नयी दिल्ली: भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बृहस्पतिवार को भाजपा मुख्यालय में पार्टी के 30 से ज्यादा वरिष्ठ नेताओं के साथ तीन घंटे तक चली मैराथन बैठक में 2019 के चुनावों में पार्टी की 360 से अधिक सीटों का लक्ष्य दिया. सूत्रों के अनुसार भाजपा अध्यक्ष ने नेताओं को अपना ध्यान और प्रयास ऐसी लोकसभा सीटों पर लगाने को कहा है जहाँ 2014 के चुनावों में भाजपा प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा था.

modi amit shah 360 seats 2019 electionsयह संभावना भी जताई जा रही है कि केंद्र की मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में इसी महीने फेरबदल किया जा सकता है. मंत्रिमंडल में फेरबदल के पीछे तीन बातों पर जोर रहने की सम्भावना है:

पहला – कुछ ऐसे मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है जिनकी परफॉरमेंस से प्रधान मंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह खुश नहीं हैं.
दूसरा – आने वाले समय में गुजरात, राजस्थान, बंगाल आदि राज्यों में होने वाले चुनावों के मद्दे-नजर कुछ ऐसे तेज-तर्रार नेताओं को संगठन में लाया जा सकता है जिन्हें चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी दी जाएगी.
तीसरा – राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ भी कुछ मंत्रियों से नाराज चल रहा है. वैसे तो प्रधानमंत्री संघ को ज्यादा वजन देने के मूड में नहीं बताये जा रहे फिर भी संघ को पूरी तरह से नजरअंदाज कर पाना उनके लिए भी संभव नहीं होगा.

माना जा रहा है कि भाजपा तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और बंगाल पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित कर रही है. बंगाल में भाजपा की रणनीति चुनाव में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की है भले ही वह चुनाव में सीटों की ख़ास संख्या न भी ले पाए. कहा जा सकता है की भाजपा की रणनीति 2019 के चुनावों में बंगाल में लेफ्ट फ्रंट और कोंग्रेसको पीछे छोड़ कर दूसरे स्थान पर रहने अर्थात मुख्य विपक्ष की भूमिका में आने की है. वहां से भाजपा 2024 के चुनाव में राज्य की सत्ता पर पहुंचने की उम्मीद रख रही है.

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बुधवार को नौ मंत्रियों ने अमित शाह के सामने पेश होकर अपने कामकाज का लेखा-जोखा पेश किया. इन मंत्रियों में रविशंकर प्रसाद, प्रकाश जावडेकर, धर्मेंद्र प्रधान, पीयूष गोयल, जेपी नड्डा, नरेंद्र सिंह तोमर, निर्मला सीतारमण, मनोज सिन्हा और अर्जुन राम मेघवाल मौजूद थे।

पार्टी का मुख्य जोर उन 150 सीटों पर है जहाँ पार्टी 2014 के लोकसभा चुनाव में दुसरे स्थान पर रही थी. साथ ही बड़े राज्यों में से सिर्फ एक कर्नाटक ऐसा राज्य है जहाँ कांग्रेस अभी भी सत्ता में बची हुई है. अपने कांग्रेस मुक्त भारत के लक्ष्य में भाजपा कर्नाटक से भी कांग्रेस को उखाड़ फेंकना चाहेगी.

भाजपा अपने कुछ ऐसे सहयोगियों से भी पीछा छुड़ाना चाहती है जो उसके लिए सिरदर्द बने हुए हैं. इनमें अकालीदल, शिव सेना और इनेलो शामिल हैं. यही कारण है कि भाजपा 2019 के चुनाव में 360 से अधिक सीटों के लक्ष्य के साथ  उतरना चाह रही है.