बीजेपी सरकार का NDTV इंडिया को एक दिन के लिए बैन करने का फैसला

आज मीडिया में मीडिया से सम्बंधित एक ऐसी खबर छाई हुई है जो आने वाले समय में मीडिया की आजादी के प्रश्न को फिर से सुर्ख़ियों में ला सकती है. मामला एनडीटीवी इंडिया टीवी चैनल का है जो वर्तमान भारतीय जनता पार्टी सरकार की नीतियों का मुखर विरोधी माना जाता है और अरसे से मीडिया और सोशल मीडिया पर एक वर्ग के निशाने पर है. दरअसल आज भारतीय प्रसारण मंत्रालय की एक इंटर-मिनिस्ट्रीयल-कमिटी ने रिकमंडेशन दी है कि प्रमुख हिंदी समाचार चैनल NDTV इंडिया के प्रसारण को एक दिन के लिए ऑफ एयर किया जाए इसके पीछे कारण बताया जा रहा है पठानकोट आतंकी हमले में चैनल द्वारा कवर की गई स्टोरी को “रणनीतिक रूप से संवेदनशील” माना है।

bjp government may ban ndtv india for one day for pathankot airforce base coverageमंत्रालय अब चैनल एनडीटीवी इंडिया से 9 नवंबर को एक दिन के लिए ऑफ एयर करने को कह सकता है।

चैनल द्वारा पठानकोट आतंकी हमले की कवरेज में हमले की महत्वपूर्ण जानकारी से आतंकवादी इन जानकारियों से फायदा उठा सकते है जो ना केवल केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर नुकसान का कारण बन सकता है। बल्कि नागरिक और रक्षा कर्मियों के जीवन के लिए भी खतरा हो सकता है।

जनवरी में जब पठानकोट आतंकी हमले का ऑपरेशन हुआ था तो चैनल की कवरेज में कुछ महत्वपूर्ण जानकारीयां जैसे ऐयरबेस में गोला बारूद का भंडार मिग, लड़ाकू विमानों, रॉकेट लांचर, मोर्टार, हेलीकाप्टरों, ईंधन टैंक आदि कि जानकारियां उसमें शामिल थी।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि के सेना के ऑपरेशन के बारे में जरूरी जानकारिया जुटा कर चैनल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।

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अपने जवाब में चैनल ने कहा है कि यह “विस्तारपूर्वक व्याख्या” का एक मामला है और सबसे ज्यादा इस बारे में जानकारिंया पहले से ही प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, सोशल मीडिया में सार्वजनिक थी।

इस बारे में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा- सुन लो सारे चैनल वाले अगर मोदी जी की आरती नहीं उतारी तो आपका चैनल भी बंद कर देंगे

सुप्रीम कोर्ट के मशहूर वकील प्रशांत भूषण ने इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी पर खतरनाक हमला बताया। उन्होंने कहा, “सरकार ने पठानकोट हमले की कवरेज केलिए NDTV को बंद करने का फैसला किया है और दूसरी ओर यही सरकार सर्जिकल स्ट्राइक्स को भुनाती है। ये मीडिया और अवहीव्यक्ति की आज़ादी पर एक खतरनाक हमला है।

“कल ही मोदी गोयनका अवार्ड्स देते समय कहा था कि आपातकाल जैसा दौर दुबारा नहीं लौटना चाहिए और आज उन्होंने NDTV को बंद करने का हुक्म दे दिया। हाइपोक्रिट ! ”

इस सन्दर्भ में आपको याद दिल दें कि बहुत पहले राजीव गाँधी की सरकार के समय कांग्रेस पार्टी ने समाचार पत्रों की स्वायत्तता पर चोट करते हुए एक बिल पेश किया था जिसे राष्ट्रपति ज्ञानी जैलसिंह ने दो बार लौटा दिया था. बीजेपी सरकार के इस कदम से कुछ वैसा ही महसूस हो रहा है. विशेषकर तब, जबकि पत्रकारिता का मूल सिद्धांत ही यह है कि पत्रकार को सत्ता के विरोध और आलोचना में तत्पर और प्रशंसा में संकोची होना चाहिए.

खैर अगर सच में यह बैन लगता है तो आने वाले दिनों में इसे लेकर बवाल मचना स्वाभाविक है. कुछ लोगों का मानना है कि NDTV इंडिया चैनल इस मामले को कोर्ट में ले जा सकता है.

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