हज 2018: इसी माह होगी जारी नई हज नीति : मुख्तार अब्बास नकवी

 

समुद्री रास्ते से हज को पुनः शुरू किया जाएगा

मुंबई: अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि नई हज नीति -2018 इसी महीने जारी कर दी जाएगी और अगले साल से हज का सफर इसी नई नीति के अनुसार निर्धारित किया जाएगा। श्री नकवी ने यहां हज हाउस में हज 2017 समीक्षा बैठक और हाजियों के लिए आयोजित 22 वें प्रशिक्षण शिविर में बताया कि हज नीति -2018 पर फैसला करने के लिए उच्चस्तरीय समिति अपनी रिपोर्ट तैयार करने के अंतिम चरण में है और इसी महीने यह नीति जारी कर दी जाएगा।
हज का खर्च आधा हो जाएगा:केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नक़वी ने कहा कि नई हज नीति उद्देश्य हज पूरी प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाना है और इसमें हज यात्रियों के लिए विभिन्न सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जाएगा। श्री नकवी ने कहा कि इस नई हज नीति के मुख्य बिंदुओं में समुद्री रास्ते से हज को पुनः शुरू करना भी शामिल है। तीर्थयात्रियों मुंबई समुद्री मार्गों के माध्यम से जेद्दा जाने का सिलसिला 1995 में रुक गया था। जहाज (समुद्री रास्ते) से तीर्थयात्रियों को भेजने पर यात्रा से संबंधित खर्च लगभग आधा हो जाएगा।
सऊदी सरकार बातचीत जारी :अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ने कहाकि समुद्री रास्ते से हज के संबंध में सऊदी अरब की सरकार से भी बातचीत जारी है। श्री नकवी ने कहा कि हज 2017 के लिए अल्पसंख्यक मंत्रालय ने हज कमेटी ऑफ इंडिया और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ तैयारियां समय से बहुत पहले ही पूरी कर ली थीं ताकि हज को आसान बनाया जा सके।

सलीम सुलेमान के गाने पीएम ने की तारीफ़

नई दिल्ली: भारतीय सशस्त्र बलों को समर्पित है म्यूजिक डायरेक्टर जोड़ी सलीम-सुलेमान के देशभक्ति गीत ‘मेरा देश ही धरम’ की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की तारीफ. प्रधानमत्री मोदी ने ट्वीट किया, “बहुत ही प्यारा गाना, सलीम भाई और सुलेमान भाई, आप ‘मेरा देश ही धरम’ वीडियो के माध्यम से बहुत मजबूत संदेश दे रहे हैं.”सलीम ने ट्वीट किया था, “मैं एक भारतीय हूं, मेरा देश ही धरम, इस गीत के सूत्रपात के लिए नरेंद्र मोदी जी का शुक्रिया.”

5 अहम् बिंदु जो साबित करते हैं कि योगी सरकार ने डॉ. कफील को बलि का बकरा बना दिया

उत्तरप्रदेश के गोरखपुर में इंसेफेलाइटिस से अचानक हुई 66 से अधिक बच्चों की मौत ने देश भर को दहला दिया. पूरे देश से एक स्वर में दोषियों को पकड़ने की मांग हुई परन्तु योगी आदित्यनाथ की सरकार ने बच्चों को बचाने वाले डॉक्टर कफील अहमद खान पर ही एक्शन ले लिया. सोशल मीडिया पर तरह तरह के आरोपों का दौर शुरू हो गया.

परन्तु यह कोई नहीं जानता कि इन आरोपों में कितना दम है. आइये जानते हैं कि उत्तरप्रदेश की सरकार ने क्या सचमुच दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की है या फिर एक नए विवाद को जन्म दे कर मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाया है.

सोशल मीडिया पर उत्तरप्रदेश सरकार के समर्थकों ने कमोबेश एक जैसे ही आरोप डॉक्टर कफील पर लगाए हैं. जिनकी पड़ताल हिन्दीवार्ता ने विस्तृत रूप से की.

1. प्राइवेट क्लिनिक चलाते हैं

खान पर आरोप है कि वो अपना प्राइवेट क्लिनिक चलाते हैं, ये आरोप हास्यपद इसलिए हैं क्यों कि देश का कानून उन्हें इस बात कि इजाजत देता है.

अगस्त 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सरकारी डॉक्टर द्वारा अपना प्राइवेट क्लिनिक चलना कोई अपराध नहीं. भारत का लगभग हर सरकारी डॉक्टर अपना प्राइवेट क्लिनिक चलाता है.

हालाँकि एक बात गौर करने वाली है कि कुछ ही दिनों पहले डॉक्टर कफील ने शपथपत्र दायर किया था जिसमें साफ़ साफ़ लिखा था कि वह उत्तरप्रदेश सरकार के अधीन कार्य करते समय प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं करेंगे.

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अब यह देखना महत्वपूर्ण है कि क्या उन्होंने इसका उल्लंघन किया? यदि हाँ तो यह एक दोष है परन्तु बच्चों की मौत का इससे क्या वास्ता?

यहां सबसे बड़ी बात ये है कि डॉक्टर कफील के क्लिनिक चलाने की वजह से बच्चों की मौतें नहीं हुई. हादसे के समय डॉक्टर कफील वहाँ मौजूद थे और मरीजों की देखभाल कर रहे थे और इसके पर्याप्त सबूत भी हैं.

2. रेप के आरोपी हैं

एक आरोप यह भी लगाया जा रहा है कि डॉक्टर कफील पर रेप के आरोप हैं. हालाँकि इन सभी आरोपों को कोर्ट ने निराधार बता कर बंद कर दिया था परन्तु किसी व्यक्ति के जीवन की घटनाओं को इस दुर्घटना से जोड़कर देखना बेवकूफी नहीं तो और क्या है?

3. ऑक्सीजन सिलिंडर की चोरी किया करते थे

डॉक्टर खान पर यह भी आरोप है कि वह पूर्व में BRD अस्पताल से ऑक्सीजन की चोरी किया करते थे. यदि ऐसा है तो आखिर आजतक उनपर कोई केस दर्ज क्यों नहीं हुआ. और सबसे अहत्वपूर्ण बात ये है कि आखिर वो अस्पताल के बड़े ऑक्सीजन टैंक से ऑक्सीजन चुराते कैसे थे?

क्या वो लिक्विड ऑक्सीजन को बोतल में भर के घर ले जाते थे ?

क्यूंकि अस्पताल के जंबो सिलिंडर को उठाने के लिए तो ट्रक की आवशयकता पड़ती और ये काम चोरी छुपे तो किया नहीं जा सकता है.

4. खुद को मीडिया के सामने प्रमोट किया

योगी समर्थकों के अनुसार डॉक्टर कफील ने खुद को मीडिया के सामने पेश किया और बिना कोई काम किये मीडिया में खुद को मसीहा की तरह पेश किया.

परन्तु गोरखपुर के BRD अस्पताल के लोगों से बात करने पर साफ़ पता चलता है कि जब हॉस्पिटल में आधी रात को हाहाकार मचा तब डॉक्टर कफील सीधा वहां पहुंचे और मदद करने में आगे रहे. रात के 3 बजे जब मीडिया अस्पताल पहुंची तब भी कफील वहां पाए गए.

सीमा सुरक्षा बल ने भी इसपर पर्दाफाश किया है. SSB के डग के अनुसार त्रासदी के दिन डॉक्टर कफील उनके पास आये और उनसे ट्रकों की मांग की ताकि ऑक्सीजन सिलेंडरों को अस्पताल तक पहुँचाया जा सके. 10 अगस्त की रात को SSB के DIG ने ट्रक के साथ 11 जवान भी भेजे. यह सब डॉक्टर कफील के कहने पर हुआ.

कफील के प्रयासों से ही 3 जंबो सिलेंडरों की व्यवस्था हो सकी वरना मरने वालों की संख्या अधिक होती.

5. जानकारी रहने के बावजूद ऑक्सीजन वेंडर को पेमेंट नहीं किया

कुछ आरोप यह भी लग रहे हैं कि डॉक्टर कफील परचेज कमिटी के भी सदस्य थे और उन्होंने ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी के बकाया राशि की जानकारी सरकार को नहीं दी जिससे ऑक्सीजन की सप्लाई बंद हो गयी.

परन्तु योगी जी और उत्तरप्रदेश के स्वस्थ्य मंत्री बार बार यह कह रहे हैं कि अस्पताल में मौतें ऑक्सीजन की सप्लाई रुकने से नहीं हुई. तो फिर कफील के सप्लाई रोकने वाली बात का क्या औचित्य है?

परन्तु एक और बात सामने आयी है कि ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली पुष्पा सेल्स ने बकाया राशि के भुगतान के लिए बार बार पत्र लिखा है और ये पत्र उत्तरप्रदेश सरकार के बाल विकास मंत्री को भी लिखा गया है.

योगी सरकार के मंत्री को लिखा गया पत्र
योगी सरकार के मंत्री को लिखा गया पत्र

हर पत्र की एक कॉपी गोरखपुर के जिलाधिकारी को भी भेजी गयी थी. इतना सब होने के बावजूद योगी सरकार इस बात से अनजान कैसे थी?

सबसे बड़ा खुलासा तो 30 जुलाई को शहर के अखबार हिन्दुस्तान ने साफ साफ़ यह चेतावनी दी थी कि BRD अस्पताल की ऑक्सीजन की सप्लाई बंद की जा सकती है.

News About Oxygen stock
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इन सब के बावजूद योगी सरकार के मंत्री या प्रदेश के अधिकारीयों ने कोई एक्शन नहीं लिया और जिम्मेदार कफील खान को ठहरा दिया गया?

 

 

टेरर फंडिंग: कश्मीर में 12 स्थानों पर एनआईए ने की छापेमारी

श्रीनगर: टेरर फंडिंग के खिलाफ एनआईए ने जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर, हिन्दवाड़ा और बारामूला में कुल 12 स्थानों पर छापेमारी की. बारामूला जिले में अलगाववादी संगठन हुर्रियत कांफ्रेंस से जुड़े लोगों के रिश्तेदारों के ठिकानों पर भी छापेमारी कर रही है।श्रीनगर में एक व्यापार के 2 ठिकानों पर भी छापेमारी की जा रही है। बता दें कि एनआईए पिछले कुछ महीने से टेरर फंडिंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है। एजेंसी अब तक इस संबंध में कई लोगों से पूछताछ कर चुकी है तो कुछ को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। अब तक अलगाववादी संगठन हुर्रियत कांफ्रेंस के 7 नेताओं को गिरफ्तार किया गया है। जिन्हें गिरफ्तार किया गया है उनमें शब्बीर शाह, फारूक अहमद डार, नईम खान, शाहिद उल, अल्ताफ फटोस, मेराज उद्दीन, अयाज अकबर शामिल हैं।

क्या नेहरू ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को रोकने की कोशिश की थी?

नई दिल्ली: देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को रोकने की पहली कोशिश पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने संविधान के पहले संशोधन के ज़रिए की थी। यह दावा वरिष्ठ पत्रकार अनंत विजय ने साहित्य अकादमी द्वारा ‘मेरी नज़र में स्वतंत्रता का मतलब’ विषय पर आयोजित सेमिनार में किया। स्वतंत्रता की 70 वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित इस संगोष्ठी में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित अंग्रेजी के मशहूर कवि कैकई दारूवाला, भारतीय ज्ञान पीठ के निदेशक लीलाधर मंडलोई, वरिष्ठ कवि प्रयाग शुक्ल, प्रसिद्ध कथाकार चित्रा मुदगल, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित प्रतिष्ठित नाटककार असगर वजाहत, दलित लेखक शरण कुमार लम्बाले आदि ने भाग लिया।
टीवी पत्रकारिता से जुड़े रहे श्री विजय ने कहा कि पंडित नेहरू जब प्रधानमंत्री थे तो दो पत्रिका ऑर्गनाइजर और क्रॉस रोड उन पर बहुत ज्यादा आलोचना करते थे तो उनके खिलाफ मुकदमा सुप्रीम कोर्ट तक गया था। इसका विरोध केवल एक व्यक्ति श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने किया था लेकिन इस बात के लिए मुखर्जी को कभी याद नहीं किया गया और इस बात को दबा दिया गया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाने की चार बड़ी कोशिशें हुईं और यह काम कांग्रेस ने किया। दूसरी कोशिश इंदिरा गांधी ने आपातकाल में, तीसरी कोशिश राजीव गांधी ने प्रेस बिल के रूप में वे असफल रहे, चौथी कोशिश मनमोहन सिंह ने केबल टीवी बिल के रूप में किया जाता है जो एक एसडीएम एक टीवी चैनल बंद करा सकता था। देश के बुद्धिजीवी वर्ग ने 70 साल में इन सवालों को नहीं उठाया और पुरस्कार नहीं लौटाए लेकिन आज वे आपात जैसी स्थिति होने की बात जरूर कहते हैं।

नेपाल के और करीब आया चीन – बाढ़ पीड़ितों को दी 10 लाख डालर की मदद

भारत-नेपाल के बदलते रिश्तों के बीच चीन ने नेपाल से नजदीकी बढ़ानी शुरू कर दी है. नेपाल आज 3 दशक में आयी सबसे भयानक बाढ़ से जूझ रहा है इस बाढ़ से अबतक 115 लोग मारे जा चुके हैं. और ऐसे में चीन ने नेपाल से रिश्ते मजबूत करने के लिए अपनी चाल चल दी है. चीन ने नेपाल के बाढ़ पीड़ितों के लिए 10 लाख डालर यानि 6.4 करोड़ रूपए दिए हैं जिससे बाढ़ पीड़ितों को तत्काल राहत पहुचायी जा सके.

आपसी रिश्ते मजबूत करने के लिए चीन ने नेपाल के साथ पेट्रोलियम गैस और खदान से सम्बंधित समझौते भी हुए. आरनिको राजमार्ग के पुनर्निमाण और केरूंग-रासुवागार्ही रोड के निर्माण के लिए 15 अरब डॉलर की परियोजना पर समझौता किया है।

चीन और नेपाल ने भविष्य में आपसी व्यापार को बढ़ाने पर भी सहमति दी. चीन के उप-राष्ट्रपति वांग ने नेपाल के पूर्व शाही महल के निर्माण का उद्घाटन किया। शाही महल भी भूकंप में क्षतिग्रस्त हो गया था। भूकंप के दो साल बाद चीन ने इस शाही महल की मरम्मत के लिए आर्थिक मदद दी थी। वांग ने नेपाले के पूर्व प्रधानमंत्रियों केपी ओली और पुष्प कमल दहल “प्रचंड” से भी मुलाकात की।

जब मोदी लाल किले से भाषण दे रहे थे तब चीनी सैनिक भारत में घुसपैठ कर रहे थे

भारत के प्रधानमन्त्री जब 15 अगस्त को लाल किले से भाषण दे रहे थे तब लद्दाख के पानगोंग झील के किनारे चीनी सैनिक भारत में घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे थे जिसपर भारतीय सैनिकों से उनकी हाथापाई हुई. खबर है कि चीनी सेना ने भारतीय सैनिकों के ऊपर पत्थर भी फेंके.

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पानगोंग झील के किनारे की घटना 135 किलोमीटर झील के फिंगर-6 के करीब सुबह 7.30 बजे हुई। इस झील का एक-तिहाई हिस्सा भारत के नियंत्रण में है, बाकी चीन के। भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच मारपीट और झड़प हुई लेकिन गोली नहीं चली। सूत्रों के अनुसार झील के चीनी हिस्से के किनारे बनी सड़क पर 52 ट्रक खड़े देखे गए। हालांकि शाम तक वो ट्रक वहां से चले गए। हालाँकि भारतीय सेना ने इस घटना पर किसी तरह का कमेंट करने से इनकार किया।

भारत और चीन के बीच टेंशन इस कदर बढ़ गयी है कि चीनी सेना ने कल भारतीय स्वतंत्रता दिवस में शामिल होने से इंकार कर दिया. हर साल चीनी सेना पीएलए के स्थापना दिवस एक अगस्त को होने वाली वार्षिक बैठक भी इस साल नहीं हुई। साल 2005 के बाद यह पहली बार हुआ है कि दोनों देशों की सालाना बैठक नहीं हुई हो.

भारतीय सेना के सूत्र ने बताया कि परंपरा के अनुरूप भारतीय सेना ने इस बार भी चीनी सेना को आमंत्रित किया था लेकिन चीनियों की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। चीनी डोकलाम के करीब नाथू ला समेत अन्य चार बैठक स्थलों पर होने वाली वार्षिक बैठक में नहीं शामिल हुए।

लाल किले से पीएम ने पेश किया नोटबंदी, काला धन, बेनामी संपत्ति का डेटा

दिल्ली.आज़ादी की 71वीं सालगिरह पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से चौथी बार लाल किले से तिरंगा फहराया. पीएम ने मन की बात में किया वादा निभाते हुए अपने भाषण को संक्षिप्त में पूरा किया. मोदी ने इस बार सिर्फ 54 मिनट का भाषण दिया, ये उनके प्रधानमंत्री काल का सबसे छोटा भाषण है. अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने नोटबंदी,तीन तलाक़, जीएसटी,गोरखपुर अस्पताल में बच्चों की मौत का ज़िक्र किया.अपने भाषण की शुरुआत उन्होंने जन्म अष्टमी की मुबारकबाद से की.आज पूरा देश आजादी के पर्व के साथ जन्माष्टमी का पर्व भी मना रहा है. इस हफ्ते ही भारत छोड़ो आंदोलन के 75 साल पूरे हुए हैं, ये साल साबरमती आश्रम की शताब्दी का वर्ष है, ये लोकमान्य तिलक के जज्बे का 125 वां वर्ष है. हम इस साल आजादी का 70वां वर्ष मना रहे हैं और 2022 में आजादी के 75 साल. हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता से ही 2022 में भारत का सपना न्यू इंडिया पूरा हो पाएगा.

पीएम के भाषण की ख़ास बातें

गोरखपुर पर बोले: पीएम मोदी ने पिछले गुरुवार को गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुई बच्चों की मौत को उन्होंने आक्सीजन सप्लाई की गड़बड़ी के बजाए प्राकृतिक आपदा करार दिया. शोक जताते हुए कहा कि विपत्ति की इस घड़ी में हम कंधे से कंधा मिलाकर उनके साथ खड़े हैं.

तीन तलाक: पीएम ने तीन तलाक का मुद्दा भी उठाया. तीन तलाक से पीड़ित बहनों ने देश में आंदोलन खड़ा किया, मीडिया ने उनकी मदद की. तीन तलाक के खिलाफ आंदोलन चलाने वाली बहनों का मैं अभिनंदन करता हूं, पूरा देश उनकी मदद करेगा.

नोटबंदी:पीएम ने कहा कि हमने सरकार बनाने के बाद काला धन के मुद्दे पर एसआईटी का गठन किया. तीन साल के भीतर सवा लाख करोड़ से ज्‍यादा काला धन देश में आया है. नोटबंदी के बाद देश छिपा कालाधन सामने आया. तीन लाख करोड़ से ज्‍यादा रुपये बैंकों में आए, यही नहीं नोटबंदी के बाद हमने पौने दो लाख कंपनियों को बंद किया है.

कश्मीर: जम्मू-कश्मीर के बारे में पीएम ने कहा कश्मीर का विकास, उन्नति और उनके सपनों को पूरा करना हमारा संकल्प है. कश्मीर में जो कुछ भी घटनाएं घटती हैं, मुठ्ठी भर अलगाववादी लड़ते हैं. लेकिन ये समस्या ना गाली से सुलझेगी ना ही गोली से सुलझेगी ये समस्या सुलझेगी तो सिर्फ हर कश्मीरी को गले लगाने से ही सुलझेगी.

सर्जिकल स्ट्राइक: मोदी ने कहा जब सीमा पार सर्जिकल स्‍ट्राइक किया गया तो पूरी दुनिया ने सरकार का लोहा माना. उन्होंने कहा कि आतंकवाद हो या घुसपैठ हो हर जगह सुरक्षाकर्मियों और एजेंसियों ने अपना काम किया.
जीएसटी:पीएम मोदी ने कहा कि एक जुलाई से देश में जीएसटी लागू किया गया. इससे ट्रक वालों का 30 फीसद समय बच गया है. व्‍यापार में भी लाभ हुआ है.

बेनामी संपत्ति: मोदी ने कहा कि हमने कम समय में बेनामी संपत्ति पर कार्रवाई की, अभी तक 800 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है.

किसानों के बारे में:मोदी ने कहा कि, हमारे किसान आज रिकॉर्ड फसल उत्‍पादन करके दे रहे हैं. फसल बीमा योजना से सवा करोड़ किसान जुड़े हैं. किसानों के लिए हमनें 21 योजनाएं लागू कीं. जल्‍दी ही बाकी योजनाएं लागू की जाएंगी. हम 2022 तक ऐसा हिंदुस्‍तान बनाएंगे जहां किसान चिंता में नहीं चैन से सोएगा.

राज्य – केंद्र का समन्वय: मोदी ने कहा कि, एक समय था पहले राज्य और केंद्र के बीच में यूरिया, केरोसिन के लिए तनाव होता था. ऐसा लगता था कि केंद्र बड़ा भाई है, राज्य छोटा भाई है. मैं मुख्यमंत्री रहा हूं राज्यों की समस्या और राज्य के महत्व को जानता हूं. अब सारे निर्णय मिलकर हो रहे हैं.

अब तक का सबसे छोटा भाषण

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले साल लाल किले से सबसे लंबा भाषण देने के बाद इस साल अपना अब तक का सबसे छोटा भाषण देकर श्चर्यचकित कर दिया।पिछले साल मोदी ने 96 मिनट का भाषण दिया था, ये सबसे लंबा भाषण था। लेकिन इस साल मोदी ने 57 मिनट के संबोधन में देशवासियों से अपनी बात कही। मोदी से पहले देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने पहले स्वतंत्रता दिवस सामारोह में 15 अगस्त 1947 को 72 मिनट का भाषण दिया था। पिछले महीने मन की बात कार्यक्रम में मोदी ने देशवासियों की सलाह पर वादा किया था अपना संबोधन अधिक लंबा न करते हुये इसे संक्षिप्त रखेंगे.

प्रोटोकॉल तोड़ बच्चों के बीच पहुंचे मोदी

लाल किले पर सम्बोधन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़कर बच्चों से मुलाकात की। लाल किले में मौजूद सभी बच्चों से मिलने पहुंच गए, बस फिर क्या था बच्चों ने भी उन्हें घेर लिया और बधाई दी।जैसे ही पीएम मोदी बच्चों के पास पहुंचे, बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा, सबके बीच में पीएम मोदी से हाथ मिलाने की होड़ मच गई। मोदी ने सबको खुश करने की पूरी कोशिश की और जहां तक हो सका उन्होंने बच्चों के साथ हाथ मिलाया।

राष्‍ट्रपति कोविंद – ‘न्यू इंडिया’ में गरीबी के लिए कोई गुंजाइश नहीं है

दिल्ली: देश के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 71वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देश को संबोधित किया. राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद का राष्ट्र के नाम यह पहला संबोधन था. अपने संबोधन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आजादी के इतिहास के संघर्ष को याद करते हुए ‘न्यू इंडिया’ के विजन को देश के नागरिकों के सामने रखा. राष्ट्रपति ने कहा कि 2022 में हमारा देश अपनी आजादी के 75 साल पूरे करेगा, तब तक ‘न्यू इंडिया’ के लिए के लक्ष्यों को प्राप्त करने का हमारा ‘राष्ट्रीय संकल्प’ है.

president kovind no place for poverty in new india राष्ट्रपति के भाषण के मुख्य अंश :

– देश को ‘खुले में शौच से मुक्त’ कराना – हममें से हर एक की जिम्मेदारी है.
– रोजमर्रा की जिंदगी में भ्रष्टाचार समाप्त करना हम सभी की जिम्मेदारी है.
– जीएसटी को अपने हर काम-काज और लेन-देन में शामिल करना तथा टैक्स देने में गर्व महसूस करने की भावना को प्रसारित करना हम सभी की जिम्मेदारी है.
– न्यू इंडिया’ का मतलब हर परिवार के लिए घर, मांग के मुताबिक बिजली, बेहतर सड़कें और संचार के माध्यम, आधुनिक रेल नेटवर्क, तेज और सतत विकास.
– ‘न्यू इंडिया’ एक ऐसा समाज हो जो भविष्य की ओर तेजी से बढ़ने के साथ-साथ, संवेदनशील भी हो
– ‘न्यू इंडिया’ का मतलब है कि हम जहां पर खड़े हैं वहां से आगे जाएं. तभी हम ऐसे ‘न्यू इंडिया’ का निर्माण कर पाएंगे जिस पर हम सब गर्व कर सकें.
– इस ‘न्यू इंडिया’ में हर व्यक्ति की पूरी क्षमता उजागर हो सके और वह समाज और राष्ट्र के लिए अपना योगदान कर सके. ‘न्यू इंडिया’ में गरीबी के लिए कोई गुंजाइश नहीं है.
– नोटबंदी के बाद से देश में ईमानदारी की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिला है. ईमानदारी की भावना दिन-प्रतिदिन और मजबूत हो, इसके लिए हमें लगातार प्रयास करते रहना होगा.
– मैं सब्सिडी का त्याग करने वाले ऐसे परिवारों को नमन करता हूं. हमें ऐसे परिवारों से प्रेरणा लेनी चाहिए.

गोरखपुर त्रासदी: इस्तीफा मांगने पर बोले अमित शाह, पहली बार ऐसा हादसा नहीं हुआ है

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने गोरखपुर हादसे के बाद एक विवादित बयान दे दिया है. कांग्रेस द्वारा योगी के इस्तीफा पर जब उनसे सवाल किया गया तब श्री अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस का काम ही है इस्तीफा मांगना, इतने बड़े देश में बहुत से हादसे हुए हैं, पहली बार ऐसा कोई हादसा नहीं हुआ.

योगी आदित्यनाथ का बचाव करते हुए अमित शाह ने कहा “हम कांग्रेस कि तरह बिना जांच के गलती किसी पर नहीं थोपते. योगी जी ने जांच के आदेश दे दिए हैं और नतीजे आने पर हम कार्यवाही करेंगे. योगी जी ने टाइम बाउंड जांच रखा है. ये हादसा है, ये गलती है. हम गरीबों के लिए काम करते रहेंगे.”

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अमित शाह के इस बयान से बाद घमासान मचना तय है. सोशल मीडिया पर उनके बयान पर लोग बिफर पड़े हैं. एक ट्विटर यूजर के अनुसार- हादसे पहली बार नहीं हो रहे परन्तु जिमेदारी तो तय होनी चाहिए. ऐसे बेशर्मी से बयान देना भाजपा अध्यक्ष का घमंड दिखाता है.

आपको बता दें कि पिछले दिनों गोरखपुर में ऑक्सीजन सप्लाई बंद हो जाने के बाद एक साथ ३० से अधिक बच्चों कि मृत्यु हो गयी. जापानीज इंसेफेलाइटिस से लगातार हो रही इन मौतों पर अमित शाह से सवाल पूछे जा रहे थे जिसके जवाब पर उन्होंने यह बयान दिया.