मंदसौर में किसानों पर गोलियां चलवाना पड़ा महंगा- भाजपा की करारी हार

मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में किसान आंदोलन के बाद हुए नगर निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को करारा झटका लगा है. दो नगर परिषद के तीन वार्डों में भाजपा को करारी शिकस्त मिली है. तीनों जगहों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की है.

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मंदसौर जिले की शामगढ़ नगर पंचायत में दो वार्डों और गरोठ पंचायत में एक वार्ड के उपचुनाव के लिए 11 अगस्त को मतदान हुआ था. पांच दिन बाद हुई मतगणना में भाजपा को बुरी तरह शिकस्त का सामना करना पड़ा है.

शामगढ़ नगर पंचायत के दो वार्डों के चुनाव में कांग्रेस के गोपाल पटेल और निलेश संघवी ने जीत हासिल की. वहीं गरोठ के वार्ड नंबर 9 के उपचुनाव में भी कांग्रेस की संगीता चंदेल ने भाजपा उम्मीदवार को शिकस्त दी.

शामगढ़ और गरोठ दोनों जगहों पर भाजपा की परिषद होने के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवारों की जीत को किसान आंदोलन से जोड़कर देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि किसान आंदोलन के दौरान सरकार और भाजपा के खिलाफ नाराजगी के चलते भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है.

हालांकि, भाजपा प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि छोटे से चुनाव को किसान आंदोलन से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. वहीं, कांग्रेस के नेता इस जीत से बेहद उत्साहित दिखे.

5 अहम् बिंदु जो साबित करते हैं कि योगी सरकार ने डॉ. कफील को बलि का बकरा बना दिया

उत्तरप्रदेश के गोरखपुर में इंसेफेलाइटिस से अचानक हुई 66 से अधिक बच्चों की मौत ने देश भर को दहला दिया. पूरे देश से एक स्वर में दोषियों को पकड़ने की मांग हुई परन्तु योगी आदित्यनाथ की सरकार ने बच्चों को बचाने वाले डॉक्टर कफील अहमद खान पर ही एक्शन ले लिया. सोशल मीडिया पर तरह तरह के आरोपों का दौर शुरू हो गया.

परन्तु यह कोई नहीं जानता कि इन आरोपों में कितना दम है. आइये जानते हैं कि उत्तरप्रदेश की सरकार ने क्या सचमुच दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की है या फिर एक नए विवाद को जन्म दे कर मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाया है.

सोशल मीडिया पर उत्तरप्रदेश सरकार के समर्थकों ने कमोबेश एक जैसे ही आरोप डॉक्टर कफील पर लगाए हैं. जिनकी पड़ताल हिन्दीवार्ता ने विस्तृत रूप से की.

1. प्राइवेट क्लिनिक चलाते हैं

खान पर आरोप है कि वो अपना प्राइवेट क्लिनिक चलाते हैं, ये आरोप हास्यपद इसलिए हैं क्यों कि देश का कानून उन्हें इस बात कि इजाजत देता है.

अगस्त 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सरकारी डॉक्टर द्वारा अपना प्राइवेट क्लिनिक चलना कोई अपराध नहीं. भारत का लगभग हर सरकारी डॉक्टर अपना प्राइवेट क्लिनिक चलाता है.

हालाँकि एक बात गौर करने वाली है कि कुछ ही दिनों पहले डॉक्टर कफील ने शपथपत्र दायर किया था जिसमें साफ़ साफ़ लिखा था कि वह उत्तरप्रदेश सरकार के अधीन कार्य करते समय प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं करेंगे.

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अब यह देखना महत्वपूर्ण है कि क्या उन्होंने इसका उल्लंघन किया? यदि हाँ तो यह एक दोष है परन्तु बच्चों की मौत का इससे क्या वास्ता?

यहां सबसे बड़ी बात ये है कि डॉक्टर कफील के क्लिनिक चलाने की वजह से बच्चों की मौतें नहीं हुई. हादसे के समय डॉक्टर कफील वहाँ मौजूद थे और मरीजों की देखभाल कर रहे थे और इसके पर्याप्त सबूत भी हैं.

2. रेप के आरोपी हैं

एक आरोप यह भी लगाया जा रहा है कि डॉक्टर कफील पर रेप के आरोप हैं. हालाँकि इन सभी आरोपों को कोर्ट ने निराधार बता कर बंद कर दिया था परन्तु किसी व्यक्ति के जीवन की घटनाओं को इस दुर्घटना से जोड़कर देखना बेवकूफी नहीं तो और क्या है?

3. ऑक्सीजन सिलिंडर की चोरी किया करते थे

डॉक्टर खान पर यह भी आरोप है कि वह पूर्व में BRD अस्पताल से ऑक्सीजन की चोरी किया करते थे. यदि ऐसा है तो आखिर आजतक उनपर कोई केस दर्ज क्यों नहीं हुआ. और सबसे अहत्वपूर्ण बात ये है कि आखिर वो अस्पताल के बड़े ऑक्सीजन टैंक से ऑक्सीजन चुराते कैसे थे?

क्या वो लिक्विड ऑक्सीजन को बोतल में भर के घर ले जाते थे ?

क्यूंकि अस्पताल के जंबो सिलिंडर को उठाने के लिए तो ट्रक की आवशयकता पड़ती और ये काम चोरी छुपे तो किया नहीं जा सकता है.

4. खुद को मीडिया के सामने प्रमोट किया

योगी समर्थकों के अनुसार डॉक्टर कफील ने खुद को मीडिया के सामने पेश किया और बिना कोई काम किये मीडिया में खुद को मसीहा की तरह पेश किया.

परन्तु गोरखपुर के BRD अस्पताल के लोगों से बात करने पर साफ़ पता चलता है कि जब हॉस्पिटल में आधी रात को हाहाकार मचा तब डॉक्टर कफील सीधा वहां पहुंचे और मदद करने में आगे रहे. रात के 3 बजे जब मीडिया अस्पताल पहुंची तब भी कफील वहां पाए गए.

सीमा सुरक्षा बल ने भी इसपर पर्दाफाश किया है. SSB के डग के अनुसार त्रासदी के दिन डॉक्टर कफील उनके पास आये और उनसे ट्रकों की मांग की ताकि ऑक्सीजन सिलेंडरों को अस्पताल तक पहुँचाया जा सके. 10 अगस्त की रात को SSB के DIG ने ट्रक के साथ 11 जवान भी भेजे. यह सब डॉक्टर कफील के कहने पर हुआ.

कफील के प्रयासों से ही 3 जंबो सिलेंडरों की व्यवस्था हो सकी वरना मरने वालों की संख्या अधिक होती.

5. जानकारी रहने के बावजूद ऑक्सीजन वेंडर को पेमेंट नहीं किया

कुछ आरोप यह भी लग रहे हैं कि डॉक्टर कफील परचेज कमिटी के भी सदस्य थे और उन्होंने ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी के बकाया राशि की जानकारी सरकार को नहीं दी जिससे ऑक्सीजन की सप्लाई बंद हो गयी.

परन्तु योगी जी और उत्तरप्रदेश के स्वस्थ्य मंत्री बार बार यह कह रहे हैं कि अस्पताल में मौतें ऑक्सीजन की सप्लाई रुकने से नहीं हुई. तो फिर कफील के सप्लाई रोकने वाली बात का क्या औचित्य है?

परन्तु एक और बात सामने आयी है कि ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली पुष्पा सेल्स ने बकाया राशि के भुगतान के लिए बार बार पत्र लिखा है और ये पत्र उत्तरप्रदेश सरकार के बाल विकास मंत्री को भी लिखा गया है.

योगी सरकार के मंत्री को लिखा गया पत्र
योगी सरकार के मंत्री को लिखा गया पत्र

हर पत्र की एक कॉपी गोरखपुर के जिलाधिकारी को भी भेजी गयी थी. इतना सब होने के बावजूद योगी सरकार इस बात से अनजान कैसे थी?

सबसे बड़ा खुलासा तो 30 जुलाई को शहर के अखबार हिन्दुस्तान ने साफ साफ़ यह चेतावनी दी थी कि BRD अस्पताल की ऑक्सीजन की सप्लाई बंद की जा सकती है.

News About Oxygen stock
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इन सब के बावजूद योगी सरकार के मंत्री या प्रदेश के अधिकारीयों ने कोई एक्शन नहीं लिया और जिम्मेदार कफील खान को ठहरा दिया गया?

 

 

नेपाल के और करीब आया चीन – बाढ़ पीड़ितों को दी 10 लाख डालर की मदद

भारत-नेपाल के बदलते रिश्तों के बीच चीन ने नेपाल से नजदीकी बढ़ानी शुरू कर दी है. नेपाल आज 3 दशक में आयी सबसे भयानक बाढ़ से जूझ रहा है इस बाढ़ से अबतक 115 लोग मारे जा चुके हैं. और ऐसे में चीन ने नेपाल से रिश्ते मजबूत करने के लिए अपनी चाल चल दी है. चीन ने नेपाल के बाढ़ पीड़ितों के लिए 10 लाख डालर यानि 6.4 करोड़ रूपए दिए हैं जिससे बाढ़ पीड़ितों को तत्काल राहत पहुचायी जा सके.

आपसी रिश्ते मजबूत करने के लिए चीन ने नेपाल के साथ पेट्रोलियम गैस और खदान से सम्बंधित समझौते भी हुए. आरनिको राजमार्ग के पुनर्निमाण और केरूंग-रासुवागार्ही रोड के निर्माण के लिए 15 अरब डॉलर की परियोजना पर समझौता किया है।

चीन और नेपाल ने भविष्य में आपसी व्यापार को बढ़ाने पर भी सहमति दी. चीन के उप-राष्ट्रपति वांग ने नेपाल के पूर्व शाही महल के निर्माण का उद्घाटन किया। शाही महल भी भूकंप में क्षतिग्रस्त हो गया था। भूकंप के दो साल बाद चीन ने इस शाही महल की मरम्मत के लिए आर्थिक मदद दी थी। वांग ने नेपाले के पूर्व प्रधानमंत्रियों केपी ओली और पुष्प कमल दहल “प्रचंड” से भी मुलाकात की।

जब मोदी लाल किले से भाषण दे रहे थे तब चीनी सैनिक भारत में घुसपैठ कर रहे थे

भारत के प्रधानमन्त्री जब 15 अगस्त को लाल किले से भाषण दे रहे थे तब लद्दाख के पानगोंग झील के किनारे चीनी सैनिक भारत में घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे थे जिसपर भारतीय सैनिकों से उनकी हाथापाई हुई. खबर है कि चीनी सेना ने भारतीय सैनिकों के ऊपर पत्थर भी फेंके.

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पानगोंग झील के किनारे की घटना 135 किलोमीटर झील के फिंगर-6 के करीब सुबह 7.30 बजे हुई। इस झील का एक-तिहाई हिस्सा भारत के नियंत्रण में है, बाकी चीन के। भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच मारपीट और झड़प हुई लेकिन गोली नहीं चली। सूत्रों के अनुसार झील के चीनी हिस्से के किनारे बनी सड़क पर 52 ट्रक खड़े देखे गए। हालांकि शाम तक वो ट्रक वहां से चले गए। हालाँकि भारतीय सेना ने इस घटना पर किसी तरह का कमेंट करने से इनकार किया।

भारत और चीन के बीच टेंशन इस कदर बढ़ गयी है कि चीनी सेना ने कल भारतीय स्वतंत्रता दिवस में शामिल होने से इंकार कर दिया. हर साल चीनी सेना पीएलए के स्थापना दिवस एक अगस्त को होने वाली वार्षिक बैठक भी इस साल नहीं हुई। साल 2005 के बाद यह पहली बार हुआ है कि दोनों देशों की सालाना बैठक नहीं हुई हो.

भारतीय सेना के सूत्र ने बताया कि परंपरा के अनुरूप भारतीय सेना ने इस बार भी चीनी सेना को आमंत्रित किया था लेकिन चीनियों की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। चीनी डोकलाम के करीब नाथू ला समेत अन्य चार बैठक स्थलों पर होने वाली वार्षिक बैठक में नहीं शामिल हुए।

गोरखपुर त्रासदी: इस्तीफा मांगने पर बोले अमित शाह, पहली बार ऐसा हादसा नहीं हुआ है

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने गोरखपुर हादसे के बाद एक विवादित बयान दे दिया है. कांग्रेस द्वारा योगी के इस्तीफा पर जब उनसे सवाल किया गया तब श्री अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस का काम ही है इस्तीफा मांगना, इतने बड़े देश में बहुत से हादसे हुए हैं, पहली बार ऐसा कोई हादसा नहीं हुआ.

योगी आदित्यनाथ का बचाव करते हुए अमित शाह ने कहा “हम कांग्रेस कि तरह बिना जांच के गलती किसी पर नहीं थोपते. योगी जी ने जांच के आदेश दे दिए हैं और नतीजे आने पर हम कार्यवाही करेंगे. योगी जी ने टाइम बाउंड जांच रखा है. ये हादसा है, ये गलती है. हम गरीबों के लिए काम करते रहेंगे.”

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अमित शाह के इस बयान से बाद घमासान मचना तय है. सोशल मीडिया पर उनके बयान पर लोग बिफर पड़े हैं. एक ट्विटर यूजर के अनुसार- हादसे पहली बार नहीं हो रहे परन्तु जिमेदारी तो तय होनी चाहिए. ऐसे बेशर्मी से बयान देना भाजपा अध्यक्ष का घमंड दिखाता है.

आपको बता दें कि पिछले दिनों गोरखपुर में ऑक्सीजन सप्लाई बंद हो जाने के बाद एक साथ ३० से अधिक बच्चों कि मृत्यु हो गयी. जापानीज इंसेफेलाइटिस से लगातार हो रही इन मौतों पर अमित शाह से सवाल पूछे जा रहे थे जिसके जवाब पर उन्होंने यह बयान दिया.

स्‍व‍िटजरलैंड की पार्टी ने कहा- भ्रष्ट देश है भारत, कालधन का डाटा नहीं दे सकते

एक सवाल के जवाब में स्‍व‍िटजरलैंड की एसवीपी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एल्बर्ट रोस्टी ने कहा कि हम नहीं चाहते कि भ्रष्ट और अधिनायकवादी देशों को बैंकों का डाटा दिया जाए।
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स्विट्जरलैंड और भारत के बीच साल 2016 में एक करार हुआ था जिसके तहत दोनों देश टैक्स चोरी रोकने के लिए एक दूसरे के बैंक खातों की जानकारी साझा करेंगे। माना जाता है कि भारत के अधिकांश भ्रष्ट लोगों का पैसा स्विस बैंकों में जमा है. जिसपर बार बार यह मांग उठती रही है कि इन खाताधारकों की जानकारी शेयर की जाये ताकि सरकार इसपर एक्शन ले. वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी काला धन वालों पर सख्त कदम उठाने का वादा किया था. परन्तु स्विट्ज़रलैंड सरकार अगर यह कदम उठाती तो काले धन पर सरकार को बड़ी नाकामी हाथ लगेगी.

अत्याधिक भ्रष्ट और तानाशाही वाला देश है भारत

रिपोर्ट के अनुसार स्विस अखबार टैजेस-एंजीयर ने भारत समेत इन सभी देशों को “बहुत ज्यादा भ्रष्ट या फिर अर्ध-तानाशाही वाले देश” बताया है। रिपोर्ट के अनुसार एसवीपी ने दावा किया है कि स्विस संसद में भी उसे कई अन्य दलों का इस मुद्दे पर समर्थन प्राप्त है।

जानकारों का मानना है कि पनामा लीक के बाद भारत द्वारा दोषियों पर कोई कदम न उठा पाना भी एक बड़ी वजह मानी जा रही है. लोगों को अंदेशा है कि काले धन पर दी गयी सूचना का प्रयोग दोषियों को सजा देने के बजाये ग्राहकों को धमकाने तथा अवैध वसूली करने में करेंगे.

एसवीपी ने पिछले हफ्ते एक लिस्ट जारी की है जिसमें भारत, अर्जेंटिना, ब्राजील, चीन, रूस, सऊदी अरब, इंडोनेशिया, कोलंबिया, मेक्सिको, दक्षिण अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात को “भ्रष्ट देश” बताया गया है।

खुलासा: मार्च में ही ख़त्म हो गया था ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी के साथ कॉन्ट्रैक्ट

पुष्पा सेल्स के मालिक प्रवीण मोदी ने मीडिया को बताया कि भाजपा की सरकार आने के बाद इस साल मार्च में ही ऑक्सीजन सप्लाई का कॉन्ट्रैक्ट पुष्पा सेल्स के साथ ख़त्म हो गया था. और योगी की भाजपा सरकार ने BRD कॉलेज की ऑक्सीजन सप्लाई का ठेका अल्लाहाबाद की इम्पीरियल गैस नमक कंपनी को दे दिया था.

child dead in gkp

यह भी सामने आया है कि सेंट्रल ऑक्सीजन पाइपलाइन प्लांट के स्टाफ ने बाल चिकित्सा विभाग के प्रमुख को चिट्ठी लिख कर ऑक्सीजन के घटते स्टॉक के बारे में चेताया था. बाल चिकित्सा विभाग के प्रमुख को लिखी गयी चिट्ठी में उन्होंने साफ़ चेतावनी दी थी कि यदि ऑक्सीजन के घटते स्टॉक के बारे में यदि कोई कदम नहीं उठाया गया तो इससे भारी मात्रा में जनहानि भी हो सकती है.

हालाँकि इस चिट्टी का विभाग पर कोई असर नहीं हुआ और अंततः वही हुआ जिसकी आशंका सबको थी.

सोशल मीडिया पर लोगों ने इस मुद्दे पर सरकार से सवाल पूछने शुरू कर दिए हैं. कफील अहमद पर कार्यवाही करने के बाद क्या योगी क्षेत्र के DM पर एक्शन लेंगे? या फिर बार बार चिट्ठी लिखे जाने के बावजूद मंत्रालय की उदासीनता के लिए स्वस्थ्य मंत्री का स्तीफा लेंगे?

हालाँकि योगी सरकार ने मामले के जांच के आदेश दे दिए हैं परन्तु जापानीज इंसेफेलाइटिस से मरने वाले बच्चों की संख्या बारिश के इस मौसम में बढ़ती ही जा रही है.

बच्चों की जान बचाने वाले डॉ कफील खान को योगी सरकार ने हटाया

गोरखपुर त्रासदी में जी जान से बच्चों की जान बचाने वाले डॉक्टर कफील खान पर योगी सरकार की गाज गिरी है. खबरों के मुताबिक़ कफील खान बाबा राघव दास (BRD) मेडिकल कॉलेज के पीडियाट्रिक्‍स विभाग के नोडल अफसर पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह डॉ महेश शर्मा को पीडियाट्रिक्‍स विभाग का नया नोडल अफसर नियुक्‍त किया गया है।

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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार डॉक्टर कफील खान ने ऑक्सीजन की सप्लाई बंद हो जाने के बाद अपनी तरफ से ऑक्सीजन के सिलेंडरों की व्यवस्था कराई थी और खुद ही रात भर बच्चों की देख भाल में लगे रहे थे. इसके लिए मीडिया और साथी डॉक्टर्स ने भी उनकी काफी प्रशंसा की थी.

आखिर क्यों लिया गया ऐसा फैसला

माना जा रहा है कि डॉक्टर कफील पर कार्यवाही उनके प्राइवेट प्रैक्टिस की वजह से हुई है. सूत्रों के अनुसार योगी सरकार ने डॉक्टर कफील के प्राइवेट प्रैक्टिस को इस त्रासदी में एक प्रमुख कारण माना है. साथ ही यह भी कहा जा रहा है की इंसेफेलाइटिस से सबसे अधिक मौतें डॉक्टर कफील के वार्ड से ही हुई हैं.

टैंक हुए खराब, अंतर्राष्ट्रीय सैन्य प्रतियोगिता से भारत बाहर

रूस निर्मित T90 टैंकों में आयी खराबी ने भारत को अंतर्राष्ट्रीय सैन्य प्रतियोगिता से बाहर कर दिया. रूस की राजधानी मास्को में अंतर्राष्ट्रीय टैंक बैथलॉन 2017 का आयोजन किया जा रहा है इस प्रतियोगिता में हर देश अपने दो टैंक ले कर शामिल होता है जबकि भारत के दोनों ही टैंक खराब हो गए. भारतीय सेना ने देसी अर्जुन टैंक की जगह रूस में निर्मित T90 टैंकों को प्राथमिकता दी थी.

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एक अधिकारी ने कहा, ‘पहले टैंक की फैन बेल्ट टूट गई। इसके बाद रिजर्व टैंक को रेस में भेजा गया लेकिन सिर्फ दो किलोमीटर की दौड़ के बाद ही इसका पूरा इंजन ऑइल लीक हो गया। यह टैंक रेस पूरी ही नहीं कर पाया। बदकिस्मती से भारतीय टीम डिस्क्वॉलिफाइ हो गई।’

ये देश पहुंचे सेमीफइनल में

चीन इस प्रतियोगिता में टाइप-96बी टैंकों से साथ उतरा है। इस टैंक में दौड़ते समय भी दुश्मन के टैंक पर मशीन गनों से फायर करने और अन्य कई खूबियां हैं। वहीं रूस और कजाखस्तान टी-72बी3 टैंकों के साथ इस प्रतियोगिता में उतरे। वहीं बेलारूस के पास टी-72 टैंकों का आधुनिक रूप है। ये चारों देश अब फाइनल में भिड़ेंगे।

डीआरडीओ इस बात को लेकर नाराज है कि सेना ने अभी तक अर्जुन मार्कII का ऑर्डर नहीं दिया है। डीआरडीओ का कहना है कि मार्कII ने 2010 में हुए प्रतिस्पर्धी ट्रायल में टी-90एस टैंकों से बेहतर प्रदर्शन किया था।

पूरे विश्व में भारत की थू थू हो रही है पर मोदी जी चुप क्यों हैं?

गोरखपुर में पिछले 24 घंटों में 30 बच्चों के मारे जाने पर सोशल मीडिया पर संग्राम छिड़ गया है. लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी पर जम कर लताड़ लगाई है.

आपको बता दें कि गोरखपुर में BRD हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की सप्लाई ख़त्म हो जाने पर 30 बच्चों की अचानक मौत हो गयी जिसके बाद देश भर में हाहाकार मच गया.

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विदेशी मीडिया ने भी इस मुद्दे पर पूरी कवरेज दी है जिससे विदेशों में भी भारत की छवि खराब हो रही है.

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सोशल मीडिया पर लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि हर छोटी बात पर ट्वीट करने वाले प्रधानमंत्री मोदी ने 30 बच्चों की मौत पर संवेदना तक प्रकट करने की जहमत नहीं उठायी.

एक फेसबुक यूजर के अनुसार “पुर्तगाल में जंगल में लगी आग पर मरे लोगों पर प्रधानमंत्री बोल सकते हैं. रूस में विमान हादसा होने पर प्रधानमंत्री संवेदना प्रकट करते हैं पर गोरखपुर में 60 से अधिक बच्चे मारे गए पर प्रधानमंत्री ने एक्शन तो दूर, दो शब्द भी कहना ठीक नहीं समझा.”

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ट्विटर पर विशाल नाम के एक यूजर ने लिखा है “आपने उत्तरप्रदेश में शमशान और कब्रिस्तान के नाम पर विजय पायी और अब उत्तरप्रदेश को शमशान बना दिया है.”

एक अन्य यूजर ने लिखा है “जब गाय ऑक्सीजन छोड़ती है तो फिर ऑक्सीजन खरीदने की क्या जरूरत थी? योगी ने गायों की तैनाती क्यों नहीं की?”