भारत के सिर्फ 2 जवान शहीद हुए. इस पूरी घटना पर बॉर्डर नाम के एक फिल्म भी बनी है.

2. जाति धर्म के नाम पर कोई भेदभाव नहीं

Indian soldiers march during the Republic Day parade in New Delhi
 
जहाँ दुसरे देशों में धर्म और जाति का ख़याल रखते हुए सेना में भर्ती की जाती है वहीँ भारत में सेना में भर्ती होने के लिए सिर्फ आपकी मेरिट और फिटनेस देखी जाती है. धर्म जाति या किसी भी तरह का रिजर्वेशन भारतीय सेना में नहीं चलता.

3. भारतीय सेना नियंत्रित करती है दुनिया का सबसे ऊँचा रणक्षेत्र

 
दुनिया का सबसे ऊँचा बैटल फील्ड सियाचिन है जहाँ तापमान शून्य से भी नीचे चला जाता है. ऐसे रणक्षेत्र को भारतीय सेना पूरी मुस्तैदी के साथ नियंत्रित करती है.

4. ऊंचाई पर लड़ाई करने में सबका उस्ताद है अपना देश

 
 india us army training
अधिक ऊंचाई तथा पहाड़ी इलाकों में लड़ाई करने में भारतीय सेना का कोई जवाब नहीं. भारतीय सेना के हाई अल्टीट्यूड वारफेयर स्कूल में पूरे विश्व से सेनाएं आती हैं और ट्रेनिंग लेती हैं. अफगानिस्तान की लड़ाई के वक़्त भारतीय सेना ने अमेरिका तथा रूस की सेना को इसी स्कूल में ट्रेनिंग दी थी.

5. ऑपरेशन राहत : दुनिया का सबसे बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन

army in operation rahat
सन 2013 में उत्तराखंड में आयी बाढ़ में लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए ऑपरेशन राहत चलाया था.जिसमें 20,000 से अधिक नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया था. हेलीकाप्टर के जरिये हुए इस ऑपरेशन में सेना ने 3,82,400 किलोग्राम की राहत सामग्री भी पहुंचाई थी. यह ऑपरेशन दुनिया भर में अब तक का सबसे बड़ा आर्मी ऑपरेशन है.

6. विदेशों में भी हैं भारतीय सेना का एयरबेस

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ताजीकिस्तान में भारतीय सेना का फारखोर एयर बेस देश के बाहर बना एक महत्वपूर्ण बेस है. ३५० करोड़ की लागत से बना यह एयरबेस हमें पाकिस्तान और चीन पर मजबूत पकड़ देता है. साथ ही साथ पूरे एशिया में भारत की पकड़ मजबूत बनाता है.

7. बैली ब्रिज- भारतीय सेना द्वारा निर्मित सबसे ऊँचा पुल

baily indian army

भारतीय सेना द्वारा बनाया गया बैली पुल दुनिया का सबसे ऊँचा पुल है. लद्दाख की घाटी में द्रास और सुरु नदी के बीच बना यह पुल सबसे ऊंचाई पर स्थित है. इसे सेना ने अगस्त 1982 में बनाया था.

तो दोस्तों, कैसे लगे आपको भारतीय सेना से जुड़े ये दिलचस्प तथ्य?

दिल्ली की 5 सबसे भूतिया जगहें, जहाँ रात में जाने पर आपकी रूह काँप जाएगी

दोस्तों दिल्ली और उसके आस पास के इलाके भूतिया जगहों से भरे पड़े हैं. कहीं से आवाज़ें आती हैं तो कहीं रात में आत्माओं को भटकते हुए देखा जाता है. आइये जानते हैं दिल्ली की पांच सबसे खौफनाक जगहें जहां जाने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पाता. 
 

5. दिल्ली कंटोनमेंट

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दिल्ली कैंट की स्थापना ब्रिटिश – इंडियन आर्मी ने की थी।  लोग कहते है की आधी रात के समय दिल्ली केंट में सफेद लिबाज पहने एक महिला लोगों से लिफ्ट मांगती नज़र आती है। बहुत से लोगो ने उसे  देखा भी है। लेकिन आज तक किसी इंसान को नुक्सान पहुचाने की कोई खबर नहीं मिली है। बुजुर्गों का कहना है कि यदि कभी कभी आपको एक महिला लिफ्ट मांगते हुए दिखे तो अपने वाहन को कभी न रोके.
 

4. म्यूटिनी हाउस 

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कश्मीरी गेट के पास म्यूटिनी हाउस का निर्माण अंग्रेजो ने 1857 में मारे गए अपने सिपाहियों की याद में बनवाया था।
रात के अँधेरे में यहाँ का माहौल बेहद डरावना हो जाता है. कहा जाता है कि सैनिकों की आत्माएं अभी भी इस भवन में भटकती हैं. कुछ लोगों का कहना है कि उन्होंने यहाँ पर आधे अधूरे शरीर के साथ घुमते हुए लोगों को देखा है.  
 

3. भूली भटियारिन का महल 

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यह महल किसी ज़माने में तुगलक वंश का शिकारगाह हुआ करता था। जिसकी देखभाल एक महिला करती थी और उसका नाम था भूली भटियारन. 
उसी महिला के नाम पर उस जमाने के लोगों ने इस महल को भूली भटियारन का महल कहना शुरू कर दिया .  अंधेरा होना के बाद यहां परिंदा भी पर नहीं मारता। आस पास रहने वाले बताते हैं कि अक्सर इस महल से अजीबोगरीब चीखें सुनाई देती हैं. 

2. खुनी नदी 

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कहा जाता है कि इस नदी का पानी आपको अपनी तरफ खींचता है. पानी में जाने वालों को यह नदी निगल लेती है इसी वजह से नदी के आसपास कोई नहीं जाता है। रोहिणी के कम शोर गुल वाले इस इलाके में यूं भी कम लोग आते हैं। कारण, नदी के किनारे लाशों का मिलना। हत्या, आत्महत्या, दुर्घटना कारण चाहे जो हो, यहां नदी किनारे लाशें मिलना आम बात हो गई है। यही कारण है कि लोग इसे खुनी नदी के नाम से जानते हैं.
 

1. जमाली कमाली की कब्रगाह 

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यहाँ एक मस्जिद भी है जो दिल्ली के महरौली में स्थित है। सूफी संत जमाली लोधी हुकूमत के राज कवि थे। इसके बाद बाबर और उनके बेटे हुमायूं के राज तक जमाली को काफी तवज्जो दी गई। मकबरे में दो संगमरमर की कब्र हैं, एक जमाली की और दूसरी कमाली की।  इस जगह के बारे में लोगों का विश्वास है कि यहां जिन्न रहते हैं। कई लोगों को यहाँ बेहद डरावने अनुभव हुए हैं। माना जाता है कि यहां रात में तेज हवाएं चलती हैं. तथा लोगों को किसी अंजनी शक्ति से थप्पड़ भी लगते हैं.

Google के बारे में रोचक जानकारी

गूगल एक अमरीकी सार्वजनिक कम्पनी है, जो अपने सर्च इंजन (Search Engine) के लिए प्रसिद्ध है । यह कम्पनी पीएचडी के दो छात्र लैरी पेज (Larry Page) और सर्गेई ब्रिन (Sergey Brin) द्वारा संस्थापित की गयी थी।गूगल के C.E.O सुंदर पिचाई है जो की एक भारतीय-अमरीकी नागरिक है ।

सन 1999 में गूगल के संस्थापको ने इससे 1 million अमेररिकी डॉलर्स में बेचने की कोशिश की थी जो लगभग 6 करोड रूपए के आसपास थी परन्तु वो बेचने में असफल रहे । इसकी कीमत अब 16.35 billion अमेररिकी डॉलर्स है,जो की लगभग 1,07,200 करोड रूपए के आसपास की है ।

GOOGLE ROCHAK JANKARI“I’m feeling lucky” बटन को क्लिक करने से गूगल सर्च के समय कोई विज्ञापन नहीं दिखाता । इस बटन की लागत 110 million अमेररिकी डॉलर्स प्रति वर्ष है, यानी लगभग 660 करोड रूपए ।

इसका नाम गलती से गूगल रखा गया । गूगल के संस्थापक इसका नाम “googol” रखना चाहते थे , जिसका मतलब होता है 1 और उसके बाद 100 शून्य (100 zeros) ।

गूगल का 99 % मुनाफा विज्ञापनों से होता है ।

गूगल ने अपना पहला एंड्राइड (android ) मोबाइल 2010 में निकाला था जिसका नाम Nexus One था ।

गूगल एप्पल कमपनी को प्रति वर्ष लगभग 1 billlion अमेररिकी डॉलर्स देता है ताकि गूगल का homepage एप्पल के safari वेब-इंजन में सबसे पहले खुले ।

गूगल के अन्य products है : गूगल मैप (google map ), गूगल अर्थ (google earth ), गूगल बुक्स (google books ), यूट्यूब (youtube ), जीमेल (gmail ), गूगल फोटोज (google photos ), गूगल ड्राइव (google drive ), गूगल प्लस (google plus )आदि ।

बाहुबली के कट्टप्पा के बारे में 6 दिलचस्प तथ्य, जो आप आज तक नहीं जानते होंगे

“कट्टप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा?

इसका जवाब पूरा देश एक साल से पूछ रहा था. और जब आप सभी को इसका जवाब मिल चूका है तो वक़्त है यह जानने का कि आखिर कट्टप्पा है कौन.

महिष्मति की सत्ता के गुलाम कट्टप्पा असल जीवन में तमिल फिल्मों का एक प्रचलित चेहरा हैं. जिन्होंने 200 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है. आइये जानते हैं ‘कट्टप्पा’ के बारे में कुछ बेहद रोचक तथ्य

बाहुबली के कट्टप्पा को आज तक आप ‘सत्यराज’ नाम से जानते आये होंगे पर उनका असल जीवन में नाम है रंगराज सुब्बैयह.

satyaraj movies

कट्टप्पा यानि रंगराज ने फ़िल्मी जीवन की शुरुआत 1978 में की थी और तबसे वह फिल्मों में खलनायक के किरदार करते आये हैं.

satyaraj

फिल्मों में रोल पाना कट्टप्पा के लिए भी इतना आसान न था, किसी फिल्म में मेन रोल मिलने से पहले 7 सालों तक उन्हें सिर्फ साइड रोल ही करने को मिले,

kattappa sathyaraj

रंगराज सुब्बैयह यानि कट्टप्पा को आपने पहले भी देखा है, अगर याद नहीं तो फिल्म चेन्नई एक्सप्रेस को याद कीजिये. जिसमें दीपिका पादुकोण के पिता का रोल रंगराज ने ही किया था.

kattappa in chennai express

आपको यह जान कर आश्चर्य होगा कि रंगराज एक नास्तिक जीवन जीते हैं. परन्तु किसी धर्म की बुराई करना उन्हें पसंद नहीं.

atheist kattappa

सत्यराज अमिताभ बच्चन से काफी प्रभावित हैं और अमिताभ जैसे कुछ बड़े और यादगार फिल्में करना चाहते हैं. शायद बाहुबली फिल्म के साथ उनकी यह इच्छा पूरी हो चुकी है.

amitabh

जलियाँवाला बाग हत्याकांड: अगर उस दिन गोलियां ख़त्म न होती तो…

भारत के पंजाब शहर अमृतसर में स्वर्ण मंदिर के पास छोटा सा बगीचा है जलियाँवाला| जलियाँवाला बाग में ये कांड हुआ था| 13 अप्रैल 1919 में बैशाखी (यह दिन सिख धर्म के लोगो के लिए पवित्र माना जाता है) वाले दिन हुआ था| इस दिन रोलेट एक्ट कानून पास किया गया था| इस कानून में ब्रिटिश सरकार को यह अधिकार मिले थे कि वह किसी भी भारतीय पर अदालत में बिना मुकदमा चलाये बिना दंड दिए| उसे जेल में बंद कर सकती है| यहाँ तक कि अपराधी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने वाले का नाम जानने का अधिकार भी समाप्त कर दिया था|

जलियाँवाला  बाग हत्याकांड: अगर उस दिन गोलियां ख़त्म न होती तो...

13 अप्रैल को सैफुद्दीन किचलू और सत्यपाल की गिरफ़्तारी के विरोध करते हुऐ सब लोग जलियाँवाला बाग में एकत्रित हुए थे| तभी वहां के कमांडर जरनल डायर ने उस भीड़ पर अंधाधुंध गोलिया चलवाई| सैनिक ने उन लोगो पर 10 मिनट तक लगातार गोलियाँ चलाई| गोलियों की आवाज सुनकर लोग यहाँ वहाँ भागने लगे, लेकिन वो वहाँ से बच निकलने की कोई जगह न पा सके क्योंकि ब्रिटिश सरकार के सैनिको ने बाग को चारो तरफ से घेर रखा था| उन की गोलियों से बचने के लिए बहुत सरे लोग कुँए में कूद गये थे| बाद में उस कुँए से उनकी लाशो को बाहर निकला गया| अब उस बाग को जलियाँवाला बाग कहा जाता है| विश्व की एकमात्र ऐसी घटना है जो कभी भूली नहीं जा सकती है

जलियाँवाला बाग को तीर्थ स्थान बना दिया गया

जलियाँवाला बाग में यह सब होने से इसे शहीद स्थल बना दिया गया है| जहाँ इसके बारे में सब लिखा है जिसका उद्घाटन दिनांक 13 अप्रैल 1961 में भारत के प्रथम राष्ट्पति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के द्वारा किया गया था| उन्होंने इसे इस तरह बनवाया था कि यहाँ आने पर लोगो को सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त हो सकें|

देश में एक ऐसा थाना जहां 23 साल में दर्ज हुए केवल 55 मुकदमे, रेप का कोई केस नहीं!

एक ओर जहाँ देश में जुर्म के आंकड़े बढ़ते जा रहे हैं. देश के कोर्ट में ऐसे कई सारे मुक़दमे पड़े हैं जिसकी सुनवाई दशकों से नहीं हुई है. कही देश के पुलिस स्टेशनों में सीनीयर ऑफिसर्स की कमी है तो कई ऐसे न्यायालय हैं जहां जजों की कमी है.

लेकिन देश में एक ऐसा भी शहर भी है जहाँ जुर्म के नाम पर होने वाली घटना ना के बराबर है. यहां पुलिस के पास साल के कई महीनों में कोई काम नहीं होता. ये कल्पना करने वाली बात है कि अगर देश के सारे राज्य और शहर ऐसे ही हो जाये तो भारत दुनिया के श्रेष्ट देशों से भी आगे होगा. क्योंकि अमेरिका हो या रूस जुर्म के मामले में कोई पीछे नहीं है.

हम यहां जिक्र कर रहे हैं राजस्थान के जैसलमेर की. जैसलमेर एक ऐसा जिला है जहाँ साल भर में होने वाले जुर्म की संख्या ना के बराबर है. यहाँ 23 साल में केवल 55 मुक़दमे दर्ज हुए हैं. अगर थाने के रिकार्ड्स की माने तो यहाँ होने वाली जुर्म की संख्या इतनी कम है कि कई बार तो साल में एक भी मुकदमा दर्ज नहीं होता है .

यह थाना जैसलमेर में पकिस्तान के सीमा से सटे शाहगढ़ में पड़ता है. इस थाने को 23 साल तक तो केवल हेड कांस्टेबल ही संभालता था. लेकिन अब यहाँ एक थानेदार नियुक्त किया गया है. बीते 23 वर्षों में यहाँ दर्ज हुए मुकदमों के आंकड़े हैरान करने वाले हैं. सबसे अच्छी बात यह है कि दर्ज मुकदमों में एक भी मुकदमा रेप का नहीं है. देश में शायद ही ऐसा कोई थाना होगा जहाँ रपे का मामला दर्ज ना हुआ हो.

जानकारों की माने तो इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि ये थाना सुदूर मरुअस्थल में पड़ता है. यहाँ दूर-दूर तक कोई आदमी भी बहुत मुश्किल से नजर आता है. पुलिस कर्मियों ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि जब वे गश्त पर निकलते हैं तो उस दौरान  भी उन्हें इक्का-दुक्का लोग ही नजर आते हैं. इसमें कोई दो मत नहीं है कि इस थाने में जिस भी पुलिस कर्मी का ट्रान्सफर होता होगा. उसके लिए ये किसी सजा से कम नहीं होगी.

पुलिस सूत्रों के अनुसार यह थाना सीमा पार से तस्करी रोकने के लिए शाहगढ़ इलाके में साल 1993 में खोला गया था. थाना बनाने के बाद पूरे इलाके में तार बंदी कराई गई. जिसके बात तस्करी पर लगाम लगी थी. सीमावर्ती क्षेत्र के इस थाने पर 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का जिम्मा है. इस थाने के अन्तर्गत दो पंचायतों की 10 हजार की आबादी आती है.

पुलिसकर्मी बताते हैं कि साल 2016 से अब तक वहां कोई भी मुकदमा दर्ज नहीं हुवा है 2015 में वहां केवल एक मुकदमा दर्ज किया गया था. जो कि एक सड़क दुर्घटना का था. साल 2014 में तीन मामले दर्ज हुए. जिनमे एक मारपीट का, दूसरा चोरी का और तीसरा सड़क दुर्घटना का था. राज्य के क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक कपिल गर्ग ने बताया कि थाने में बिजली सौर ऊर्जा से मिलती है और पानी बाहर से लाया जाता है.

उन्होंने बताया कि एक बात वहां के थानेदार को परेशानी पे डालती है और वो ये है कि कभी साल भर मुकदमा दर्ज न हो लेकिन अंत में अगर एक मुकदमा दर्ज हो जाए और उसका निस्तारण न हो तो भी वर्ष के अंत में पेंडेंसी का प्रतिशत 100 आता है.

डीएसपी नरेन्द्र कुमार दवे ने थाने में 23 साल बाद नियुक्ति होने पर कहा कि, ‘एएसआई स्तर का अधिकारी थाने का प्रभारी रहा है. थाने में दर्ज होने वाले मामले, इन्स्पेक्टर स्तर के अधिकारी की उपलब्धता और कार्य सम्पादन के आधार पर इन्स्पेक्टर की नियुक्ति की जाती है.’

ये हैं दुनिया की 5 ऐसी जगहें, जहां भूलकर भी न जाऐं, क्योंकि जाने के बाद आप…

जानी-मानी ट्रैवल वेबसाइट डेस्टिनेशन टिप्स ने दुनिया की ऐसे ट्रैवल डेस्टिनेशनल की लिस्ट जारी की है. जो बेहद ही खतरनाक और बेकार ट्रेवल प्लेस माने जाते हैं. इसमें नॉर्थ कोरिया से लेकर दुनिया के सबसे खतरनाक देश सीरिया की राजधानी दमिश्क भी शामिल है.

  1. इश सूची में पहले नंबर पर है यूक्रेन की राजधानी ‘कीव’. यहां में पिछले कई साल से संघर्ष जारी है. यहां सरकार विरोधी आंदोलन ने पूरे शहर को बर्बाद करके रख दिया है. रूसी मिलिट्री की दखलअंदाजी इसे और भड़काने का काम कर रही है.

2. हैती का पोर्ट-ओ-प्रिंस इस सूची में दूसरे स्थान पर है. हैती में साल 2010 में जबरदस्त भूकंप आया, जिसका असर अब तक दिख रहा है. इस भूकंप में पोर्ट ओ प्रिंस का 40 से 50 फीसदी इलाका तबाह हो गया था. जो अब तक नहीं बस पाया है.

3. सीरिया में पिछले पांच साल से सिविल वॉर चल रहा है. यहां विद्रोहियों के साथ-साथ आईएसआईएस के आतंकियों ने तबाही मचा रखी है. इसका असर अब यहां की राजधानी दमिश्क तक पहुंच गया है, जो अब तक सुरक्षित हुआ करती थी.

4. सोमालिया की राजधानी मोगादिशु अफ्रीका की सबसे हिंसक और सबसे खतरनाक शहर है. 1990 से यहां अस्थिरता का माहौल है. यहां आए दिन आतंकी हमले और हिंसा हो रही है. आतंकी संगठन अल-शबाब ने यहां आतंक मचा रखा है.

5. प्योंगयांग दुनिया के सीक्रेट देश नॉर्थ कोरिया की राजधानी है. यहां विदेशियों के कहीं आने-जाने और बातचीत करने पर भी नजर रखी जाती है. यहां अकेले घूमने से लेकर फोटो खींचने तक किसी भी चीज की आजादी नहीं है. जाने अनजाने में देश के लीडर का अपमान सीधे जेल भी पहुंचा सकता है.

नरेंद्र मोदी की जीवनी पर प्रश्न-उत्तर, Question answers on Narendra Modi life

नरेंद्र मोदी की जीवनी पर प्रश्न-उत्तर, Question answers on Narendra Modi life in Hindi

प्रश्न :     नरेंद्र मोदी का जन्म कब हुआ?
उत्तर:     नरेन्द्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वड़नगर में हुआ

प्रश्न :     नरेंद्र मोदी के माता -पिता का क्या नाम है?
उत्तर:     नरेंद्र मोदी के पिता का नाम श्री दामोदार दास मूलचंद मोदी और माता का नाम हीराबेन है।

modiप्रश्न :     नरेंद्र मोदी कितने भाई बहन हैं?
उत्तर:     नरेन्द्र मोदी 5 भाई-बहनों में से दूसरे नंबर की संतान हैं।

प्रश्न :     नरेंद्र मोदी के बचपन का नाम क्या है?
उत्तर:     नरेन्द्र मोदी को बचपन में नरिया कहकर बुलाया जाता था।

प्रश्न :     नरेंद्र मोदी के पिता की चाय की दूकान कहाँ पर थी?
उत्तर:     नरेन्द्र मोदी के पिता की रेलवे स्टेशन पर चाय की दुकान थी।

प्रश्न :     नरेंद्र मोदी ने भारतीय सैनिकों की कब सेवा की?
उत्तर:     नरेंद्र मोदी ने 1965 में भारत-पाक युद्ध के दौरान उन्होंने स्टेशन से गुजर रहे सैनिकों को चाय पिलाई।

प्रश्न :     नरेंद्र मोदी ने प्राथमिक शिक्षा कहाँ से प्राप्त की?
उत्तर:     नरेंद्र मोदी वड़नगर के भगवताचार्य नारायणाचार्य स्कूल में पढ़ते थे।

प्रश्न :     नरेंद्र मोदी बचपन में क्या बनना चाहते थे?
उत्तर:     नरेंद्र मोदी बचपन में सन्यासी बनना चाहते थे, संन्यासी बनने के लिए मोदी स्कूल की पढ़ाई के बाद घर से भाग गए थे। इस दौरान मोदी पश्चिम बंगाल के रामकृष्ण आश्रम सहित कई जगहों पर घूमते रहे।

प्रश्न :     नरेंद्र मोदी को बल स्वयं सेवक की शपथ किसने और कब दिलवाई थी?
उत्तर:     1958 में दीपावली के दिन आरएसएस के प्रचारक लक्ष्मण राव इनामदार उर्फ वकील साहब ने नरेंद्र मोदी को बाल स्वयंसेवक की शपथ दिलवाई थी।

प्रश्न :     नरेंद्र मोदी का विवाह कब और किसके साथ हुआ?
उत्तर:     अठारह साल की उम्र में नरेन्द्र मोदी का विवाह बांसकाठा जिले के राजोसाना गांव में रहने वाली जसोदा बेन से किया गया था।

प्रश्न :     नरेंद्र मोदी को आरएसएस के प्रचार के समय कौन स्कूटर पर घुमाया करते थे?
उत्तर:     जब नरेन्द्र मोदी प्रचारक थे तो उन्हें स्कूटर चलाना नहीं आता था। शकरसिंह वाघेला उन्हें स्कूटर पर घुमाया करते थे।

प्रश्न :     मोदी ब्रांड कुर्ते की क्या कहानी है?
उत्तर:     नरेन्द्र मोदी ने स्वयं सेवक संघ के प्रचारक रहते समय कुर्ते की बांह छोटी करवा लीं, ताकि वह ज्यादा खराब न हो, जो आज मोदी ब्रांड का कुर्ता बन गया है और देशभर में मशहूर है।

प्रश्न :     इमरजेंसी के समय नरेंद्र मोदी कहाँ और किस रूप में छिपे थे?
उत्तर:     वे 1975 में इमरजेंसी के दौरान सरदार का रूप धरकर ढाई सालों तक पुलिस को छकाते रहे।

प्रश्न :     नरेंद्र मोदी ने अमेरिका में कौन सा कोर्स किया है?
उत्तर:     नरेंद्र मोदी ने अमेरिका में मैनेजमेंट और पब्लिक रिलेशन से संबंधित तीन महीने का कोर्स किया है।

प्रश्न :     नरेंद्र मोदी किस महान संत और दार्शनिक से प्रभावित हैं?
उत्तर:     मोदी महान विचारक और युवा दार्शनिक संत स्वामी विवेकानंद से बहुत ज्यादा प्रभावित हैं। उन्होंने गुजरात में ‘विवेकानंद युवा विकास यात्रा’ निकाली थी।

प्रश्न :     नरेंद्र मोदी शाकाहारी हैं या मांसाहारी?
उत्तर:     नरेंद्र मोदी शाकाहारी हैं। उन्होंने सिगरेट, शराब को कभी हाथ नहीं लगाया।

प्रश्न :     नरेंद्र मोदी सब ज्यादा महत्त्व किसे देते हैं?
उत्तर:     नरेन्द्र मोदी समय के बड़े पाबंद हैं। नरेन्द्र मोदी सिर्फ साढ़े तीन घंटे की नींद लेते हैं, वे सुबह 5.30 बजे उठ जाते हैं।

प्रश्न :     नरेंद्र मोदी का राजनीतिक गुरु किसे मन जाता है?
उत्तर:     लालकृष्ण आडवाणी को नरेन्द्र मोदी का राजनीतिक गुरु माना जाता है। नरेंद्र मोदी ने आडवाणी की सोमनाथ से अयोध्या रथ यात्रा में बड़ी भूमिका निभाई थी।

प्रश्न :     नरेंद्र मोदी भारत के कौन से प्रधान मंत्री हैं?
उत्तर:     नरेंद्र मोदी भारत के पन्द्रहवें प्रधान मंत्री हैं.

प्रश्न :     नरेंद्र मोदी किस दिन भारत के प्रधान मंत्री बने?
उत्तर:     नरेंद्र मोदी 26 May 2014 को भारत के प्रधान मंत्री बने.

प्रश्न :     नरेंद्र मोदी किस राजनीतिक दल के नेता हैं?
उत्तर:     नरेंद्र मोदी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता हैं.

प्रश्न :     नरेंद्र मोदी कब से कब तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे?
उत्तर:     नरेंद्र मोदी 2001 से लेकर 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे.

(Narendra Modi rochak tathya)

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नरेन्द्र मोदी सम्मान और पुरस्कार (Narendra Modi Samman Puruskar)

नरेन्द्र मोदी ने गुजरात कार्यकाल के दौरान राज्य के पृथक-पृथक क्षेत्रों में 60 से अधिक पुरस्कार प्राप्त किये हैं –

दिनांकपुरस्कार
16-10-2003आपदा प्रबंधन और ख़तरा टालने की दिशा में संयुक्त राष्ट्र की ओर से सासाकावा पुरस्कार।
अक्टूबर-2004प्रबंधन में नवीनता लाने के लिए ‘कॉमनवेल्थ एसोसिएशन्स’ की ओर से CAPAM गोल्ड पुरस्कार।
27-11-2004‘इन्डिया इन्टरनेशनल ट्रेड फेयर-2004 में इन्डिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गेनाइज़ेशन फॉर गुजरात्स एक्सेलन्स’ की ओर से ‘स्पेशल कमेन्डेशन गोल्ड मेडल’ दिया गया।
24-02-2005भारत सरकार की ओर से गुजरात के राजकोट ज़िले में सेनिटेशन सुविधाओं के लिए ‘निर्मल ग्राम’ पुरस्कार दिया गया।
25-04-2005भारत सरकार के सूचना और तकनीकी मंत्रालय और विज्ञान-तकनीकी मंत्रालय द्वारा ‘भास्कराचार्य इन्स्टिट्यूट ऑफ स्पेस एप्लिकेशन’ और ‘जिओ-इन्फर्मेटिक्स’, गुजरात सरकार को “PRAGATI” के लिए ‘एलिटेक्स’ पुरस्कार दिया गया।
21-05-2005राजीव गांधी फाउन्डेशन नई दिल्ली की ओर से आयोजित सर्वेक्षण में देश के सभी राज्यों में गुजरात को श्रेष्ठ राज्य का पुरस्कार मिला।
01-06-2005भूकंप के दौरान क्षतिग्रस्त हुए गुरुद्वारा के पुनःस्थापन के लिए यूनेस्को द्वारा ‘एशिया पेसिफिक हेरिटेज’ अवार्ड दिया गया।
05-08-2005‘इन्डिया टुडे’ द्वारा श्रेष्ठ निवेश पर्यावरण पुरस्कार दिया गया।
05-08-2005‘इन्डिया टुडे’ द्वारा सर्वाधिक आर्थिक स्वातंत्र्य पुरस्कार दिया गया।
27-11-2005नई दिल्ली में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में गुजरात पेविलियन को प्रथम पुरस्कार मिला।
14-10-2005गुजराती साप्ताहिक चित्रलेखा के पाठकों ने श्री नरेन्द्र मोदी को ‘पर्सन ओफ द इयर’ चुना। इस में टेनिस स्टार सानिया मिर्ज़ा दूसरे क्रम पर और सुपरस्टार अमिताभ बच्चन तीसरे स्थान पर रहे। ये पुरस्कार दिनांक 18-05-2006 को दिये गये।
12-11-2005इन्डिया टेक फाउन्डेशन की ओर से ऊर्जा क्षेत्र में सुधार और नवीनता के लिए इन्डिया टेक्नोलोजी एक्सेलन्स अवार्ड दिया गया।
30-01-2006इन्डिया टुडे द्वारा देश व्यापी स्तर पर कराये गये सर्वेक्षण में श्री नरेन्द्र मोदी देश के सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री चुने गये।
23-03-2006सेनिटेशन सुविधाओं के लिए केन्द्र सरकार द्वारा गुजरात के कुछ गाँवों को निर्मल ग्राम पुरस्कार दिये गये।
31-07-2006बीस सूत्रीय कार्यक्रम के अमलीकरण में गुजरात एक बार फिर प्रथम स्थान पर रहा।
02-08-2006सर्व शिक्षा अभियान में गुजरात देश के 35 राज्यों में सबसे प्रथम क्रमांक पर रहा।
12-09-2006अहल्याबाई नेशनल अवार्ड फंक्शन, इन्दौर की ओर से पुरस्कार।
30-10-2006चिरंजीवी योजना के लिए ‘वोल स्ट्रीट जर्नल’ और ‘फाइनान्सियल एक्सप्रेस’ की ओर से (प्रसूति समय जच्चा-बच्चा मृत्यु दर कम करने ले लिए) सिंगापुर में ‘एशियन इन्नोवेशन अवार्ड’ दिया गया।
04-11-2006भू-रिकार्ड्स के कम्प्यूटराइजेशन के लिए चल रही ई-धरा योजना के लिए ई-गवर्नन्स पुरस्कार।
10-01-2007देश के सबसे श्रेष्ठ ई-गवर्न्ड राज्य का ELITEX 2007- पुरस्कार भारत की केन्द्र सरकार की ओर से प्राप्त।
05-02-2007इन्डिया टुडे-ओआरजी मार्ग के देशव्यापी सर्वेक्षण में तीसरी बार श्रेष्ट मुख्यमंत्री चुने गये। पाँच साल के कार्यकाल में किसी भी मुख्यमंत्री के लिए यह अनोखी सिद्धि थी।

बारात आने पर द्वार पर वर की आरती क्यों उतारी जाती है?

Dwar par var (dulhe) ki aarti kyon utari jati hai?

पुराने जमाने में विवाह संबंध, सगाई आदि कराना नाई और ब्राह्मणों के ही जिम्मे था। वे जैसी रिपोर्ट आकर घर के मुखिया को देते थे, उसी पर सब कुछ निर्भर करता था। ये मध्यस्थ काफी विश्वासी भी होते थे। लेकिन इसके बावजूद माँ की ममता नहीं मानती थी।

Dwar par dulhe (var) ki aarti kyon utari jati haiलड़की की माँ एवं स्त्रियां के मन में एक शंका बनी रहती थी कि पुरूष वर्ग ने जो वर चुना है वह ठीक है या नहीं। इसीलिए गृह प्रवेश करने के पहले द्वार पूजा एवं वर की आरती का विधान बनाया गया। उस जमाने में हेलोजिन और मर्करी तो थी नहीं।

जब बारात आती तो 21 दीपकों की रोशनी में सास या कोई बड़ी अनुभवी स्त्री निरीक्षण करती कि वर लंगड़ा लूला, काना आदि कोई दोषमय तो नहीं है। कच्चा सूत से वर की छाती, लम्बाई आदि का नाप करने का विधान भी था। इस प्रक्रिया के बाद संतुष्ट होने पर ही वर को घर में आने की अनुमति मिलती थी।

कई बार सुना गया कि वर ठीक न होने के कारण बारात को द्वार से ही वापस लौट जाता पड़ता था। इसीलिए वर आने पर द्वार पर उसकी आरती उतारने का विधान बनाया गया।

सप्ताह में सात दिन ही क्यों? why 7 days of week in Hindi

Saptaah mein sat din kyon hote hain? (Why 7 days of week in Hindi)

हिन्दी पंचांग व इंग्लिश केलेंडर दोनों के अनसुार सप्ताह में सात दिन होते हैं। इंग्लिश कैलेंडर के अनुसार रविवार सप्ताह का आखिरी दिन होता है व हिन्दू कैलेंडर के अनसुार पहला लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि हिन्दू धर्मशास्त्रों व ज्योतिष के अनुसार सप्ताह में सात दिन ही क्यों होते हैं? दरअसल, ज्योतिष में ग्रहों की संख्या नौ मानी गई है, जो इस प्रकार हैं शनि, बृहस्पति, मंगल, शुक्र, बुध, चंद्र, सूर्य, राहु और केतु।

7 days of week in hindiइनमें से राहु और केतु छाया ग्रह माना गया है। इसलिए इनका प्रभाव हमारे जीवन पर छाया के समान ही पड़ता है। इसलिए उस समय ज्योतिषाचार्य ज्योतिषियों ने ग्रहों के आधार पर सप्ताह में सात दिन निर्धारित किए लेकिन उसके बाद समस्या यह थी कि किस ग्रह का दिन कौन सा माना जाए तो ज्योतिषियों ने होरा के उदित होने के अनुसार दिनों को बांटा।

एक दिन में 24 होरा होता है। हर होरा एक घंटे की होती है। दिन उदित होने के साथ जिस ग्रह की पहली होरा होती है। वह उसी ग्रह का माना जाता है। सोमवार के दिन की शुरूआत चंद्र की होरा के साथ होती है। इसीलिए उसे सोमवार नाम दिया गया। मंगलवार के दिन पहली होरा मंगल की होती है, उसे मंगलवार कहते हैं। इसी तरह बुध, गुरू, शुक्र, शनि, रवि की शुरूआत इन्हीं ग्रहों के अनुसार होती है। इस तरह सात ग्रहों की होरा उदित होने के कारण उस दिन को उस ग्रह का प्रधान मानकर उसका नाम दिया गया। इन कारणों से सप्ताह में सात दिन होते हैं।