किस समय राखी नहीं बांधनी चाहिए और क्यों?

Rakhi bandhne ka sahi samay kaun sa hai?

भाई बहन के अमिट प्यार का त्यौहार रक्षाबंधन आने वाला है. इस दिन भाई की कलाई पर राखी बांध कर बहन अपना स्नेह दिखाती है वहीँ भाई इस प्रेम के बदले जीवन भर बहन की रक्षा का वचन देता है. देखा जाये तो भारत में मनाये जाने वाले सैकड़ों त्योहारों में यह त्यौहार सबसे अनोखा है. लेकिन क्या आप जानते हैं राखी के बांधने का भी एक शुभ समय है जिस समय के अलावा राखी नहीं बंधी जानी चाहिए? अगर आप नहीं जानते तो आइये हम आपको बताते है की राखी किस समय बांधनी चाहिए.

raksha bandhan rakhiश्रवण नक्षत्र वर्ष में श्रावण की पूर्णिमा के दिन पूर्ण चंद्रमा से संयोग करता है। यही कारण है कि इसी नक्षत्र में रक्षा बंधन मनाया जाता है। 27 नक्षत्रों में एक श्रवण नक्षत्र को अति शुभ माना गया है, क्योंकि इसके आराध्य भगवान विष्णु हैं।
श्रवण नक्षत्र सभी प्रकार के अवरोधों को समाप्त कर सभी कार्यों को शुभ माना जाता है। भद्रा में राखी क्यों नहीं बांधी जाती है, ये बहुत कम लोग जानते हैं।

दरअसल, पंचाग के पांच भागों में से एक भाग करण भी होता है, जो शुभ व अशुभ दोनों ही प्रकार का होता है। ज्योतिष के अनुसार इस कारण का निवास पृथ्वी, स्वर्ग और पाताल में होता है। जब चंद्रमा मेष, वृषभ, मिथुन और वृष्चिक राशि में आता है, तब भद्रा का अशुभ प्रभाव हमारे किए गए कार्यों पर होता है। जिससे हमें कार्यों का पूरा फल प्राप्त नहीं होता है।
कन्या, तुला, धनु या मकर राशि में जब चंद्रमा होता है, तब भद्रा का वास पाताल में होता है यानी इस कारण का अशुभ प्रभाव मनुश्यों के कार्यों पर नहीं पड़ता है।

भद्रा को अशुभ मानने के पीछे हमारे शास्त्रों में एक कथा भी है। इस कथा के अनुसार एक बार राक्षसों ने देवताओं को युद्ध में हरा दिया। तब शिवजी ने क्रोध किया व उनके गुस्से से एक स्त्री प्रकट हुई, तो प्रेत की सवारी करती थी। उसने सभी दैत्यों का संहार कर दिया और देवताओं को विजय प्राप्त हुई।

विजयी होने के बाद देवताओं ने प्रसन्न होकर उसका नाम ‘भद्रा’ रखा और उसको ज्योतिष करणों में स्थान दिया। वह एक तरह की तामसिक शक्ति थी व प्रेत उसकी सवारी थी। इसलिए भद्राकाल में शुभ काम नहीं किए जाते हैं। यही कारण है कि भद्रा में राखी भी नहीं बांधी जाती है।

कांवड़ यात्रा पर किच – किच क्यों ? तारकेश कुमार ओझा

बचपन के दिनों में श्रावण के महीने में  अपने शहर के नजदीक से बहने वाली नदी से जल भर कर प्राचीन शिव मंदिर में बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक किया करता था। कुछ बड़े होने पर शिवधाम के तौर पर जेहन में बस दो ही नाम उभरते थे। मेरे गृहप्रदेश पश्चिम बंगाल का प्रसिद्ध तारकेश्वर और पड़ोसी राज्य में स्थित बाबा वैद्यनाथ धाम। बाबा तारकनाथ की महिमा पर इसी नाम से बनी बांग्ला फिल्म ने मेरे राज्य में हजारों ऐसे लोगों को भी कांवड़ लेकर तारकेश्वर जाने को प्रेरित किया जो तकलीफों का ख्याल कर पहले इससे कतराते थे। बाबा वैद्यनाथ धाम की यात्रा को ज्यादा महत्व इसी कथानक पर बनी फिल्म से मिला जिसमें प्रख्यात फिल्म अभिनेता स्व. सुनील दत्त ने डाकू का यादगार किरदार निभाया था।

Kanvad Yatraहालांकि बाबा बैद्यानाथ धाम जाने का अवसर मुझे कभी नहीं मिल पाया। अलबत्ता एक दशक पहले तक हर सावन में तारकेश्वर तक की कांवड़ यात्रा जरूर कर लेता था। पिछली अंतिम यात्राओं में बाबा तारकनाथ धाम जाने वाले रास्तों पर अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियों के उत्पाद का प्रचार करते बैनरों व पोस्टरों को देख कर मुझे इस बात का आभास हो गया था कि राजनीति और बाजार की पैनी नजर अब कांवड़ यात्रा पर भी पड़ चुकी है।

इसके बाद तो हर साल किसी न किसी बहाने कांवड़ यात्रा पर राजनीतिक विवाद और बयानबाजी सुनी ही जाती रही है। कभी हुड़दंग तो कभी डीजे बजाने को लेकर विवाद का बवंडर हर साल सावन से पहले ही शुरू हो जाता है।

निस्संदेह कांवड़ यात्रा में अगंभीर किस्म के भक्तों के अस्तित्व से इन्कार नहीं किया जा सकता जो महज मौज – मजे के लिए ऐसी यात्राएं करते हों। लेकिन विगत वर्ष संसद में एक माननीय का यह कथन कि केवल बेरोजगार लोग कांवड़ यात्रा करते हैं , मुझे काफी उद्वेलित किया। क्योंकि कांवड़ यात्रा का मेरा लंबा अनुभव रहा है। बचपन से लेकर युवावस्था तक मैने  बाबा तारकनाथ धाम की कांवड़  यात्रा पर निकलने वाले भक्तों में अधिकांश को श्रद्धा व भक्ति से ओत – प्रोत पाया है। मेरा निजी अनुभव है कि सावन की कांवड़ यात्रा छोटे – बड़े औऱ अमीर – गरीब के भेद को मिटाने का कार्य बखूबी करती आई है।

पिछले अनुभवों के आधार पर कह सकता हूं कि कांवड़ यात्रा में मैने अनेक धनकुबेरों को देखा जो शायद ही कभी अपने पैर जमीन पर रखते हों। लेकिन वे भी श्रद्धापूर्वक बोल बम के जयकारे के साथ भगवान शिव के जलाभिषेक को जा रहे हैं। रास्ते में संन्यासी की तरह दूसरों के साथ मिल – बैठ कर कुछ भी खा – पी रहे हैं या अन्यान्य कांवड़ियों के साथ रास्ते में बनने वाले अस्थायी शिविरों में आराम कर रहे हैं।

बेशक कांवड़ यात्रा में ज्यादा तादाद गरीब  और निम्न मध्य वर्गीय लोगों की ही होती थी जिनकी जिंदगी में तीर्थ या सैर – सपाटे के लिए कोई स्थान नहीं है। यह कांवड़ यात्रा उन्हें श्रद्धा – भक्ति के साथ संक्षिप्त तीर्थयात्रा का आभास कराती थी। पूरे रास्ते मानो कांवड़िये का भगवान शिव से मौन संवाद चल रहा हो। क्योंकि हर भक्त के होठों पर बुदबुदाहट साफ नजर आती थी। कांवड़ यात्रा पर विवाद य़ा राजनीति के लिए तब कोई स्थान ही नहीं था। बाबा धाम को जाने वाले रास्तों पर जो कुछ अस्थायी कैंप बनते थे उन्हें असीम श्रद्धा – भक्ति व समर्पण वाले भक्त आयोजित करते थे। जिनके लिए कांवड़ियों की सेवा – सुश्रुषा से बड़ा पुण्य अर्जन का कोई माध्यम नहीं हो सकता था। जो मिट्टी और कीचड़ से सने कांवड़ियों के पैरों को सहलाने को आतुर रहते थे। ताकि वे थोड़े सुस्ता कर आगे बढ़ सके।

शिविरों के सामने रास्ते पर ही वे हाथों में चाय – शिंकजी का गिलास थामे खड़े रहते । जिससे कोई कांवड़िया संकोच के चलते इसे स्वीकार करने से वंचित न रह जाए। घने अंधकार में आयोजक रोशनी का प्रबंध करते जिससे कांवड़ियों को रास्ता देखने में किसी प्रकार की परेशानी न हो। राजनैतिक लाभ की मंशा में किसी से ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती । हर शिविर के पास एक दानबॉक्स रखा होता था। जिसने श्रद्धापूर्वक कुछ डाल दिया तो डाल दिया ।

तब सोचा भी नहीं जा सकता था कि यह धार्मिक यात्रा कभी राजनैतिक वाद – विवाद का हथियार बन जाएगी।

विश्व हिन्दू परिषद् तथा बजरंग दल ने युवाओं को दिए त्रिशूल, कहा लव जिहाद और गौ हत्या पर लड़ेंगे

गांधीनगर : भगवा दल विश्व हिन्दू परिषद् तथा बजरंग दल ने अब गौ हत्या तथा लव जिहाद से लड़ने के लिए त्रिशूल बांटना शुरू कर दिया है. टाइम्स ऑफ़ इंडिया के हवाले से छपी रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ इसी साल 700 से अधिक त्रिशूल युवाओं को बांटे गए. तथा पिछले ढाई सालों में गांधीनगर में 4000 से अभी अधिक त्रिशूल बांटे गए हैं.

An activist from the hardline Hindu group Bajrang Dal, attends a protest rally in the northern Indian city of Lucknow September 12, 2007. Thousands of activists gathered on Wednesday to take part in a nation wide protest rally against the controversial project to carve a shipping channel in seas off the Indian south coast despite protests by religious groups who say it will destroy a mythical bridge of sand made by a Hindu god. पिछले सोमवार को विश्व हिन्दू परिषद् ने त्रिशूल दीक्षा प्रोग्राम के तहत 75 युवाओं को त्रिशूल बांटे. विहिप ने ऐसे कई अन्य प्रोग्राम आयोजित किये हैं जिनमे त्रिशूलों को बांटा जाता है.

विश्व हिन्दू परिषद् के सचिव महादेव देसाई ने बताया- पुलिस गौहत्या के कई केसों को सुलझाने में तथा दोषियों को पकड़ने में नाकाम रही है इसलिए समय आगया है कि अब हिन्दू युवा इस लड़ाई में आगे आएं. इतना ही नहीं, हम एंटी रोमियो स्क्वाड का भी गठन कर रहे हैं जो सभी शिक्षित संस्थानों की निगरानी करेंगे तथा लव जिहाद जैसे मुद्दों पर लड़ेंगे.

bajrang dal

हालाँकि उन्होंने यह साफ़ कर दिया कि बांटे जा रहे त्रिशूलों की लम्बाई सरकार द्वारा तय किये गए निषिद्ध हथियारों से 1 सेंटीमीटर छोटी है.

गांधीनगर पुलिस ने इस मुद्दे पर बात करते हुए कहा कि सार्वजानिक स्थानों पर पुलिस ऐसे किसी प्रकार के अस्त्र ले जाने की आज्ञा नहीं देगी.तथा कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी.

गौरक्षा :लागु होगा रासुका और गैंगस्टर एक्ट, बिना काऱण बताये गिरफ्तार करेगी UP पुलिस

उत्तरप्रदेश के DGP सुलखान सिंह ने मंगलवार को नया आदेश जारी किया जिसके अनुसार गायों की अवैध तस्करी या उनकी हत्या में शामिल किसी व्यक्ति पर रासुका तथा गैंस्टर एक्ट लगाया जाएगा.

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उन्होंने सभी सीनियर पुलिस अधिकारीयों की मौजूदगी में इसकी घोषणा की और कहा कि गायों कि सुरक्षा और उनके अवैध तस्करी को रोकने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून 1980 तथा गैंस्टर एक्ट लाने की जरूरत महसूस हुई है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि गौ रक्षा के नाम पर कानून को हाथ में लेने वालों से भी सख्ती से निपटा जाएगा

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के अंतर्गत पुलिस सिर्फ शक के आधार पर बिना किसी काऱण बताये किसी व्यक्ति को गिरफ़्तार कर सकती है.

जबकि गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत पुलिस जब चाहे इस एक्ट में किसी को ठाणे में हाजिर होने का समन जारी कर सकती है भले ही उस व्यक्ति के खिलाफ कोई नया केस दर्ज हुआ हो या न.

एक मानसिक रोगी के कहने पर खोद डाला नेशनल हाईवे, सपने में शिवलिंग देखने का किया था दावा

एक तरफ देश अंतरिक्ष में नए मुकाम हासिल कर रहा है तो दूसरी तरफ ऐसी घटनाएं सामने आती हैं जिनसे देश का सर शर्म से झुक जाता है.

नेताओं सहित कुछ लोगों ने हैदराबाद के पास के नेशनल हाईवे को खोद डाला. JCB मशीनों के द्वारा नेशनल हाईवे 163 को इस लिए खोद डाला गया क्योंकि किसी शख्स ने अपने सपने में इस जगह पर शिवलिंग के दबे होने की बात कही. स्थानीय नेताओं सहित लोगों की भीड़ ने 15 फ़ीट से भी ज्यादा गहरा गड्ढा खोद दिया परन्तु शिवलिंग नहीं मिला.

national highway digged

घटना हैदराबाद से 80 किमी दूर जनगांव की है जहाँ के एक निवासी मनोज ने सपने में शिवलिंग देखने की बात कही. मनोज कई दिनों से यह बात बार बार दोहरा रहा था. तथा लोगों से शिवरात्रि की रात इस जगह खुदाई की बात कह रहा था. हर सोमवार वह हाईवे के पास पूजा करता था. अंततः एक दिन मेजर हाईवे पर आया तो लेटने लगा तथा अजीबोगरीब हरकतें करने लगा जिसपर गांव के सरपंच और कुछ लोकल नेताओं ने मिल कर खुदाई की बात मान ली.

पहले मनोज ने 10 फ़ीट गहरा गड्ढा खुदवाया फिर कुछ न मिलने पर 15 फ़ीट कहा. जब फिर भी कुछ नहीं मिला तब उसने और दो फ़ीट गहरा गड्ढा खोदने को कहा. जिसके बाद स्थानीय पुलिस अधिकारी को उसपर शक हुआ. फिर पुलिस मनोज को एक लोकल नेता के साथ पकड़ कर ले गयी. पुलिस के अनुसार सड़क पर 15 फ़ीट लम्बा तथा 8 फ़ीट चौड़ा गड्ढा खोल दिया गया जिससे हाईवे के दोनों तरफ 1 किलोमीटर लम्बा जाम लग गया. यह हाइवे वारंगल से हैदराबाद को जोड़ता है जिसके बीचो बीच यह गड्ढा खोद दिया गया.

पुलिस ने मामले को सुलझाया तथा लोगों को हाईवे से हटा दिया है. एक स्थानीय के अनुसार मनोज की मानसिक स्थिति कई दिनों से ख़राब रही है और गाँव वालों ने उसे बेवजह तूल दे दिया. इस मामले में अबतक किसी पर FIR नहीं दर्ज हुई है.

नहीं दफनाया जाएगा आतंकवादियों को, मुस्लिम धर्मगुरुओं ने की अपील

लंदन : मुस्लिम धर्मगुरुओं ने लंदन हमले के बाद मारे गए आतंकियों का अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया है. इन्होने एक आवाज़ में यह कहा है कि ऐसी घटनाओं को रोकने का बस एक ही तरीका है कि सभी लोग एक जुट हो कर इनके खिलाफ खड़े हो जाएं तथा ऐसे लोगों ने किसी प्रकार की सहानुभूति न रखी जाये.

london attacks

खबर के अनुसार लंदन ने कुल 130 धर्मगुरुओं ने एक जुट हो कर कहा है कि मारे गए आतंकी अंतिम संस्कार के योग्य नहीं हैं, इन्होने निर्दोष लोगों का बेवजह खून बहाया है जिसकी वजह से इनका पारम्परिक अंतिम संस्कार नहीं किया जा सकता है. इनकी गतिविधियां किसी भी तरह से इस्लाम के तालीम के मुताबिक नहीं हैं.

गौरतलब है कि लंदन में पिछले शनिवार को रात 10 बजे आतंकी हमला हुआ था में 7 लोग मारे गए थे तथा 45 से अधिक लोग घायल हुए थे. पुलिस ने मात्र 8 मिनट के अंदर इन सभी 4 आतंकियों को मार गिराया था.

आपसी सहमति से उतार दिया गया मंदिर और मस्जिद का लाउडस्पीकर

जहां आए दिन देश में मंदिर और मस्जिद को ले कर सांप्रदायिक दंगे और झगडे देखने को मिलते हैं वही उत्तर प्रदेश के मोरादाबाद के इस गांव में हिन्दू और मुस्लिम समुदायों के बीच आपसी सौहार्द्य की एक अद्भुत मिसाल इस गांव में देखने को मिली
जहां लोगों ने आपसी सहमति से मंदिर तथा मस्जिद दोनों से लाउडस्पीकर उतार दिया ताकि दूसरों को परेशानी न हो.

लोगों ने न सिर्फ लाउड स्पीकर उतरा बल्कि यह फैसला भी लिया कि आने वाले समय में किसी भी धार्मिक कार्य में लाउड स्पीकर का प्रयोग नहीं किया जाएगा. ये फैसला दोनों समुदायों की सहमति से ख़ुशी ख़ुशी लिया गया.

गाँव वालों ने इस फैसले को बाकायदा लिखित तौर पर थाने में पेश किया है ताकि भविष्य में आपसी विवाद न हो और भाईचारा बना रहे.

गांव के हेमंत शर्मा ने मीडिया को बताया- मंदिर पर 2 लाउडस्पीकर लगे हुए थे जबकि मस्जिद पर 7 लगे थे. जिसको ले कर विवाद की शुरुआत हुई. हिन्दू समुदाय ने कहा कि मस्जिद पर भी 2 लाउडस्पीकर लगा लो और बाकि उतार दो, परन्तु बात नहीं बनी.

फिर मामले को गांव की पंचायत में ले जाया जहां पर यह फैसला लिया गया कि गांव में किसी भी धार्मिक आयोजन पर लाउडस्पीकर का प्रयोग नहीं होगा तथा मंदिर और मस्जिद दोनों से लाउड स्पीकर उतार दिए जाएंगे.

इस फैसले की सराहना प्रशासन ने भी की है तथा इससे आपसी भाईचारा बढ़ाने वाले फैसले के रूप में देखा जा रहा है.

अयोध्या के विकास पर योगी सरकार खर्च करेगी 350 करोड़ रूपए

अयोध्या : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने अयोध्या दौरे के दौरान शहर के विकास के लिए 350 करोड़ रुपयों की सौगात दी. धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण अयोध्या के लिए विकास की योजनाओं के बारे में योगी ने विस्तृत जानकारी दी.

yogi aadityanath

अपने उन्होंने कहा की बनारस और हरिद्वार की गंगा आरती की तरह अयोध्या में भी सरयू आरती होनी चाहिए. गौरतलब है कि 2002 के बाद यह पहला मौका है जब प्रदेश का मुख्यमंत्री रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या पहुंचा हो.

शहर के विकास पर बात करते हुए योगी ने कहा कि चप्पे चप्पे पर स्ट्रीट लाइट्स लगवाई जाएंगी और शहर में साफ़ सफाई का भी ख्याल रखा जाएगा. उन्होंने यह भी वादा किया कि शहर में बिना किसी भेदभाव के 24 घंटे बिजली दी जाएगी. इन सभी योजनाओं के जरिये राज्य सरकार अयोध्या के विकास पर 350 करोड़ रुपये खर्च करेगी.

अपनी इस योजना का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देते हुए उन्होंने कहा कि अयोध्या में जल्द ही राम जानकी मार्ग का निर्माण भी किया जाएगा.

हालाँकि मंदिर निर्माण के मुद्दे पर योगी अपने पुराने तेवरों के विपरीत नजर आए. उन्होंने बात चीत से मुद्दे को सुलझाने का समर्थन करते हुए कहा कि यदि कोई बात चीत से मुद्दे को सुलझाना चाहता है तो उत्तरप्रदेश की सरकार उसके साथ होगी.
योगी ने कहा कि ‘आज यह विवाद सुलझाने का नया अवसर बना है। मुझे बहुत अच्छा लगा कि लखनऊ में मुस्लिम संगठनों ने अयोध्या में राम जन्मभूमि को हिंदू समाज को सौंपने की वकालत की है लेकिन कुछ लोग नहीं चाहते की हम सब मिलकर रहें, क्योंकि अगर हम मिलकर रहे तो दुश्मनों को मौका नहीं मिलेगा। वे लोग देश का विकास नहीं चाहते इसलिए वे एकता की राह में बाधा डालने का प्रयास करेंगे। इसलिए मैं चाहूंगा कि हम आपसी सौहार्द से इस संपूर्ण विवाद का पटाक्षेप करें।’

मोदी सरकार के पशु बिक्री कानून पर मद्रास हाई कोर्ट ने लगायी रोक

चेन्नई : मद्रास हाई कोर्ट ने नरेंद्र मोदी जी भाजपा सरकार के पशु बिक्री कानून पर रोक लगा दी है. मद्रास हाई कोर्ट के मदुरै बेंच ने इस कानून पर 4 हफ्ते की रोक लगाते हुए केंद्र और राज्य सरकार से 4 हफ्ते में जवाब माँगा है.

madras high court
हाई कोर्ट ने यह फैसला 30 मई को सुनाया. आपको बता दें कि कुछ ही दिन पहले केन्द्र सरकार ने वध के लिए मंडियों और बाजार से पशुओं की बिक्री पर रोक लगा दी थी।
इस फैसले के आने के बाद कई राज्यों की सरकारों ने जम कर विरोध किया था। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कहा था कि केन्द्र सरकार ने फैसला राज्यों से बिना पूछे लिया है। इसी मामले को आगे बढ़ाते हुए केरल युथ कांग्रेस ने एक बछड़े को सरेआम काट दिया था जिसपर कांग्रेस को माफ़ी मांगनी पड़ी तथा युथ कांग्रेस के अध्यक्ष को निलंबित करना पड़ा.

जब हिन्दू- सिख भाइयों ने मिल कर मुसलमानों को दी तोहफे में मस्जिद

लुधियाना : रमजान के मौके पर आपसी सद्भाव और मेल जोल की मिसाल इस गांव में देखने को मिली जहाँ हिन्दू और सिखों ने मिल कर साथ रहने वाले मुसलमानों के लिए मस्जिद का निर्माण किया और तोहफे में दी.

hindu-muslim unity

लुधियाना के गालिब राण सिंह वाल गाँव के मुसलमानो को नमाज़ पढ़ने के लिए दुसरे गाँव जाना पड़ता था जिसको देख कर गांव के हिन्दुओं और सिखों ने मिल कर यह फैसला लिया कि गांव में ही मस्जिद का निर्माण होगा. गांव वालों के मुताबिक यह मस्जिद हमारी तरफ से मुस्लिम भाइयों के लिए ईद का तोहफा है.

मस्जिद का नाम हजरत अबू-बकर मस्जिद रखा गया है। वहीं खबर के मुताबिक इस मस्जिद को बनाने का फैसला 1998 में लिया गया था। इसके बाद मस्जिद बनाने के लिए जमीन एलॉट की गई थी। वहीं मस्जिद बनाने का काम बीते 2 मई से ही शुरू हो पाया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस गांव की आबादी काफी कम है। गांव की आबादी लगभग 1300 लोगों की है। इनमें से 700 सिख, 200 हिंदू और 150 लोग रहते हैं।

बता दें कि इससे पहले भी लोगों ने आपसी सद्भावना की जबरदस्त मिसाल पेश की थी जब बीते साल राजस्थान के सीकर जिले के लोगों ने जिले के कोलिडा गांव में मुस्लिम समुदाय द्वारा इस्तेमाल में बंद हो चुके एक कब्रिस्तान की जमीन, हिंदू समुदाय के लोगों को मंदिर का निर्माण के लिए दान कर दी गई थी।