1945 में दूसरे विश्व युद्ध ने ब्रिटिश सरकार यानी अंग्रेज़ों की आर्थिक हालत इतनी ख़राब कर दी थी की उनके लिए अपना देश संभालना मुश्किल हो गया था. इधर गाँधी-नेहरू की कोशिशों का असर अवाम में दिखाई देने लगा था.अंगरेज़ों ने हार कर 1947 में लार्ड माउंटबैटन को भारत का आखिरी वाइसराय चुना, जिस पर भारत को आज़ादी दिलाने की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी सौंपी गयी. लार्ड माउंबेटन ने आज़ादी की जंग का नेतृत्व करने वालों से बातचीत की और 03 जून 1948 की तारीख तय हो गई.

लार्ड माउंबेटन ने तय किया की भारत जून, 1948 में आज़ाद होगा. इस सिलसिले में वाइसराय ने भारतीय नेताओं से चर्चा भी की लेकिन सबसे बड़ी दुश्वारी मुहम्मद अली जिन्नाह और पंडित नेहरू के बीच जो तनाव था उसे लेकर बात नहीं बन पायी. पंडित नेहरू और जिन्नाह के इस तनाव के चलते जिन्नाह ने मुस्लिम लीग की मुसलामानों के लिए अलग देश की मांग का समर्थन कर दिया.अवाम जैसे ही ये खबर पहुंची तो देश के कई इलाक़ों में साम्प्रदायिक फसाद शुरू हो गए.

लार्ड माउंबेटन ने जल्द फैसला किया अब आज़ादी 1948 में नहीं 1947 में दी जाएगी.लार्ड माउंटबेन ने 15 अगस्त की तारीख़ तय की इसे वे शुभ मानते थे क्योंकि दूसरे विश्व युद्ध में लार्ड माउंटबैटन अलाइड फ़ोर्सेज़ के कमांडर थे तब 15 अगस्त, 1945 को जापानी फ़ौज ने आत्मसमर्पण किया था.लार्ड माउंटबेटन की इस शुभ तारीख (15 अगस्त) का देश के ज्योतिषियों ने विरोध किया ये तिथि अशुभ है देश में अमंगल हो जाएगा. लेकिन वाइसराय 15 अगस्त को ही लेकर अड़े थे. ख़ैर, ज्योतिषियों ने कहा 14 और 15 अगस्त की रात 12 बजे का समय तय किया जाए क्योंकि अंग्रेज़ों के हिसाब से दिन 12 AM पर शुरू होता है.ज्योतिषियों ने पंडित नेहरू से कहा कि वे अपना भाषण अभिजीत मुहूर्त में 11:51 PM से 12:39 AM के बीच दें और रात 12 बजे ख़त्म दें.