भारतीय मूल के राहुल का आईक्यू अल्बर्ट आइंस्टीन से भी ज्यादा है

लंदन। ब्रिटेन में एक टीवी कार्यक्रम में सभी सवालों के सही जवाब देने के बाद भारतीय मूल के 12 वर्षीय राहुल एक ही रात में चर्चा में आ गए है। नई टीवी सीरीज ‘चाइल्ड जीनियसÓ के पहले दौर में राहुल ने सभी 14 सवालों के सही जवाब दिये। चैनल 4 की ओर से प्रसारित शो ‘चाइल्ड जीनियस’ में राहुल से पहले दौर में 14 सवाल पूछ कर उनका आईक्यू आंका गया, जो 162 साबित हुआ। इस लिहाज से राहुल का आईक्यू अल्बर्ट आइंस्टीन और स्टीफेन हॉकिंग जैसी हस्तियों से भी अधिक माना जा रहा है। इसके साथ ही राहुल दुनिया के सबसे पुराने हाई आईक्यू सोसाइटी ‘मेन्सा क्लब’ का मेंबर बनने के भी योग्य हो गए।

स्पेलिंग राउंड में फुल माक्र्स मिले: इस प्रतियोगिता में राहुल को स्पेलिंग राउंड में फुल माक्र्स मिले हैं, इस दौरान राहुल ने कई तरह के सवालों के जवाब दिए जिनमें स्पेलिंग से लेकर दो शब्दों से गायब किए गए एक ही तरह के दो अक्षरों को पहचानना जैसे सवाल शामिल थे। सीमित समय के इस खेल में राहुल ने 15 में से 14 सवालों के सही-सही जवाब दिए लेकिन समय की कमी की वजह से राहुल के सामने 15वां सवाल पूछा ही नहीं जा सका।

सोशल मीडिया पर हिट हुए:चाइल्ड जीनियस के इस सीजन में 08 से 12 साल के कुल 20 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया है। एक हफ्ते तक चलने वाली इस प्रतियोगिता के बाद किसी एक प्रतिभागी को विजेता घोषित किया जाएगा। लेकिन टीवी शो के फस्र्ट राउंड में सभी पूछे गए जवाबों के सही जवाब देकर जीतने पर राहुल सोशल मीडिया पर हिट हो गए।

राहुल ने कहा मैं जीनियस हूं: राहुल ने अपनी इस जीत पर ख़ुशी जाहिर की और कहा कि मैं हमेशा अपना बेस्ट देना चाहता हूं। फिर इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि सामने वाली चीज का मूल्य क्या है। मैं सोचता हूं कि मैं जीनियस हूं। मेरी मैथ्स और जनरल नॉलेज बहुत अच्छी है। अपनी सफलता पर राहुल बहुत खुश दिखाई दिये। राहुल के माता-पिता ने बताया कि बेटे की सफलता से बहुत खुश हैं। राहुल के पापा आईटी मैनेजर हैं और उनकी मां फार्मासिस्ट हैं।

आज़ादी 15 अगस्त को रात 12 बजे ही क्यों मिली

1945 में दूसरे विश्व युद्ध ने ब्रिटिश सरकार यानी अंग्रेज़ों की आर्थिक हालत इतनी ख़राब कर दी थी की उनके लिए अपना देश संभालना मुश्किल हो गया था. इधर गाँधी-नेहरू की कोशिशों का असर अवाम में दिखाई देने लगा था.अंगरेज़ों ने हार कर 1947 में लार्ड माउंटबैटन को भारत का आखिरी वाइसराय चुना, जिस पर भारत को आज़ादी दिलाने की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी सौंपी गयी. लार्ड माउंबेटन ने आज़ादी की जंग का नेतृत्व करने वालों से बातचीत की और 03 जून 1948 की तारीख तय हो गई.

लार्ड माउंबेटन ने तय किया की भारत जून, 1948 में आज़ाद होगा. इस सिलसिले में वाइसराय ने भारतीय नेताओं से चर्चा भी की लेकिन सबसे बड़ी दुश्वारी मुहम्मद अली जिन्नाह और पंडित नेहरू के बीच जो तनाव था उसे लेकर बात नहीं बन पायी. पंडित नेहरू और जिन्नाह के इस तनाव के चलते जिन्नाह ने मुस्लिम लीग की मुसलामानों के लिए अलग देश की मांग का समर्थन कर दिया.अवाम जैसे ही ये खबर पहुंची तो देश के कई इलाक़ों में साम्प्रदायिक फसाद शुरू हो गए.

लार्ड माउंबेटन ने जल्द फैसला किया अब आज़ादी 1948 में नहीं 1947 में दी जाएगी.लार्ड माउंटबेन ने 15 अगस्त की तारीख़ तय की इसे वे शुभ मानते थे क्योंकि दूसरे विश्व युद्ध में लार्ड माउंटबैटन अलाइड फ़ोर्सेज़ के कमांडर थे तब 15 अगस्त, 1945 को जापानी फ़ौज ने आत्मसमर्पण किया था.लार्ड माउंटबेटन की इस शुभ तारीख (15 अगस्त) का देश के ज्योतिषियों ने विरोध किया ये तिथि अशुभ है देश में अमंगल हो जाएगा. लेकिन वाइसराय 15 अगस्त को ही लेकर अड़े थे. ख़ैर, ज्योतिषियों ने कहा 14 और 15 अगस्त की रात 12 बजे का समय तय किया जाए क्योंकि अंग्रेज़ों के हिसाब से दिन 12 AM पर शुरू होता है.ज्योतिषियों ने पंडित नेहरू से कहा कि वे अपना भाषण अभिजीत मुहूर्त में 11:51 PM से 12:39 AM के बीच दें और रात 12 बजे ख़त्म दें.

भारतीय सेना से जुड़े 7 रोचक तथ्य, जिन्हें जानकार आप भी गर्व से भर जाएंगे

दोस्तों भारत के पास दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी सेना है पर क्या आपको पता है की भारत की वायु सेना के पास देश से बाहर भी एक एयर बेस है?  आइये जानते हैं भारतीय सेना के बारे में कुछ मजेदार तथ्य:

1. लोंगेवाला की ऐतिहासिक लड़ाई

1971 longewala
 
1971 में पाकिस्तान के साथ हुई लोंगेवाला की लड़ाई में 2000 पाकिस्तानी सैनिकों के खिलाफ भारत के सिर्फ 120 जवानों ने लोहा लिया था. पूरी रात चले इस युद्ध में भारतीय सेना ने पाकिस्तान को बुरी तरह हराया था. सबसे अचिंभित करने वाली बात ये रही कि इस युद्ध में भारत के सिर्फ 2 जवान शहीद हुए. इस पूरी घटना पर बॉर्डर नाम के एक फिल्म भी बनी है.

2. जाति धर्म के नाम पर कोई भेदभाव नहीं

Indian soldiers march during the Republic Day parade in New Delhi
 
जहाँ दुसरे देशों में धर्म और जाति का ख़याल रखते हुए सेना में भर्ती की जाती है वहीँ भारत में सेना में भर्ती होने के लिए सिर्फ आपकी मेरिट और फिटनेस देखी जाती है. धर्म जाति या किसी भी तरह का रिजर्वेशन भारतीय सेना में नहीं चलता.

3. भारतीय सेना नियंत्रित करती है दुनिया का सबसे ऊँचा रणक्षेत्र

 
दुनिया का सबसे ऊँचा बैटल फील्ड सियाचिन है जहाँ तापमान शून्य से भी नीचे चला जाता है. ऐसे रणक्षेत्र को भारतीय सेना पूरी मुस्तैदी के साथ नियंत्रित करती है.

4. ऊंचाई पर लड़ाई करने में सबका उस्ताद है अपना देश

 
 india us army training
अधिक ऊंचाई तथा पहाड़ी इलाकों में लड़ाई करने में भारतीय सेना का कोई जवाब नहीं. भारतीय सेना के हाई अल्टीट्यूड वारफेयर स्कूल में पूरे विश्व से सेनाएं आती हैं और ट्रेनिंग लेती हैं. अफगानिस्तान की लड़ाई के वक़्त भारतीय सेना ने अमेरिका तथा रूस की सेना को इसी स्कूल में ट्रेनिंग दी थी.

5. ऑपरेशन राहत : दुनिया का सबसे बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन

army in operation rahat
सन 2013 में उत्तराखंड में आयी बाढ़ में लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए ऑपरेशन राहत चलाया था.जिसमें 20,000 से अधिक नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया था. हेलीकाप्टर के जरिये हुए इस ऑपरेशन में सेना ने 3,82,400 किलोग्राम की राहत सामग्री भी पहुंचाई थी. यह ऑपरेशन दुनिया भर में अब तक का सबसे बड़ा आर्मी ऑपरेशन है.

6. विदेशों में भी हैं भारतीय सेना का एयरबेस

farkhor air base
ताजीकिस्तान में भारतीय सेना का फारखोर एयर बेस देश के बाहर बना एक महत्वपूर्ण बेस है. ३५० करोड़ की लागत से बना यह एयरबेस हमें पाकिस्तान और चीन पर मजबूत पकड़ देता है. साथ ही साथ पूरे एशिया में भारत की पकड़ मजबूत बनाता है.

7. बैली ब्रिज- भारतीय सेना द्वारा निर्मित सबसे ऊँचा पुल

baily indian army

भारतीय सेना द्वारा बनाया गया बैली पुल दुनिया का सबसे ऊँचा पुल है. लद्दाख की घाटी में द्रास और सुरु नदी के बीच बना यह पुल सबसे ऊंचाई पर स्थित है. इसे सेना ने अगस्त 1982 में बनाया था.

तो दोस्तों, कैसे लगे आपको भारतीय सेना से जुड़े ये दिलचस्प तथ्य?

दिल्ली की 5 सबसे भूतिया जगहें, जहाँ रात में जाने पर आपकी रूह काँप जाएगी

दोस्तों दिल्ली और उसके आस पास के इलाके भूतिया जगहों से भरे पड़े हैं. कहीं से आवाज़ें आती हैं तो कहीं रात में आत्माओं को भटकते हुए देखा जाता है. आइये जानते हैं दिल्ली की पांच सबसे खौफनाक जगहें जहां जाने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पाता. 
 

5. दिल्ली कंटोनमेंट

delhi cant 2

 
दिल्ली कैंट की स्थापना ब्रिटिश – इंडियन आर्मी ने की थी।  लोग कहते है की आधी रात के समय दिल्ली केंट में सफेद लिबाज पहने एक महिला लोगों से लिफ्ट मांगती नज़र आती है। बहुत से लोगो ने उसे  देखा भी है। लेकिन आज तक किसी इंसान को नुक्सान पहुचाने की कोई खबर नहीं मिली है। बुजुर्गों का कहना है कि यदि कभी कभी आपको एक महिला लिफ्ट मांगते हुए दिखे तो अपने वाहन को कभी न रोके.
 

4. म्यूटिनी हाउस 

mutniy 3

 
कश्मीरी गेट के पास म्यूटिनी हाउस का निर्माण अंग्रेजो ने 1857 में मारे गए अपने सिपाहियों की याद में बनवाया था।
रात के अँधेरे में यहाँ का माहौल बेहद डरावना हो जाता है. कहा जाता है कि सैनिकों की आत्माएं अभी भी इस भवन में भटकती हैं. कुछ लोगों का कहना है कि उन्होंने यहाँ पर आधे अधूरे शरीर के साथ घुमते हुए लोगों को देखा है.  
 

3. भूली भटियारिन का महल 

bhuli mahal 3

 
यह महल किसी ज़माने में तुगलक वंश का शिकारगाह हुआ करता था। जिसकी देखभाल एक महिला करती थी और उसका नाम था भूली भटियारन. 
उसी महिला के नाम पर उस जमाने के लोगों ने इस महल को भूली भटियारन का महल कहना शुरू कर दिया .  अंधेरा होना के बाद यहां परिंदा भी पर नहीं मारता। आस पास रहने वाले बताते हैं कि अक्सर इस महल से अजीबोगरीब चीखें सुनाई देती हैं. 

2. खुनी नदी 

khuni nadi

कहा जाता है कि इस नदी का पानी आपको अपनी तरफ खींचता है. पानी में जाने वालों को यह नदी निगल लेती है इसी वजह से नदी के आसपास कोई नहीं जाता है। रोहिणी के कम शोर गुल वाले इस इलाके में यूं भी कम लोग आते हैं। कारण, नदी के किनारे लाशों का मिलना। हत्या, आत्महत्या, दुर्घटना कारण चाहे जो हो, यहां नदी किनारे लाशें मिलना आम बात हो गई है। यही कारण है कि लोग इसे खुनी नदी के नाम से जानते हैं.
 

1. जमाली कमाली की कब्रगाह 

jammali

 
यहाँ एक मस्जिद भी है जो दिल्ली के महरौली में स्थित है। सूफी संत जमाली लोधी हुकूमत के राज कवि थे। इसके बाद बाबर और उनके बेटे हुमायूं के राज तक जमाली को काफी तवज्जो दी गई। मकबरे में दो संगमरमर की कब्र हैं, एक जमाली की और दूसरी कमाली की।  इस जगह के बारे में लोगों का विश्वास है कि यहां जिन्न रहते हैं। कई लोगों को यहाँ बेहद डरावने अनुभव हुए हैं। माना जाता है कि यहां रात में तेज हवाएं चलती हैं. तथा लोगों को किसी अंजनी शक्ति से थप्पड़ भी लगते हैं.

Google के बारे में रोचक जानकारी

गूगल एक अमरीकी सार्वजनिक कम्पनी है, जो अपने सर्च इंजन (Search Engine) के लिए प्रसिद्ध है । यह कम्पनी पीएचडी के दो छात्र लैरी पेज (Larry Page) और सर्गेई ब्रिन (Sergey Brin) द्वारा संस्थापित की गयी थी।गूगल के C.E.O सुंदर पिचाई है जो की एक भारतीय-अमरीकी नागरिक है ।

सन 1999 में गूगल के संस्थापको ने इससे 1 million अमेररिकी डॉलर्स में बेचने की कोशिश की थी जो लगभग 6 करोड रूपए के आसपास थी परन्तु वो बेचने में असफल रहे । इसकी कीमत अब 16.35 billion अमेररिकी डॉलर्स है,जो की लगभग 1,07,200 करोड रूपए के आसपास की है ।

GOOGLE ROCHAK JANKARI“I’m feeling lucky” बटन को क्लिक करने से गूगल सर्च के समय कोई विज्ञापन नहीं दिखाता । इस बटन की लागत 110 million अमेररिकी डॉलर्स प्रति वर्ष है, यानी लगभग 660 करोड रूपए ।

इसका नाम गलती से गूगल रखा गया । गूगल के संस्थापक इसका नाम “googol” रखना चाहते थे , जिसका मतलब होता है 1 और उसके बाद 100 शून्य (100 zeros) ।

गूगल का 99 % मुनाफा विज्ञापनों से होता है ।

गूगल ने अपना पहला एंड्राइड (android ) मोबाइल 2010 में निकाला था जिसका नाम Nexus One था ।

गूगल एप्पल कमपनी को प्रति वर्ष लगभग 1 billlion अमेररिकी डॉलर्स देता है ताकि गूगल का homepage एप्पल के safari वेब-इंजन में सबसे पहले खुले ।

गूगल के अन्य products है : गूगल मैप (google map ), गूगल अर्थ (google earth ), गूगल बुक्स (google books ), यूट्यूब (youtube ), जीमेल (gmail ), गूगल फोटोज (google photos ), गूगल ड्राइव (google drive ), गूगल प्लस (google plus )आदि ।

बिटकॉइन (Bitcoin) पहली बार 3000 डॉलर के पार

मार्किट में आयी नयी मुद्रा जिसे हम सब बिटकॉइन के नाम से जानते हैं, ने आज रिकॉर्ड स्तर को छूते हुए 3000 डॉलर का आंकड़ा पार कर लिया और तरह बिटकॉइन अबतक से सर्वोच्च स्तर पर है. UTC के अनुसार रविवार शाम 5 बजे बिटकॉइन ने रिकॉर्ड स्थापित करते हुए 3000 डॉलर का आंकड़ा पार कर लिया.

यह भी पढ़िए  Bitcoin क्या है, कैसे काम करता है और कैसे आप इसमें इन्वेस्ट कर सकते हैं. जानिए सबकुछ

52 पैसे से शुरू हुई इस क्रिप्टोकोर्रेंसी ने बेहद तेज़ी दिखाई है. बात यही पिछले 3 महीनों की करें तो इस करेंसी ने 300 प्रतिशत से ज्यादा की ग्रोथ दर्ज की है. आपको बता दें कि बिटकॉइन का कुल मार्किट कैपिटल $44.24 बिलियन डॉलर का है जो लगातार बढ़ता जा रहा है.

bitcoin price chart

भारत सरकार ने भी बिटकॉइन के भविष्य को ले कर देशवासियों की राय जाननी चाही है और ऐसा माना जा रहा है कि जल्द ही भारत सरकार बिटकॉइन को आधिकारिक मान्यता दे देगी.

बिटकॉइन ने लोगों की दिलचस्पी बढ़ती जा रही है. अच्छे रिटर्न्स की वजह से इस करेन्सी में पैसे लगाना एक ट्रेंड बनता जा रहा है. अभी देश में दो कंपनियों के माध्यम से बिटकॉइन की ट्रेडिंग की जा रही है जिनके नाम हैं युनोकॉइन तथा जेबपे

लगातार बढ़ती कीमतों के बीच जानकारों का यह मानना है कि बिटकॉइन इस साल के अंत तक 5000 डॉलर का आंकड़ा पार कर जाएगा.

यह भी पढ़िए  Bitcoin क्या है, कैसे काम करता है और कैसे आप इसमें इन्वेस्ट कर सकते हैं. जानिए सबकुछ

पर ध्यान रहे कि बिटकॉइन इस समय बेहद परिवर्तनशील करेंसी है जिसकी वैल्यू लगातार परिवर्तित हो रही है. अत्यधिक रिस्क होने की वजह से इसमें निवेश बेहद सोच समझ कर करने की आवशjयकता है.

Bitcoin क्या है, कैसे काम करता है और कैसे आप इसमें इन्वेस्ट कर सकते हैं. जानिए सबकुछ

महज 52 पैसे से शुरू हुई एक मुद्रा जिसकी कीमत आज सोने से भी ज्यादा महँगी है, के बारे में आपको जरूर जानना चाहिए. पिछले 3 महीने में इसकी कीमत में ढाई गुने से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है परन्तु आज भी अधिकांश लोग बिटकॉइन से अनजान हैं.
आइये आसान शब्दों में जानते हैं कि आखिर ये है क्या, काम कैसे करती है और कैसे आप इसमें अपना फायदा निकाल सकते हैं.

bitcoin currencyबिटकॉइन एक आभासी मुद्रा है जो आम मुद्रा की तरह नोट या सिक्के के रूप में नहीं मिलती. यह एक डिजिटल करेंसी है जिसको आप इलेक्ट्रॉनिक रूप से रख सकते हैं.

आखिर क्या होता है बिटकॉइन-What is Bitcoin

आपने पेटीएम् (PAYTM) का प्रयोग किया है? बिटकॉइन कमोबेश इसी तरह काम करता है. एक इलेक्ट्रॉनिक अकाउंट में आपका पैसा बिटकॉइन के रूप में रहता है जिससे आप जो चाहे खरीद सकते हैं. बस फर्क ये है कि बिटकॉइन एक मुद्रा है जिसका नियंत्रण कोई एक कंपनी या कोई सरकार नहीं करती. दुनिया के हर शख्स के पास इसका नियंत्रण है.

इसका उपयोग करने के आपको इंटरनेट पर एक डिजिटल वॉलेट बनाना होता है, ये वॉलेट आप अपने मोबाइल या कंप्यूटर से बना सकते हैं. वॉलेट बनने के बाद आपको एक अनूठा क्रिप्टोग्राफ़िक कोड मिलता है जो आपके अकाउंट नंबर की तरह काम करता है. इस वॉलेट के माध्यम से आप लेनदेन कर सकते हैं.

बिटकॉइन से सम्बंधित हर लेनदेन का हिसाब एक पब्लिक लेजर पर होता है जिसे हर कोई देख सकता है.

इंटरनेट पर कई कंपनियां है जो बिटकॉइन वॉलेट की सुविधा प्रदान करती हैं. इनका प्रयोग कर आप चाहें तो नए बिटकॉइन खरीद भी सकते हैं या किसी वस्तु के बदले में अपने बिटकॉइन वॉलेट से बिटकॉइन में पेमेंट भी कर सकते हैं.

कैसे बनते हैं नए Bitcoins- Mining & Miners

Bitcoin का उत्पादन माइनिंग के द्वारा किया जाता है और इसका उत्पादन करने वालों को माइनर्स कहते हैं. माइनर्स का काम बिटकॉइन के हर एक लेनदेन की पुष्टि करना है.

ये माइनर्स अपने विशेष प्रकार के हार्डवेयर का प्रयोग कर कंप्यूटर प्रोसेसिंग प्रणाली द्वारा विभिन्न प्रकार के लेनदेन को प्रोसेस करते हैं जिसके फलस्वरूप नए बिटकॉइन बनते हैं और इन माइनर्स को मिलते हैं.

माइनिंग एक स्वतंत्र प्रक्रिया है, कोई भी व्यक्ति माइनिंग कर के बिटकॉइन प्राप्त कर सकता है. हालाँकि इसके लिए अत्याधुनिक तथा शक्तिशाली प्रोसेसिंग वाले मशीनों की आवशयकता होती है.

bitcoin mining
कुछ ऐसे होती है बिटकॉइन की माइनिंग

रुपया या डॉलर की तरह  बिटकॉइन की छपाई या निर्माण हमेशा नहीं होगा. बिटकॉइन पालिसी के अनुसार पूरी दुनिया में कुल मिलाकर 2 करोड़ 10 लाख (21 million ) बिटकॉइन से ज्यादा बिटकॉइन नहीं निकाले जाएंगे. इसके बाद इसका उत्पादन बंद हो जाएगा.

1 BTC = कितने रूपए, Exchange Rate of Bitcoin

अपने निर्माण के बाद से बिटकॉइन का मूल्य लगातार बढ़ता जा रहा है. आइये देखते हैं कि एक बिटकॉइन की कीमत किस तरह से बदली.

  • मार्च 2010 में एक यूजर Smoketoomuch ने Bitcoins की नीलामी करने की सोची और और 10000 BitCoins के बदले  $50(INR 3000) की मांग की. उसे एक भी खरीददार  नहीं मिला. आज उतने Bitcoins की कीमत 145 करोड़ है.
  • मई 2010 में Laszlo Hanekz नाम के इस शख्स ने BitCoin से पहला सौदा किया जिसमें उन्होंने 10,000 Bitcoins के बदले एक पिज़्ज़ा खरीदा.
  • तब 1 बिटकॉइन की कीमत सिर्फ 52 पैसे थी और उसके 4 दिन बाद ही इसकी कीमत में 10 गुना उछाल आया और अब एक बिटकॉइन की कीमत हो गयी 5 रूपए

उसके बाद बिटकॉइन ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा और देखते ही देखते इस क्रिप्टो करेंसी की कीमत आसमान छूने लगी. जनवरी 2017 में बिटकॉइन ने 1000 डॉलर का आंकड़ा छुआ पर उसके बाद जबरदस्त उछाल देखने को मिला और मई 2017 तक बिटकॉइन की वैल्यू 2700 डॉलर पार कर गयी.

कभी 52 पैसे की कीमत वाले बिटकॉइन की कीमत आज 1,45,000 रूपए है और ये लगातार बढ़ रही है

यहाँ एक बात रोचक है कि Bitcoin (बड़े अक्षरों में लिखा B) विश्व बाज़ार को दर्शाता है वहीँ  bitcoin (छोटे अक्षरों में लिखा B) असल या वास्तविक मुद्रा को प्रदर्शित करता है.

बिटकॉइन में निवेश-How to invest in Bitcoin

bitcoin investment

जितनी तेज़ी से बिटकॉइन की वैल्यू बढ़ी है उससे निवेशकों का काफी ध्यान आकर्षित हुआ है. सिर्फ 7 सालों ने इस मुद्रा की कीमत में जबरदस्त उछाल आया है जिसकी वजह से लोग बिटकॉइन में जम कर पैसा लगा रहे हैं. कम दाम पर बिटकॉइन खरीदना और बाद में जब इसका मूल्य बढ़ जाए तब इसे बेच कर लोग मुनाफा कमा रहे हैं.

भारत में भी कई बिटकॉइन इन्वेस्टमेंट कम्पनीज के माध्यम से आप बिटकॉइन खरीद कर इसमें इन्वेस्ट कर सकते हैं. कुछ प्रमुख कंपनियों के नाम हैं – ZebPay या Unicoin

बिटकॉइन पर इन्वेस्टमेंट के बारे में और अधिक जाने के लिए हमारी अगली पोस्ट का इंतज़ार करें

क्या हैं बिटकॉइन प्रयोग करने के फायदे

आखिर क्यों पूरी दुनिया बिटकॉइन के पीछे दीवानी हो रही है. ऐसा क्या है बिटकॉइन में जिससे इसके प्रयोगकर्ताओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है.
दरअसल बिटकॉइन ने मुद्रा या लेन देन के सिस्टम को पूरी तरह बदल कर रख दिया है. इसके अनेकों कारण है पर कुछ प्रमुख कारण हम यहां आपको बताने की कोशिश करेंगे.

इंटरनेट पर www.blockchain.info पर आप पूरी दुनिया में हो रहे बिटकॉइन लेनदेन पर नज़र रख सकते हैं. इस वेबसाइट पर आप हर लेनदेन का रिकॉर्ड देख सकते हैं

  • क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड का प्रयोग करने पर हर लेनदेन पर कुछ पैसा कटता है जबकि बिटकॉइन में ऐसा कुछ भी नहीं है
  • चूँकि विक्रेता को भी बिटकॉइन से लेनदेन करने में कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ता, इसलिए विक्रेता में बिटकॉइन के लिए प्रोत्साहित होते हैं
  • नगदी ले कर घूमने की कोई समस्या नहीं. आसान और तेज़ लेन देन
  • डॉलर या अन्य करेंसी की तरह इसपर किसी सरकार का नियंत्रण नहीं. तो ऐसे में कोई भी सरकार अपने मर्जी के मुताबिक मुद्रा प्रिंट कर चोरी नहीं कर सकती. (जो की डॉलर प्रिंट करने वाली अमेरिकी फेडरल एजेंसी हमेशा करते आयी है)
  • बिटकॉइन के लेन देन में दोनों पक्षों की पर्सनल जानकारी सुरक्षित रहती है. जो इस प्रक्रिया को सेफ बनाता है
    चूंकि बिटकॉइन के लेन देन का बही खता सार्वजनिक रूप से इंटरनेट पर उपलब्ध है इसलिए दुनिया में किसी भी लेन देन को किसी भी समय देखा जा सकता है, इससे फर्ज़ीवाड़े का खतरा कम हो जाता है.
  • दुनिया के किसी भी कोने में इस करेंसी का प्रयोग बेधड़क कर सकते हैं, इसके लिए मनी एक्सचेंज या करेंसी कन्वर्जन के चक्कर में समय बर्बाद नहीं होगा.

बिटकॉइन के नुकसान-Demerits of Bitcoin

  • बिटकॉइन बहुत की ज्यादा अस्थिर मुद्रा है, देखते ही देखते इसका भाव बढ़ता घटता रहता है. जिससे इसमें निवेश करना थोड़ा जोखिम भरा हो सकता है.
  • चूँकि प्राथमिक तौर पर ये डिजिटल मुद्रा प्रणाली है और इसमें सट्टेबाजी और कर उल्लंघन लिप्त हैं, तो इसमें मुद्रा के नियंत्रण में धोखेबाज़ी की संभावनाएं रहती हैं.

एनडीए की राजनीतिक प्रगति की रुपरेखा, नरेंद्र मोदी सरकार ने 3 साल पूरे किए

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने मंगलवार को तीन साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है। मई 1998 में गठित भाजपा के सबसे बड़े दल के रूप में एनडीए एक लंबा रास्ता तय कर चुका है। अब तक एनडीए ने गठबंधन के रूप में पांच चुनाव लड़ लिए हैं।

एनडीए द्वारा लड़े गए अब तक के चुनाव

लोकसभा चुनाव 1998
अटल बिहारी वाजपेयी के रूप में प्रधानमंत्री और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) द्वारा प्रदान किए गए समर्थन के साथ गठबंधन ने 1998 के चुनावों में बहुमत हासिल करने में सक्षम हुई। हालांकि एक वर्ष के भीतर सरकार गिर गई क्योंकि एआईएडीएमके ने अपना समर्थन वापस ले लिया|

लोकसभा चुनाव 1999
अटल बिहारी वाजपेयी के साथ फिर से प्रधानमंत्री के रूप में और कुछ और क्षेत्रीय दलों के प्रवेश के बाद, एनडीए ने 1999 में हुए चुनावों को बहुमत से जीता| जिसके बाद सरकार ने पूरे पांच साल का कार्यकाल पूरा किया। इस समय को आज भी भारतीय राजनीती के सबसे अच्छे समय में गिना जाता है| अटल बिहारी वाजपेयी ने भारत समेत पूरे विश्व में भाजपा का नाम किया|

लोकसभा चुनाव 2004
2004 की शुरुआत में एनडीए ने चुनाव के छह महीने पहले कार्यक्रम का आयोजन किया था। इसका अभियान “इंडिया शाइनिंग” के नारे के आसपास था। गठबंधन ने खुद को देश के तेजी से आर्थिक परिवर्तन के लिए जिम्मेदार एक सरकारी के रूप में चित्रित करने का प्रयास किया। गठबंधन को हार का सामना करना पड़ा संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के 222 के मुकाबले यह लोकसभा में केवल 186 सीटें जीता था।

लोकसभा चुनाव 2009
दूसरी बार प्रधानमंत्री के रूप में मनमोहन सिंह के साथ यूपीए ने फिर 2009 में भाजपा को दूसरी पार्टी बनाया।

लोकसभा चुनाव 2014
भाजपा गठबंधन को 336 सीटें लेकर एक व्यापक जीत मिली। भाजपा ने सभी वोटों का 31.0% और 282 (51.9%) सीटें जीती हैं। राजग की संयुक्त वोट हिस्सेदारी 38.5% थी।

भाजपा और इसके सहयोगी दलों ने सबसे बड़ी बहुमत सरकार बनाने का अधिकार जीता। 1984 के आम चुनाव के बाद से पहली बार यह था कि एक पार्टी ने दूसरे दलों के समर्थन के बिना सीटों पर जीत हासिल की है।

 एनडीए की राजनीतिक प्रगति की समयरेखा

प्रधानमंत्री मोदी के तहत एनडीए सरकार के प्रमुख पहलुओं में से कुछ

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना को मई 2015 में शुरू किया गया था| जिसमें 18-50 वर्षों के आयु वर्ग के गरीब और वंचितों के लिए एक सामाजिक सुरक्षा प्रणाली बनाने के लिए 2 लाख रुपये का नवीकरणीय जीवन बीमा कवर प्रदान किया गया है| जिसमें सिर्फ रुपये का प्रीमियम था 330|

प्रधानमंत्री जन धन योजना
जुलाई 2014 में शुरू किया गया: सभी परिवारों को वित्तीय सेवाओं में पहुंच सुनिश्चित करने के लिए यह सभी के व्यापक वित्तीय समावेशन को लाने के लिए एक राष्ट्रीय मिशन है।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना
मई 2016 में शुरू की गई: इसका उद्देश्य 2016-17 से 2018-2019 तक 3 वर्ष से कम गरीबी रेखा (बीपीएल) परिवारों से महिलाओं को मुफ्त 5 करोड़ की रसोई गैस (एलपीजी) कनेक्शन प्रदान करना है।

प्रधानमंत्री आवास योजना, शहरी
जून 2015 में शुरू किया गया: इसका उद्देश्य आवास के अंतर को संबोधित करना और 2022 तक “सभी के लिए आवास” के लक्ष्य को पूरा करना है| जिसमें हर शहरी गरीबों को घर उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।

सुलभ भारत अभियान
दिसंबर 2015 में शुरू किया गया: निर्मित पर्यावरण, परिवहन, और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) पारिस्थितिकी तंत्र में विकलांग लोगों के लिए सार्वभौमिक पहुंच बनाने का लक्ष्य। अभियान में एक सर्वसमावेशक समाज का निर्माण करने का दृष्टिकोण है| जिसमें विकलांग व्यक्तियों के विकास और विकास के लिए समान अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं| ताकि वे उत्पादक, सुरक्षित और प्रतिष्ठित जीवन जी सकें।

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना
मई 2015 में शुरू किया गया: इसका उद्देश्य 18 से 70 वर्ष के आयु वर्ग के गरीब और वंचित लोगों के लिए एक बहुत ही सस्ती बीमा योजना प्रदान करना है| जिसमें बैंक खाता 12 रुपये प्रतिवर्ष प्रीमियम के साथ होगा| आकस्मिक मृत्यु और पूर्ण विकलांगता के लिए 2 लाख रुपये और आंशिक विकलांगता के लिए 1 लाख के जोखिम कवरेज के साथ।

IT डिपार्टमेंट ने लांच की सुविधा, अब ऐसे लिंक करें अपने आधार कार्ड को अपने पैन कार्ड से

नयी दिल्ली : IT डिपार्टमेंट ने अभी अभी एक नयी इ-सुविधा लांच की है जिसके तहत अब आप काफी आसानी से अपने आधार कार्ड को अपने पैन कार्ड से लिंक कर सकते हैं.

डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर एक नया लिंक डाला गया है जिसपर क्लिक कर के कोई भी बड़ी आसानी से आधार कार्ड को पैन कार्ड से लिंक कर सकता है.

इसमें आपको अपना पैन कार्ड नंबर तथा अपना आधार कार्ड नंबर डालना होता है और बस चुटकी में आपका आधार आपके पैन कार्ड से लिंक हो जाता है.

ऐसे करें अपने आधार को पैन कार्ड से लिंक

1.सबसे पहले आप इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट http://incometaxindiaefiling.gov.in/eFiling/ पर जाएं
2. बायीं तरफ लिंक आधार नाम का एक लिंक होगा जिसपर क्लिक करें
3. अब एक नया पेज खुलेगा जो ऐसा होगा

link aadhar pan4. इस पेज पर अपना नाम (जो आधार कार्ड पर अंकित है) लिखें
5. अपना पैन कार्ड डालें
6. अपना आधार कार्ड डालें और कैपचा को भरें
7.फिर सबमिट बटन पर क्लिक करें

अगर आपने सही जानकारी भरी है तो फाइनल पेज पर दिख जाएगा

aadhar pan link

ध्यान रहे

यदि आपने इनफार्मेशन भरते समय कोई छोटी मोटी गलती की है, तो वेबसाइट से आपके रजिस्टर्ड मोबाइल पर एक OTP आएगा जिसे भर कर आप आधार को पैन कार्ड से लिंक करने की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं.

भारत सरकार ने सभी टैक्स भरने वालों के लिए आधार कार्ड का होना अनिवार्य कर दिया है. साथ ही साथ पैन कार्ड पाने से पहले आपका आधार कार्ड बना होना चाहिए, यह भी ज़रूरी कर दिया गया है.

…तो क्या पेट्रोल-डीजल की गाड़िया हो जाएँगी बेकार

जिस तरह पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उतार-चढ़ाव आता है| लोग उतने ही तनाव में आ जाते है| आये भी क्यों नहीं इसका सीधा सम्बन्ध लोगो की रोजमर्रा की जरूरतों पर जो है| कितना अच्छा होगा कि हम रोज की बढ़ती-घटती कीमतों की परेशानी से दूर हो जाएँ| कितना अच्छा होगा कि पेट्रोल-डीजल कि उपयोगिता ठीक वैसे ही ख़त्म हो जाये. जैसे बाजार से 500 और 1000 के नोट गायब हो गए|

...तो क्या पेट्रोल-डीजल की गाड़िया हो जाएँगी बेकार

नीति आयोग बंद कर सकता है पेट्रोल-डीजल की कारें

यदि सब कुछ सही चलता रहा तो सरकार की नई नीतियों के चलते 2032 तक देश में चलने वाला हर वाहन इलेक्ट्रिक होगा| नीति आयोग ने ऑटो कम्पनियो को निर्देश दिया है कि 2018 तक अपने आपको बैट्री प्लांट पर शिफ्ट कर दे| इससे देश को काफी फायदा पहुंचने की उम्मीद है| नेशनल इंस्टिट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मेशन इण्डिया (NITI) भारत सरकार का थिंक टेंक है| यह आयोग सरकार को भविष्य से जुड़े कई सुझाव देता है तथा उन्हें पूरे करवाने में सरकार की सहायता करता है|

आने वाले समय में पर्यावरण सम्बंधित परेशानिया बढ़ेंगी| जिनके मद्देनज़र अभी से हमें सोचें की जरुरत है| यह कहना के नीति आयोग के एक अधिकारी का| यह फैसला तब आया है जब पारंपरिक ईंधन पर चल रही कार की बिक्री ने वित्त वर्ष 2016-17 में 30 लाख का आंकड़ा पार किया है। नीति आयोग ने 90 पेज की रिपोर्ट में कहा है कि 2018 में पेट्रोल-डीजल वाहनों से जो कर वसूली हो| उसे बैटरी प्लांट और इलेक्ट्रिक चार्जिंग पॉइंट बनाने का सुझाव दिया है| उन्होंने कहा है कि यह संभव है कि पुरे सिस्टम को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों पर शिफ्ट किया जा सकता है|