किस समय राखी नहीं बांधनी चाहिए और क्यों?

Rakhi bandhne ka sahi samay kaun sa hai?

भाई बहन के अमिट प्यार का त्यौहार रक्षाबंधन आने वाला है. इस दिन भाई की कलाई पर राखी बांध कर बहन अपना स्नेह दिखाती है वहीँ भाई इस प्रेम के बदले जीवन भर बहन की रक्षा का वचन देता है. देखा जाये तो भारत में मनाये जाने वाले सैकड़ों त्योहारों में यह त्यौहार सबसे अनोखा है. लेकिन क्या आप जानते हैं राखी के बांधने का भी एक शुभ समय है जिस समय के अलावा राखी नहीं बंधी जानी चाहिए? अगर आप नहीं जानते तो आइये हम आपको बताते है की राखी किस समय बांधनी चाहिए.

raksha bandhan rakhiश्रवण नक्षत्र वर्ष में श्रावण की पूर्णिमा के दिन पूर्ण चंद्रमा से संयोग करता है। यही कारण है कि इसी नक्षत्र में रक्षा बंधन मनाया जाता है। 27 नक्षत्रों में एक श्रवण नक्षत्र को अति शुभ माना गया है, क्योंकि इसके आराध्य भगवान विष्णु हैं।
श्रवण नक्षत्र सभी प्रकार के अवरोधों को समाप्त कर सभी कार्यों को शुभ माना जाता है। भद्रा में राखी क्यों नहीं बांधी जाती है, ये बहुत कम लोग जानते हैं।

दरअसल, पंचाग के पांच भागों में से एक भाग करण भी होता है, जो शुभ व अशुभ दोनों ही प्रकार का होता है। ज्योतिष के अनुसार इस कारण का निवास पृथ्वी, स्वर्ग और पाताल में होता है। जब चंद्रमा मेष, वृषभ, मिथुन और वृष्चिक राशि में आता है, तब भद्रा का अशुभ प्रभाव हमारे किए गए कार्यों पर होता है। जिससे हमें कार्यों का पूरा फल प्राप्त नहीं होता है।
कन्या, तुला, धनु या मकर राशि में जब चंद्रमा होता है, तब भद्रा का वास पाताल में होता है यानी इस कारण का अशुभ प्रभाव मनुश्यों के कार्यों पर नहीं पड़ता है।

भद्रा को अशुभ मानने के पीछे हमारे शास्त्रों में एक कथा भी है। इस कथा के अनुसार एक बार राक्षसों ने देवताओं को युद्ध में हरा दिया। तब शिवजी ने क्रोध किया व उनके गुस्से से एक स्त्री प्रकट हुई, तो प्रेत की सवारी करती थी। उसने सभी दैत्यों का संहार कर दिया और देवताओं को विजय प्राप्त हुई।

विजयी होने के बाद देवताओं ने प्रसन्न होकर उसका नाम ‘भद्रा’ रखा और उसको ज्योतिष करणों में स्थान दिया। वह एक तरह की तामसिक शक्ति थी व प्रेत उसकी सवारी थी। इसलिए भद्राकाल में शुभ काम नहीं किए जाते हैं। यही कारण है कि भद्रा में राखी भी नहीं बांधी जाती है।

चतुर्मास में क्यों नहीं होते विवाह जैसे शुभ कार्य?

Chaturmas mein vivah aur shubhkam kyon nahin karne chahiye?

हिन्दू धर्म में चतुर्मास में विवाह निषेध माने गए हैं। इसका कारण यह है कि धार्मिक शास्त्रों के अनुसार यह मान्यता है कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से भगवान चार मास तक क्षीर सागर में शयन करते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं।

Chaturmas mein vivah aur shubhkam kyon nahin karne chahiyeपुराण के अनुसार यह भी कहा गया है कि भगवान श्रीहरि ने वामन रूप में दैत्य बलि के यज्ञ में तीन पग दान के रूप में मांगे। भगवान ने पहले पग में संपूर्ण पृथ्वी, आकाश और सभी दिशाओं को ढक लिया। अगले पग में सम्पूर्ण स्वर्ग लोक ले लिया। तीसरे पग में बलि ने अपने आप को समर्पित करते हुए सिर पर पग रखने को कहा।

इस प्रकार के दान से भगवान ने प्रसन्न होकर पाताल लोक का अधिपति बना दिया और कहा वर मांगो। बलि ने वर मांगते हुए कहा कि भगवान आप मेरे महल में नित्य रहें। बलि के बंधन में बंधा देख उनकी भार्या लक्ष्मी ने बलि को भाई बना लिया और बलि से भगवान को वचन से मुक्त करने का अनुरोध किया।

तभी से भगवान विष्णु जी द्वारा वर का पालन करते हुए तीनों देवता 4-4 माह पाताल में निवास करते हैं । इसी वजह से इन दिनों शादी ब्याह पर रोक रहती है। साथ ही इन चार माह में बादल और वर्षा के कारण सूर्य चन्द्रमा का तेज क्षीण हो जाना उनके शयन का ही द्योतक होता है।

इस समय में पित्त स्वरूप अग्नि की गति शांत हो जाने के कारण शरीरगत शक्ति क्षीण हो जाती है।

आधुनिक युग में वैज्ञानिकों ने भी खोजा है कि वर्षा ऋतु में विविध प्रकार के रोगाणु उत्पन्न हो जाते हैं। साथ ही इन दिनों ही कई बड़े त्यौहार आते हैं। त्यौहार व शादी दोनों क उल्लास और हर्श समय समय पर बना रहे। इसीलिए चार माह तक शादी ब्याह नहीं किए जाते हैं।

घर से निकलते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

Ghar se nikalte samay kin baton ka dhyan rakhna chahiye?

जब भी हम घर से किसी खास कार्य को लक्ष्य बनाकर निकलते हैं, उस वक्त सीधा पैर पहले बाहर रखने से निश्चित ही आपको कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।

ghar se nikalte vaqt kin baton ka dhyaanयह परंपरा काफी पुरानी है, जिसे हमारे घर के बुजुर्ग समय समय पर बताते हैं। इस प्रथा के पीछे मनोवैज्ञानिक और धार्मिक कारण दोनों ही हैं।

धर्म शास्त्रों के अनुसार सीधा पैर पहले बाहर रखना शुभ माना जाता है। सभी धर्मों में दाएं अंग को खास महत्व दिया गया है। सीधे हाथ से किए जाने वाले शुभ कार्य ही देवी देवताओं द्वारा मान्य किए जाते हैं। देवी देवताओं की कृपा के बिना कोई भी व्यक्ति किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त नहीं कर सकता।

इसी कारण सभी पूजन कार्य सीधे हाथ से ही किए जाते हैं। जब भी घर से बाहर जाते हैं तो सीधा पैर ही पहले बाहर रखते हैं ताकि कार्य की ओर पहला कदम शुभ रहेगा तो सफलता अवश्य प्राप्त होगी।

इस परंपरा के पीछे एक तथ्य यह भी है कि इसका हम पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है। सीधा पैर पहले बाहर रखने से हमें सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है और मन प्रसन्न रहता है। इस बात का हम पर दिनभर प्रभाव रहता है। बाएं पैर को पहले बाहर निकालने पर हमारे विचार नकारात्मक बनते हैं।

हमारा पारम्परिक स्वास्तिक चिन्ह भी दाहिने ही घूमता है। हनुमान जी की आरती में भी है ‘बायें भुजा सब असुर संहारे, दाहिने भुजा सब संत जन उबारे’ अर्थात् अशुभ काम बायें और शुभ काम दाहिने हाथ से किया जाता है।

क्या है बच्चों से जुड़े इन अंध-विश्वासों के पीछे की असली वजह?

साधारण तौर पर देखा जाता है कि जब भी कोई स्त्री गर्भवती होती है तो उसकी चाल-ढाल, खान-पान को देखकर परिवार के बड़े-बुजुर्ग गर्भस्थ शिशु के लिंग का अंदाजा लगा लेते हैं। अगर आप इस अंदाजे पर यकीन कर लेते हैं तो ये खुद को छलने जैसी ही बात है।

ऐसे ही कुछ भ्रामक मान्यताएं हैं जो बच्चे के जन्म के बाद अकसर देखी और सुनी जाती हैं। आज हम आपको उन्हीं से परिचित करवाने जा रहे हैं।

बहुत से लोग आज भी इस भ्रांति को अपनाते हैं कि नवजात बच्चे की तस्वीर नहीं खींचनी चाहिए क्योंकि ऐसा करने से उसकी आंखों की रोशनी जा सकती है। निश्चित तौर पर ये एक मनगढ़ंत तथ्य ही है।Kya Hai Bacchon Se Jude In Andh-Vishwason Ke Piche Ki Asli Wajah

आपने देखा होगा आजकल तो सभी माता-पिता बच्चे के जन्म लेते ही उसकी फोटो सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर डाल देते हैं, तो क्या आप ये कहेंगे कि वो अपने बच्चे की सेहत को लेकर गंभीर नहीं हैं।

बहुत से परिवारों में आज भी यह परंपरा निभाई जाती है जिसके अंतर्गत नवजात शिशु को मखमल के कपड़े में बांधा जाता है। इसके पीछे यह माना जाता है कि मखमल का कपड़ा बहुत मुलायम होता है और बच्चा इसमें खुश रहता है।

लेकिन आप एक बात बताइए, बच्चा तो अपनी परेशानी नहीं बता सकता लेकिन हम तो ये बात समझते हैं कि वे उस कपड़े में बंधकर, हिलडुल नहीं पाएगा ऐसे में जाहिर है कि वह पूरी तरह असहज हो जाएगा।

हिन्दू धर्म में बच्चे के जन्म के तीसरे साल मुंडन प्रथा निभाई जाती है। मुंडन से पहले पहले बच्चे के सिर पर कंघी करना सही नहीं माना गया है।

इसके पीछे यह माना जाता है कि शिशु की खोपड़ी बहुत कोमल होती है, उस पर कंघी करने से वह अपना आकार बदल सकती है।

अगर वाकई ऐसा है तो आपको किसने कहा कि जिस कंघी को आप प्रयोग में लाती हैं उसी कंघी को अपने बच्चे के सिर पर फेरें। भई मार्केट बच्चों के सामानों से भरा हुआ है, आपको उनके लिए स्पेशल कंघी भी मिल जाएगी।

अकसर माताएं या परिवार के बड़े-बुजुर्ग बच्चे के माथे पर काला टीका लगा देते हैं। ऐसा इसलिए ताकि उसे किसी की बुरी नजर ना लगे।

यह किसी भी रूप में लॉजिकल तो नहीं है लेकिन एक काला टीका आपके बच्चे की खूबसूरती नहीं छीन सकता, इसलिए इसमें हर्ज भी क्या है।

आमतौर पर माना जाता है कि बच्चे के सिरहाने के नीचे लोहे की वस्तु रखने से वह नींद में डरता नहीं है।

लेकिन एक बात बताइए क्या वाकई आपको पता है कि आपका बच्चा सपने में क्या देख रहा है?

ऐसा माना जाता है कि बच्चे के सिरहाने के भीतर सरसो के दाने भरने से उसके सिर को सही शेप मिल जाती है?

क्या वाकई!!

सामान्यतौर पर माना जाता है कि जो बच्चे जल्द ही बोलना शुरू नहीं करते उन्हें कौए का झूठा खिलाना चाहिए।

ऐसा करने से वे जल्दी बोलने लगते हैं। देखिए, हर बच्चा दूसरे बच्चे से अलग होता है, उन्हें उनका टाइम दीजिए, सब अपने आप ही हो जाता है।

बच्चे को शीशा नहीं दिखाना चाहिए, ऐसा करने से उसे बुरे सपने आने लगते हैं।

क्या अजीब बात है, बच्चा खुद इतना प्यारा है, शीशे में अपनी शक्ल देखकर उसे कैसे बुरे सपने आ सकते हैं।

माना जाता है कि बच्चे की कलाई पर नजरिया बांधाना उन्हें बुरी नजर और नकारात्मक ऊर्जाओं से बचाता है।

अब वाकई ऐसा होता है या नहीं, ये तो नहीं पता लेकिन एक बात तो है ये नजरिये बच्चे की कलाई पर लगते बहुत प्यारे हैं।

समय के साथ-साथ मान्यताओं का आकार भी बदलता जा रहा है, लेकिन फिर भी कहीं ना कहीं इन्हें स्वीकारा गया है। जब तक ये बच्चे की सेहत या उसके भविष्य पर प्रभाव ना डालें तब तक इन्हें अपनाने में कोई समस्या भी नहीं है।

हर राशि की होती है अलग अलग कमजोरी, जानिये क्या है आपकी राशि की कमजोरी?

Har Rashi Ki Hoti Hai Alag Alag Kamzori, Janiye Kya Hai Aapki Rashi Ki Kamzori?

जन्म के आधार पर राशियों का निर्धारण होता है और राशि के अनुसार स्वभाव का। आज हम आपको राशि के आधार पर ये बताएंगे कि कौन सी राशी वाले व्यक्ति के अंदर कौन सी सबसे बड़ी खामी होती है जो आजीवन उसका पीछा करती है।Har Rashi Ki Hoti Hai Alag Alag Kamzori, Janiye Kya Hai Aapki Rashi Ki Kamzori

मेष राशि

मेष राशि के लोग गलत और गलत और सही को सही कहने में जरा भी नहीं हिचकिचाते। उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि लोग उनके बारे में क्या सोचेंगे। वे किसी भी हाल में अन्याय को बर्दाश्त नहीं कर पाते। हालांकि इन्हें कई बार अपने किए पर पछतावा भी होता है लेकिन वो कहते हैं ना कि ‘अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत’। इस राशि के लोग बौत हद तक सिर्फ और सिर्फ अपने बारे में ही सोचते हैं।

वृषभ राशि

वृषभ राशि के लोग जिद्दी और सख्त मिजाज होते हैं। आप कह सकते एक मनुष्य जितना सख्त हो सकता है वृषभ राशि के लोग उतने होते हैं। भले ही वह महिला है या पुरुष, अगर वे वृषभ राशि के हैं तो वे अपनी राय और मान्यताओं को लेकर काफी जिद्दी हैं। इन्हें अपना कमफर्ट और सम्मान के आगे और कुछ भी नजर नहीं आता।

जिद्दी

आप एक वृषभ व्यक्ति के सामने चाहे कितने भी हाथ-पैर क्यों ना जोड़ लें लेकिन जो चीज इन्हें नहीं पसंद या जहां जाना इन्हें नहीं पसंद, आप कभी इन्हें वहां लेकर नहीं जा सकते।

मिथुन राशि

इस राशि के लोग समय की कीमत को नहीं मानते, इन्हें कभी आप टाइम पर नहीं पाएंगे। इन्हें परिवर्तन बहुत पसंद होता है, शायद ये दिमागी रूप से कंफ्यूज रहते हैं। तभी एक जॉब, एक स्थान यहां तक कि एक जीवनसाथी के साथ भी ये काफी समय तक नहीं रह सकते। ये लोग कुछ भी कर गुजर सकते हैं, इनकी इमैजिनेशन पॉवर बहुत तेज होती है।

कर्क राशि

कर्क राशि के लोग बहुत ज्यादा संवेदनशील होते हैं, जितनी ज्यादा संवेदना उतनी ही ज्याद अनिराशा। इस राशि के लोग अंदरूनी तौर पर बेहद निराशावान होते हैं। दुनिया को इनका एक अलग ही चेहरा नजर आता है लेकिन वास्तविक रूप में ये लोग निराशा के साये में हमेशा घिरे रहते हैं। इनके अंदर एक अजीब सा डर हर समय रहता है।

मूडी

कर्क राशि के लोग बहुत ज्यादा मूडी होते हैं, अगर कभी बिना किसी बात कोई आपसे बस यूं ही लड़ बैठे या बहस करने लगे तो जान लीजिए कि वह कर्क राशि के अलावा और कोई नहीं हो सकता। दरअसल ये लोग आपसे नहीं बल्कि अपने जीवन से ही निराश होते हैं।

सिंह राशि

धन को किस तरह और कितनी तेजी के साथ बर्बाद किया जा सकता है यह सिर्फ और सिर्फ सिंह राशि का व्यक्ति ही जानता है। इनके खर्च असीमित होते हैं और साथ ही इन्हें इस बात से कोई फर्क भी नहीं पड़ता कि इनकी कोई सेविंग नहीं है।

विवाहित जीवन

अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति से विवाह करने की योजना बना रहे हैं जो सिंह राशि से संबंध रखता है तो एक बात आपको दिमाग में बैठा लेनी चाहिए कि सिंह राशि के लोगों के ,लिए संबंधों में ‘स्पेस’ का कोई अर्थ है ही नहीं।

कन्या राशि

कन्या राशि वाले व्यक्ति को कभी अपने अंदर खामी नजर नजर नहीं आती और यही उनकी सबसे बड़ी खामी भी है। उन्हें अपनी आलोचना सुनना बिल्कुल पसंद नहीं है, अगर कोई उन्हें कुछ कहता भी है तो उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। कन्या राशि के लोग चुप रहना पसंद करते हैं, इनके दिल की बात कोई नहीं जान सकता।

तुला राशि

तुला राशि के लोग बहुत ज्यादा आलसी माने जाते हैं। कई दिनों तक तो ये लोग बस प्लान बनते हैं और अंत में अपने आलस की वजह से उस प्लान को पूरा नहीं कर पाते। ये लोग सही समय पर सही निर्णय लेने में भी पीछे रह जाते हैं।

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि के लोग ना तो किसी को बहुत जल्दी भूलते हैं और ना ही किसी को मांफ करते हैं। अगर कोई इनके साथ बुरा करता है तो वे उससे बदला लेने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। सच चहे कितना ही बुरा या कड़वा क्यों ना हो, वृश्चिक राशि के लोग सच कहना और सच सुनना ही पसंद करते हैं।

धनुराशि

धनुराशि का व्यक्ति अगर अपने परिवार के प्रति समर्पित नहीं है, उसे अपने निकटजनों के लिए कुछ नहीं करना तो वह एक बहुत अच्छा जुआरी होगा। जुए खेलने के स्थान और तरीके धनुराशि के व्यक्ति को कुछ इस तरह आकर्षित करते हैं जैसे हहद को देखकर मक्खी आकर्षित होती है। वे ये नहीं सोचते कि इससे उनका कितना नुकसान होगा, उन्हें जुआ खेलना है तो वे जरूर खेलेंगे। यही उनकी सबसे बड़ी कमजोरी या खामी है।

मकर राशि

मकर राशि के लोग दिखाते जरूर हैं कि दुनिया उनके बारे में क्या सोचती है, इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन अंदर ही अंदर ये लोग अपनी तारीफ सुनने के लिए तड़पते हैं। इन्हें खुद की तारीफ सुनना पसंद है और ऐसे लोग इन्हें जरा भी नहीं भाते जो इनकी आलोचना करते हैं।

कुंभ राशि

अगर आप किसी कुंभ राशि के व्यक्ति के प्यार में पड़ गए हैं तो जरा संभल जाइए क्योंकि कुंभ राशि का जातक कभी किसी एक के प्रति समर्पित होकर नहीं रह सकता। एक समय के बाद इन्हें नए साथी की तलाश रहती ही है, चाकर भी ये लोग किसी एक के साथ एक निर्धारित समय के बाद नहीं रह सकते।

मीन राशि

मीन राशि के जातकों को समस्याओं को सुलझाने से ज्यादा उस समस्या से भागने में मजा आता है। ये किसी भी बात को बड़े ही सकारात्मक रूप से लेते हैं, इन्हें दुनिया को अपनी ही नजर से देखना पसंद हैं। झूठ ही सही, लेकिन अगर उन्हें वो झूठ पसंद है तो वे सच जानने की जरूरत ही महसूस नहीं करते।

 

जानिये किस राशि के पार्टनर के साथ प्रेम करना आपको पड़ेगा भारी?

Janiye Kis Rashi Ke Partner Ke Sath Prem Karna Apko Padega Bhari?

यूं तो जीवन का दूसरा नाम संघर्ष ही है लेकिन अगर आप भारत की प्राचीन विद्या, ज्योतिषशास्त्र का सहारा लें तो बहुत हद तक इन समस्याओं से बचा जा सकता है। सामान्यतौर पर व्यक्ति अपने जीवन में तीन प्रकार की समस्याओं का सामना करता है।

पहली कॅरियर, दूसरी धन और तीसरी विवाह। ये तीन पहलू सही हों तो काफी हद तक जीवन जीने लायक बन जाता है। ज्योतिष विद्या 12 राशियों और 9 ग्रहों पर आधारित है। आपके जन्म की तारीख, समय और स्थान के आधार पर आपकी जन्मकुंडली बनाई जाती है, जो आपके पूरे जीवन का आइना बन जाती है।Janiye Kis Rashi Ke Partner Ke Sath Prem Karna Apko Padega Bhari

विवाह की बात करें तो इस संबंध में बंधने वाले दो लोगों के बीच सामंजस्य ही इस संबंध की नींव होती है। वैसे तो आजकल कुंडली मिलान का चलन आम हो गया है लेकिन फिर भी पोंगे पंडितों की वजह से लोग भटक जाते हैं और गलत निर्णय ले लेते हैं।

जिन बारह राशियों की बात की जा रही है वह सौरमंडल के नौ ग्रहों पर ही आधारित है। इन राशियों का आपस में मेल ही यह निर्धारित करता है कि संबंधित राशियों के जातकों का एक-दूसरे के साथ प्रेम संबंध या विवाह किस हद तक और कितना सफल रहेगा।

ये बात तो आप कई बार सुन चुके होंगे कि किन-किन राशि के लोग एक-दूसरे के लिए सहयोगी और बेहतरीन जीवनसाथी सिद्ध होंगे। आज हम आपको बताएंगे कौन सी राशियों के लोगों को कभी एक-दूसरे से विवाह नहीं करना चाहिए, अर्थात किन राशियों का मेल एक ब्लंडर बन सकता

मेष और कर्क राशि

मेष राशि के लोग काफी ऊर्जावान और व्यवहारिक होते हैं, जबकि कर्क राशि के जातक बहुत संवेदनशील और भावना प्रधान होते हैं। मौलिक स्वभाव की वजह से इन दोनों लोगों के बीच विवाद और विरोध की संभावना हमेशा बनी रहेगी। दोनों की ही प्राथमिकताएं अलग-अलग होती हैं इसलिए ये मेल कुंठा का कारण बन जाएगा।

कुंभ और कर्क

कुंभ राशि सक्रियता और उत्साह को दर्शाती है। शुरुआत में कर्क राशि का जातक अपने कुंभ राशि के जातक की इन खूबियों की वजह से आकर्षित रहेगा लेकिन धीरे-धीरे उसे ये सब बहुत बोरिंग लगने लगेगा। कर्क राशि के लोग अपने घर से ज्यादा समय तक दूर नहीं रह सकते। उनके लिए ऐसी सक्रियता के कोई मायने नहीं हैं, जो उन्हें घर और परिवार से दूर रखे।

सिंह और वृषभ

वृषभ राशि के जातक स्थायित्व और सुरक्षित वातावरण की तलाश में रहते हैं और सिंह राशि के लोग नई-नई चीजों में हाथ आजमाते हैं। उन्हें दुनिया की हर चीज चाहिए, इसलिए सिंह राशि के जातक कभी स्थायी नहीं रह पाते। अलग-अलग प्राथमिकताएं और स्वभाव इन दोनों को कभी साथ नहीं रहने देता।

वृश्चिक और मेष

दोनों ही राशियों के जातक अपनी-अपनी स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता को लेकर गंभीर हैं। मेष राशि के लोग थोड़े फ्लर्ट नेचर के होते हैं और वृश्चिक राशि के जातक ईर्ष्यालु, इस वजह से इन दोनों के बीच विश्वास नहीं बन पाता और परिणामस्वरूप संबंध ज्यादा लंबा नहीं चल पाता।

मिथुन और कर्क

मिथुन राशि के जातक पूरी तरह संवेदनाहीन होते हैं, उनके लिए भावनाओं का कुछ खास अर्थ नहीं होता, जब ये अपनी बात कहते हैं तो काफी कठोर हो जाते हैं, जबकि कर्क राशि के लोग पूरी तरह संवेदनशील और भावनाओं में बहने वाले होते हैं। इस वजह से ये लोग कभी ना तो प्रेम संबंध को निभा पाते हैं और ना ही विवाहित संबंध को।

सिंह और कन्या

सिंह राशि के लोग धन व्यय करने वाले होते हैं और कन्या राशि के लोग बचत में विश्वास रखते हैं। अगर ये लोग विवाह कर लेते हैं तो बहुत हद तक संभावना है कि इनका संबंध धन संबंधी किसी मसले को लेकर ही टूट जाए।

मकर और तुला

तुला राशि के लोग लेने से ज्यादा देने में भरोसा करते हैं। वे लोग दूसरों को खुश देखकर ही खुश हो जाते हैं, जबकि इसके ठीक उलट मकर राशि के जातक दमन करना और अपने साथी को दबाकर रखने में विश्वास करते हैं। मकर राशि के लोग अपने तुला राशि के जातक के स्वभाव का फायदा उठा जाते हैं। जिसे तुला राशि के लोग ज्यादा समय तक बर्दाश्त नहीं कर पाते।

कुंभ और वृषभ

कुंभ राशि के लोग खुले विचारों वाले होते हैं जबकि वृषभ राशि के जातक अपने साथी को सिर्फ अपने नजदीक देखना चाहते हैं। यही इनके बीच कलह की वजह बनता है।

मीन और सिंह

सिंह राशि के लोग हर हाल में अपने साथी की अटेंशन चाहते हैं। उन्हें इस बात से अंतर नहीं पड़ता कि साथी खुश है या दुखी, उन्हें सिर्फ अपनी बात हमेशा मनवाने की आदत होती है। जबकि मीन राशि के लोग सपनों की दुनिया में रहने वाले होते हैं, जहां ऐसा कुछ नहीं होता।

मकर और धनु

मकर राशि के लोग काफी उदासीन व्यक्तित्व वाले होते हैं जबकि धनु राशि के लोग अपने आसपास सिर्फ खुशियां ही देखना चाहते हैं। उन्हें मकर राशि के लोगों का बोरिंग और उदासीन स्वभाव सहन नहीं होता।

वृश्चिक और कुंभ

कुंभ राशि के जातक हर समय कुछ नया करने के लिए ललचाए रहते हैं। उन्हें जीवन में रोमांच चाहिए। वे एक स्थान पर बैठकर नहीं रह सकते। जबकि इसके ठीक उलट वृश्चिक राशि के लोग हर समय समर्पण और स्थायित्व की तलाश करते हैं।

मिथुन और मीन

मिथुन राशि के लोग स्वतंत्रता चाहते हैं, उन्हें कंट्रोल करने की कोशिश करना मतलब उनके जुड़ाव और लगाव को खो देना है। वहीं मीन राशि के लोग समर्पण चाहते हैं जो मिथुन राशि वालों के लिए असंभव है।

मिथुन और कन्या

ये दोनों ही राशि के जातक जीवन को लेकर अपनी अलग-अलग सोच और दृष्टिकोण रखते हैं। कन्या राशि के लोग काफी गंभीर और व्यवहारिक स्वभाव वाले होते हैं जबकि मिथुन राशि के लोग कभी किसी निर्णय तक पहुंच ही नहीं पाते। इन दोनों का आपस में मेल बैठ पाना मुश्किल है।

हमने आपको ये तो बता दिया कि कौन सी राशि के लोगों को कभी एक-दूसरे के साथ नहीं जुड़ना चाहिए। लेकिन फिर भी अगर आप जुड़ने की सोच रहे हैं तो किसी अच्छे ज्योतिष की सलाह अवश्य लें।

आखिर क्या है मस्तक पर तिलक लगाने के फायदे और नियम?

Akhir Kya Hai Mastak Par Tilak Lagane Ke Fayede Aur Niyam?

हिन्दू धर्म में कुछ ऐसी परंपराएं हैं जिनका महत्व तो बहुत है, लेकिन समय के साथ-साथ वह धूमिल पड़ती जा रही हैं। सिर पर चोटी रखना, पांव में बिछिया पहनना, कान छिदवाना आदि।

जैसे-जैसे हम आधुनिकता और चकाचौंध की तरफ बढ़ रहे हैं ये सभी परंपराएं पीछे छूटती जा रही हैं।

इन्हीं परंपराओं में से एक है माथे पर तिलक धारण करना, जिसे एक समय पहले तक धार्मिक तौर पर बहुत जरूरी माना जाता था।Akhir Kya Hai Mastak Par Tilak Lagane Ke Fayede Aur Niyam

हिन्दू परंपराओं में सिर, मस्तक, गले, हृदय, दोनों बाजू, नाभि, पीठ, दोनों बगल आदि मिलाकर शरीर के कुल 12 स्थानों पर तिलक लगाने का विधान है।

हमारे शास्त्रों में जीवन जीने के सही तरीकों का वर्णन किया गया है, संबंधों, शिष्टाचार और परंपराओं को बड़ी बारीकी के साथ उकेरा गया है। चलिए जानते हैं हमारे शास्त्र तिलक लगाने को लेकर क्या कहते हैं।

जब भी हम मंदिर जाते हैं तो हनुमान जी, देवी मां के चरणों से सिंदूर लेकर माथे पर लगाते हैं। ऐसा करना बहुत लाभदायक है क्योंकि सिंदूर उष्ण होता है।

शास्त्रों के अनुसार महिलाओं को अपने माथे पर कस्तूरी रंग की बिंदी अथवा सिंदूर लगाना चाहिए।

शास्त्रों के अनुसार सिंदूर धारण करने से पहले कुछ बातों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए जैसे नहा धोकर वस्त्र धारण करने के पश्चात उत्तर दिशा की ओर मुख करके माथे पर तिलक लगाया जाना चाहिए।

ऐसा कहा गया है कि श्वेत चंदन, लाल चंदन, कुमकुम, विल्वपत्र, भस्म, आदि का तिलक करना शुभ है। जो भी व्यक्ति बिना तिलक लगाए भोर या संध्या का हवन करता है उसे इसका फल नहीं प्राप्त होता।

तिलक लगाने का एक और मुख्य नियम यह है कि एक ही व्यक्ति या साधक को उर्ध्व पुण्डर और भस्म से त्रिपुंड नहीं लगाना चाहिए।

चंदन से एक ही साधक को उर्ध्व पुण्डर तथा भस्म से त्रिपुंड नहीं लगाना चाहिए।

माथे के ठीक बीच के हिस्से को ललाट बिंदु कहते हैं, यह भौहों का भी मध्य भाग है। तिलक हमेशा इसी स्थान पर धारण किया जाना चाहिए।

तिलक लगाने के लिए भिन्न-भिन्न अंगुलियां का प्रयोग अलग-अलग फल प्रदान करता है। अगर तिलक अनामिका अंगुली से लगाया जाता है तो इससे शांति मिलती है।

मध्यमा अंगुली से तिलक करने पर आयु में बढ़ोत्तरी होती है, इसके अलावा अंगूठे से तिलक करना पुष्टिदायक माना गया है।

विष्णु संहिता में इस बात का उल्लेख है कि किस प्रकार के कार्य में किस अंगुली से तिलक लगाना उचित होता है।

किसी भी तरह के शुभ और वैदिक कार्य में अनामिका अंगुली, पितृ कार्य में मध्यमा, ऋषि कार्य में कनिष्ठिका तथा तांत्रिक क्रियाओं में प्रथम यानि तर्जनी अंगुली का प्रयोग किया जाना चाहिए।

उपरोक्त विधान हिन्दू रीति-रिवाजों से संबंधित हैं, इनका सही पालन जीवन को सहज बना देता है।

अपनी मनोकामना पूरी होते देखना चाहते हैं तो पूजा के समय पहने इन रंगों के कपड़े

Apni Manokamna Puri Hote Dekhna Chahte Hain To Puja Ke Samay Pehne Rangon Ke Kapde

नवरात्रि, देवी आदि शक्ति को समर्पित हैं, उन्हें लाल रंग की चुनरी ओढ़ाई जाती है और उनका श्रृंगार किया जाता है।

आपको ये बात सुनकर भी हैरानी होगी कि लाल के अलावा भी मां को विभिन्न रंग पसंद हैं। उन रंगों को पहन कर अगर उनकी पूजा की जाए तो वे बहुत प्रसन्न होती हैं।

जानिए नवरात्रि के कौन से दिन आपको कौन से रंग के वस्त्र धारण करने चाहिएApni Manokamna Puri Hote Dekhna Chahte Hain To Puja Ke Samay Pehne Rangon Ke Kapde

देवी दुर्गा के नौ रूप होते हैं. दुर्गाजी पहले स्वरूप में ‘शैलपुत्री’ के नाम से जानी जाती हैं. इनके कपड़ों का रंग लाल होता है. ऐसे में आप भी लाल रंग पहन सकते हैं.

नवरात्र पर्व के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है. इस दिन रॉयल ब्लू रंग का खास महत्व है.

माँ दुर्गाजी की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा है. नवरात्रि उपासना में तीसरे दिन की पूजा का अत्यधिक महत्व है. देवी चंद्रघंटा की पूजा के दौरान पीले रंग के कपड़े पहनना अच्छा माना जाता है.

नवरात्र-पूजन के चौथे दिन कूष्माण्डा देवी के स्वरूप की उपासना की जाती है. इस दिन हरे रंग का बहुत महत्व है.

नवरात्रि का पांचवा दिन स्कंदमाता की उपासना का दिन होता है. इस दिन ग्रे रंग पहनना शुभ माना जाता है.

माँ दुर्गा के छठे स्वरूप का नाम कात्यायनी है. इस दिन लोगों को ऑरेंज रंग के कपड़े पहनने चाहिए

माँ दुर्गाजी की सातवीं शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती हैं. इस दिन सफेद रंग कि कपड़े पहनने चाहिए.

माँ दुर्गाजी की आठवीं शक्ति का नाम महागौरी है. दुर्गा मां की आठवें दिन की पूजा गुलाबी रंग के कपड़े पहनकर करनी चाहिए.

माँ दुर्गाजी की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री हैं. इनकी पूजा स्काई ब्लू़ रंग के कपड़े पहनकर करना शुभ माना जाता है.

 

किस किस व्यक्ति को है नवरात्रि के व्रत रखने की मनाही?

Kis Kis Vyakti Ko Hai Navratri Ke Vrat Rakhne Ki Manahi?

वैसे तो उपवासरखना सेहत के लिहाज से भी अच्छा है लेकिन नवरात्रि के व्रत 8 दिन के होते हैं इसलिए बहुत सोच विचार करने के बाद ही नवरात्रि व्रत रखने चाहिए।

आज हम आपको बताते हैं किन किन लोगों को नवरात्रि के व्रत नहीं रखने चाहिए।

कुछ लोग तमाम तरह की बीमारियों से ग्रसित होते हैं तो कुछ बेहद कमजोर होते हैं. ऐसे लोगों को डॉक्टर की सलाह पर ही फास्टिंग करनी चाहिए.Kis Kis Vyakti Ko Hai Navratri Ke Vrat Rakhne Ki Manahi

गर्भवती महिला को अपनी हेल्थ को ध्यान में रखकर ही व्रत करने चाहिए अन्यथा वे उपवास ना रखें. गर्भावस्था में बहुत सावधानियों की जरूरत होती है. चाहे तो अपनी डॉक्टर से सलाह लें.

डायबिटीज के रोगियों को उपवास करने से बचना चाहिए. यदि वे उपवास रख रहे हैं तो नवरात्र स्पेशल अपना डायट चार्ट बनाएं और ध्‍यान रखें कि आपकी डायट में शु्गर और साल्‍ट की मात्रा बहुत ज्या‍दा ना हो. साथ ही आलू, मीठे फल और खाद्य पदार्थ से परहेज करें.

मधुमेह के रोगियों को हर दो घंटे में कुछ ना कुछ खाते रहना चाहिए तो उपवास बिल्कुल खाली पेट ना करें. अधिक देर भूखा रहने से शरीर में ग्‍लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है जिससे परेशानियां होने लगती हैं.

यदि किसी की सर्जरी हुई है या फिर दवाईयां चल रही हैं तो ऐसे लोगों को भी उपवास से बचना चाहिए. यदि ये लोग उपवास कर रहे हैं तो डॉक्टर से कंसल्ट कर लें. साथ ही दवाएं उपवास के दौरान दवाएं खाना बंद ना करें.

ज्योतिष शास्त्रों में बताये गए हैं चंद्र-ग्रहण से बचाव के ये उपाय

Jyotish Shashtron Mein Bataye Gaye Hain Chandra-Grahan Se Bachav Ke Ye Upaye

सामान्यतौर पर माना जाता है कि ग्रहण का प्रभाव केवल गर्भवती स्त्री और उसके बच्चे पर ही पड़ता है लेकिन यह पूरा सत्य नहीं है। क्योंकि कहीं ना कहीं ग्रहण अपना प्रभाव दिखाकर ही जाता है।

ग्रहण का अर्थ ही नकारात्मक हालातों को दर्शाता है इसलिए इसके दुष्प्रभावों की अनदेखी नहीं की जा सकती। बेहतर है पहले से ही कुछ उपाय कर लिए जाए जो ग्रहण की रश्मियों को हमारे ऊपर हावी ना होने दें।

ज्योतिष शास्त्रियों का कहना है कि चंद्र ग्रहण क प्रभाव 108 दिनों तक रहता है, इसीलिए यह बहुत जरूरी है कि चंद्र ग्रहण के दौरान जाप किया जाए।Jyotish Shashtron Mein Bataye Gaye Hain Chandra-Grahan Se Bachav Ke Ye Upaye

आपने देखा होगा कि जैसे ही ग्रहण खुलता है वैसे ही लोग दान करते हैं, शास्त्रों में ऐसा करना बहुत जरूरी और लाभदायक करार दिया गया है।

चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्र देव पीड़ित होते हैं, उनका मंत्र जाप करने से उन्हें राहत महसूस होती हैं और वे जातक पर बुरा प्रभाव नहीं डालते।

मत्स्य पुराण में इस बात का उल्लेख किया गया है कि चंद्र ग्रहण के दौरान सफेद चंदन और सफेद फूलों से चंद्र देव की आराधना भी करनी चाहिए।

“ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चंद्रमसे नम:” अथवा “ॐ सों सोमाय नम:” का जाप करना अच्छे परिणाम देता है। ये वैदिक मंत्र हैं, इस मंत्र का जाप जितनी श्रद्धा से किया जाएगा यह उतना ही फलदायक होगा।

चंद्र ग्रहण के दौरान कुछ बातों का अवश्य ध्यान रखना चाहिए। इस पूरे काल के दौरान जाप, मंत्रोच्चारण, पूजा-पाठ और दान तो फलदायी होता ही है लेकिन धर्म सिंधु के अनुसार ग्रहण मोक्ष के उपरांत हवन करना, स्नान, स्वर्ण दान, तुला दान, गौ दान भी श्रेयस्कर है।

ग्रहण के दौरान पूरी तन्मयता और संयम से मंत्र जाप करना विशेष फल पहुंचाता है। इस दौरान अर्जित किया गया पुण्य अक्षय होता है। कहा जाता है इस दौरान किया गया जाप और दान, सालभर में किए गए दान और जाप के बराबर होता है।